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शहीदों के सपनों का भारत बनाने को करना है संघर्ष: कामरेड देवराय
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‘शहीदों के सपनों का भारत बनाने को करना है संघर्ष’
फरीदाबाद। देश को आजादी दिलाने के लिए शहीद हुए भगत सिंह, राजगुरु ओर सुखदेव सिंह की याद में सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा की ओर से शहीदों के सपने और आधुनिक भारत विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। शनिवार को नगर निगम सभागार में आयोजित सेमिनार में सरकारी विभागों और उद्योगों के अनेक अधिकारी, कर्मचारी और मजदूरों ने भाग लिया।
सेमिनार का आरंभ शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ हुआ। सकसं हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा ने कहा कि भगत सिंह देश को न सिर्फ ब्रिटिश राज से मुक्ति दिलाना चाहते थे बल्कि जात-पात, लिंगभेद, फिरकापरस्ती, छूआछूत, अंधविश्वास और भेदभाव को जड़ से उखाड़कर मानवता और बराबरी की स्थायी गारंटी निश्चित करना चाहते थे। भगत सिंह की यह विचारधारा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितने ब्रिटिश काल में थी। वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन व ईईएफआई के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष कामरेड एस देवराय ने कहा कि 70 साल की आजादी के बाद समाजवाद की बजाय शासक वर्ग जिस पूंजीवादी रास्ते पर भारत को ले गया उसका नतीजा आज किसी से छिपा नहीं है। सेमिनार का संचालक सकसं के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश शास्त्री ने किया। इस मौके पर सीटू के उपाध्यक्ष लाल बाबू शर्मा, निरंतर पराशर, कर्मचारी नेता युद्धवीर सिंह खत्री, गुरचरण सिंह खाडियां, यूएम खान, नवल सिंह नरवत, सतपाल नरवत, शब्बीर अहमद, करतार सिंह, गिरीशचंद्र, अध्यापक नेता राज सिंह, भीम सिंह, खुर्शीद अहमद, बलबीर सिंह बालगुहेर ने भी विचार व्यक्त किए।
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फरीदाबाद। देश को आजादी दिलाने के लिए शहीद हुए भगत सिंह, राजगुरु ओर सुखदेव सिंह की याद में सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा की ओर से शहीदों के सपने और आधुनिक भारत विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। शनिवार को नगर निगम सभागार में आयोजित सेमिनार में सरकारी विभागों और उद्योगों के अनेक अधिकारी, कर्मचारी और मजदूरों ने भाग लिया।
सेमिनार का आरंभ शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ हुआ। सकसं हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा ने कहा कि भगत सिंह देश को न सिर्फ ब्रिटिश राज से मुक्ति दिलाना चाहते थे बल्कि जात-पात, लिंगभेद, फिरकापरस्ती, छूआछूत, अंधविश्वास और भेदभाव को जड़ से उखाड़कर मानवता और बराबरी की स्थायी गारंटी निश्चित करना चाहते थे। भगत सिंह की यह विचारधारा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितने ब्रिटिश काल में थी। वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन व ईईएफआई के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष कामरेड एस देवराय ने कहा कि 70 साल की आजादी के बाद समाजवाद की बजाय शासक वर्ग जिस पूंजीवादी रास्ते पर भारत को ले गया उसका नतीजा आज किसी से छिपा नहीं है। सेमिनार का संचालक सकसं के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश शास्त्री ने किया। इस मौके पर सीटू के उपाध्यक्ष लाल बाबू शर्मा, निरंतर पराशर, कर्मचारी नेता युद्धवीर सिंह खत्री, गुरचरण सिंह खाडियां, यूएम खान, नवल सिंह नरवत, सतपाल नरवत, शब्बीर अहमद, करतार सिंह, गिरीशचंद्र, अध्यापक नेता राज सिंह, भीम सिंह, खुर्शीद अहमद, बलबीर सिंह बालगुहेर ने भी विचार व्यक्त किए।
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