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कर्ज में डूबा नगर निगम अपने कर्मचारियों को उधार देकर भूला
Updated Mon, 06 Aug 2018 08:40 PM IST
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पहले कर्मचारियों को दिया उधार, बाद में खुद कर्ज का बीमार
फरीदाबाद। कर्ज में डूबे नगर निगम ने अपने कर्मचारियों यहां तक कि पार्षद भी को टेंपरेरी एडवांस पॉलिसी के तहत 46 लाख रुपये बांट दिए। कर्ज की यह धनराशि वसूल किए बिना ही निगम प्रशासन ने इन कर्मचारियों को एनओसी भी जारी कर दी। इस एनओसी के जरिए सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों ने पेंशन का पाने अधिकार हासिल कर लिया। निगम प्रशासन की इस लापरवाही का खुलासा आरटीआई के जरिए हुआ है।
नगर निगम फरीदाबाद पर पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। निगम में कर्मचारियों को जरूरत पूरी करने के लिए पेशगी के रूप में धन देने की टेंपरेरी एडवांस पॉलिसी है। सिटीजन वॉयस एंड आरटीआई एक्टिविस्ट फोरम के रवींद्र चावला ने निगम में आरटीआई लगाकर टेंपरेरी एडवांस पॉलिसी की जानकारी मांगी थी। उन्होंने जानकारी मांगी थी कि निगम के किन अधिकारियों को इस पॉलिसी के तहत पैसा दिया गया, किन अधिकारियों ने कर्ज की अदायगी की।
नगर निगम की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया कि अलग अलग अधिकारियों और एक पूर्व मेयर को 46 लाख रुपये की धनराशि इस मद में जारी की गई। उधार लेने वालों में पूर्व महापौर अशोक अरोड़ा भी हैं, उन पर निगम का 1.90 लाख रुपये बकाया है।
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रवींद्र चावला ने बताया कि वर्ष 2017 में उन्हें नगर निगम की बैलेंस शीट मिली थी। इस बैलेंस शीट में उन्होंने पाया कि एक सहायक इंजीनियर ने वाहन की रिपेयरिंग के लिए 36 हजार रुपये लिए थे लेकिन इस खर्च का हिसाब नहीं दिया गया था। कुछ माह बाद भी सहायक इंजीनियर सेवानिवृत्त हो गए। निगम प्रशासन ने उस धन का लेखा जोखा मांगे बिना ही सेवानिवृत्त सहायक इंजीनियर को एनओसी जारी कर दी। एनओसी जमा करने पर निगम की ओर से उनकी पेंशन भी शुरू हो गई। एक चीफ इंजीनियर ने भी सेवानिवृत्त होने से पहले टेंपरेरी एडवांस पॉलिसी के तहत 75 हजार रुपये लिए थे, सेवानिवृत्ति के बाद उनसे भी वसूली किए बिना ही एनओसी जारी कर दी गई। पूर्व महापौर अशोक अरोड़ा को भी निगम की ओर से 1.90 लाख रुपये उधार दिया गया जिसे आज तक वापस नहीं लिया गया। रवींद्र चावला कहते हैं कि निगम आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। ऐसे में उधार का धन वापस लिए बिना ही अधिकारियों को एनओसी जारी कर उन्हें पेंशन दी जा रही है, प्रदेश सरकार को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। निगम आयुक्त मो. शाईन ने मामले की जानकारी से इनकार करते हुए बताया कि वह जांच कराएंगे, यदि इस तरह की लापरवाही हुई तो रिकवरी कराई जाएगी।
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फरीदाबाद। कर्ज में डूबे नगर निगम ने अपने कर्मचारियों यहां तक कि पार्षद भी को टेंपरेरी एडवांस पॉलिसी के तहत 46 लाख रुपये बांट दिए। कर्ज की यह धनराशि वसूल किए बिना ही निगम प्रशासन ने इन कर्मचारियों को एनओसी भी जारी कर दी। इस एनओसी के जरिए सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों ने पेंशन का पाने अधिकार हासिल कर लिया। निगम प्रशासन की इस लापरवाही का खुलासा आरटीआई के जरिए हुआ है।
नगर निगम फरीदाबाद पर पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। निगम में कर्मचारियों को जरूरत पूरी करने के लिए पेशगी के रूप में धन देने की टेंपरेरी एडवांस पॉलिसी है। सिटीजन वॉयस एंड आरटीआई एक्टिविस्ट फोरम के रवींद्र चावला ने निगम में आरटीआई लगाकर टेंपरेरी एडवांस पॉलिसी की जानकारी मांगी थी। उन्होंने जानकारी मांगी थी कि निगम के किन अधिकारियों को इस पॉलिसी के तहत पैसा दिया गया, किन अधिकारियों ने कर्ज की अदायगी की।
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नगर निगम की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया कि अलग अलग अधिकारियों और एक पूर्व मेयर को 46 लाख रुपये की धनराशि इस मद में जारी की गई। उधार लेने वालों में पूर्व महापौर अशोक अरोड़ा भी हैं, उन पर निगम का 1.90 लाख रुपये बकाया है।
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रवींद्र चावला ने बताया कि वर्ष 2017 में उन्हें नगर निगम की बैलेंस शीट मिली थी। इस बैलेंस शीट में उन्होंने पाया कि एक सहायक इंजीनियर ने वाहन की रिपेयरिंग के लिए 36 हजार रुपये लिए थे लेकिन इस खर्च का हिसाब नहीं दिया गया था। कुछ माह बाद भी सहायक इंजीनियर सेवानिवृत्त हो गए। निगम प्रशासन ने उस धन का लेखा जोखा मांगे बिना ही सेवानिवृत्त सहायक इंजीनियर को एनओसी जारी कर दी। एनओसी जमा करने पर निगम की ओर से उनकी पेंशन भी शुरू हो गई। एक चीफ इंजीनियर ने भी सेवानिवृत्त होने से पहले टेंपरेरी एडवांस पॉलिसी के तहत 75 हजार रुपये लिए थे, सेवानिवृत्ति के बाद उनसे भी वसूली किए बिना ही एनओसी जारी कर दी गई। पूर्व महापौर अशोक अरोड़ा को भी निगम की ओर से 1.90 लाख रुपये उधार दिया गया जिसे आज तक वापस नहीं लिया गया। रवींद्र चावला कहते हैं कि निगम आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। ऐसे में उधार का धन वापस लिए बिना ही अधिकारियों को एनओसी जारी कर उन्हें पेंशन दी जा रही है, प्रदेश सरकार को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। निगम आयुक्त मो. शाईन ने मामले की जानकारी से इनकार करते हुए बताया कि वह जांच कराएंगे, यदि इस तरह की लापरवाही हुई तो रिकवरी कराई जाएगी।