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Faridabad News: नए पोर्टल की तकनीकी खामियों से साढ़े पांच हजार इंतकाल लंबित
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पटवार एवं कानूनगो संगठन के पदाधिकारियों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जमीन के म्यूटेशन (इंतकाल) के लिए शुरू किए गए नए ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी खामियां अब आम लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं। पोर्टल की धीमी गति और सॉफ्टवेयर में आ रही दिक्कतों के कारण जिले में पांच हजार 631 इंतकाल लंबित हैं। इससे लोगों को जमीन का रिकॉर्ड अपडेट कराने, बैंक से ऋण लेने, मकान का नक्शा पास कराने और संपत्ति की खरीद-फरोख्त में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को पटवार एवं कानूनगो संगठन के पदाधिकारियों ने सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय पहुंचकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। पदाधिकारियों ने तकनीकी समस्याओं का जल्द समाधान कराने की मांग की।
पटवार एवं कानूनगो संगठन के जिला प्रधान परविंद्र अधाना ने आरोप लगाया कि करीब 20 वर्षों से म्यूटेशन का काम पुराने पोर्टल के माध्यम से सुचारू रूप से चल रहा था। कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी दिए बिना नया पोर्टल लागू कर दिया गया। इससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। कर्मचारियों को तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार प्रयास करना पड़ रहा है। जिसका सीधा असर लोगों के काम पर पड़ रहा है।
इंतकाल दर्ज, फिर भी जमाबंदी में नहीं दिख रहा नाम
कर्मचारियों के अनुसार नए पोर्टल की प्रमुख समस्या म्यूटेशन दर्ज होने के बाद सामने आ रही है। कई मामलों में रजिस्ट्री या विरासत के आधार पर इंतकाल दर्ज होने के बावजूद खरीदार, विक्रेता या वारिस का नाम अंतिम राजस्व रिकॉर्ड यानी जमाबंदी में दिखाई नहीं दे रहा है। इससे राजस्व रिकॉर्ड में विसंगति पैदा हो रही है और भविष्य में जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद की आशंका भी बढ़ रही है।
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1.54 लाख मामलों में 5,631 लंबित
जिले में कुल 1,54,024 इंतकाल के मामलों में से 5,631 मामले अभी लंबित हैं। संगठन ने सरकार से नए पोर्टल की तकनीकी खामियां तत्काल दूर करने की मांग की है। साथ ही कहा है कि यदि समस्या का जल्द समाधान नहीं होता तो पुराने पोर्टल को दोबारा शुरू किया जाए। इससे लंबित इंतकाल का निपटारा तेजी से हो सके और लोगों को तहसीलों व पटवारियों के चक्कर न लगाने पड़ें।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जमीन के म्यूटेशन (इंतकाल) के लिए शुरू किए गए नए ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी खामियां अब आम लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं। पोर्टल की धीमी गति और सॉफ्टवेयर में आ रही दिक्कतों के कारण जिले में पांच हजार 631 इंतकाल लंबित हैं। इससे लोगों को जमीन का रिकॉर्ड अपडेट कराने, बैंक से ऋण लेने, मकान का नक्शा पास कराने और संपत्ति की खरीद-फरोख्त में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को पटवार एवं कानूनगो संगठन के पदाधिकारियों ने सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय पहुंचकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। पदाधिकारियों ने तकनीकी समस्याओं का जल्द समाधान कराने की मांग की।
पटवार एवं कानूनगो संगठन के जिला प्रधान परविंद्र अधाना ने आरोप लगाया कि करीब 20 वर्षों से म्यूटेशन का काम पुराने पोर्टल के माध्यम से सुचारू रूप से चल रहा था। कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी दिए बिना नया पोर्टल लागू कर दिया गया। इससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। कर्मचारियों को तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार प्रयास करना पड़ रहा है। जिसका सीधा असर लोगों के काम पर पड़ रहा है।
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इंतकाल दर्ज, फिर भी जमाबंदी में नहीं दिख रहा नाम
कर्मचारियों के अनुसार नए पोर्टल की प्रमुख समस्या म्यूटेशन दर्ज होने के बाद सामने आ रही है। कई मामलों में रजिस्ट्री या विरासत के आधार पर इंतकाल दर्ज होने के बावजूद खरीदार, विक्रेता या वारिस का नाम अंतिम राजस्व रिकॉर्ड यानी जमाबंदी में दिखाई नहीं दे रहा है। इससे राजस्व रिकॉर्ड में विसंगति पैदा हो रही है और भविष्य में जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद की आशंका भी बढ़ रही है।
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1.54 लाख मामलों में 5,631 लंबित
जिले में कुल 1,54,024 इंतकाल के मामलों में से 5,631 मामले अभी लंबित हैं। संगठन ने सरकार से नए पोर्टल की तकनीकी खामियां तत्काल दूर करने की मांग की है। साथ ही कहा है कि यदि समस्या का जल्द समाधान नहीं होता तो पुराने पोर्टल को दोबारा शुरू किया जाए। इससे लंबित इंतकाल का निपटारा तेजी से हो सके और लोगों को तहसीलों व पटवारियों के चक्कर न लगाने पड़ें।