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शहर में बनेगा स्मार्ट सीवरेज सिस्टम
Updated Mon, 17 Sep 2018 11:32 PM IST
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शहर में बनेगा स्मार्ट सीवरेज सिस्टम
- स्काडा से जुड़ेंगे डिस्पोजल, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, खत्म होगी ओवरफ्लो की समस्या
- एनआईटी जोन का सर्वे हुआ पूरा, 98 करोड़ रुपये के बजट से सुधरेगी सीवरेज व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी को सीवर जाम और ओवरफ्लो से मुक्ति दिलाने की कवायद नगर निगम प्रबंधन ने शुरू कर दी है। अबाधित सीवरेज सिस्टम के लिए पुरानी लाइनों का अपग्रेडेशन, बदलाव और नई लाइन बिछाने का खाका तैयार किया गया है। सीवर जाम और ओवरफ्लो की समस्या से निपटने के लिए सभी लाइन को नेटवर्क आधारित सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (स्काडा) तकनीक से लैस किया जाएगा। इससे समस्या का तुरंत समाधान हो सकेगा।
जर्मन नगर योजनाकार मेजर पीटर नॉर्मन निसेन के डिजाइन पर बसाए गए न्यू इंडस्ट्रियल टाउन में सीवरेज और स्टार्म वाटर लाइनों की व्यवस्था की गई थी। यह सीवर लाइन तीस साल के लिए डाली गई थीं। लाइन डाले हुए अब छह दशक बीत चुके हैं। तब से अब तक शहर की आबादी तीन गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है। बढ़ी हुई आबादी की जरूरतों को पूरा करने में यह लाइनें सक्षम नही हैं। यही कारण है कि सीवर जाम और ओवरफ्लो की समस्या शहर में आम है। नगर निगम प्रबंधन ने इस समस्या से निपटने के लिए स्काडा आधारित नई सीवरेज व्यवस्था करने की योजना बनाई है।
कंट्रोल रूम से होगा मॉनिटर
नगर निगम सूत्रों के मुताबिक, प्रथम चरण में एनआईटी जोन में सीवरेज व्यवस्था सुधरेगी, इसके लिए सर्वेे भी कराया जा चुका है। 98 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार हुआ है, इसमें पुरानी सीवेज लाइनों को अपग्रेड करना, नई लाइनें बिछाना, डिस्पोजल और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का अपग्रेडेशन और नए का निर्माण करना शामिल है। इस पूरी लाइन को स्काडा से लैस किया जाएगा। इससे नगर निगम के कंट्रोल रूम में बैठे-बैठे ही यह देखा जा सकेगा कि किस पाइपलाइन मेें सीवरेज का कितना फ्लो है। डिस्पोजल और एसटीपी की भी मॉनिटरिंग होगी।
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यदि कहीं ओवरफ्लो या सीवर जाम की समस्या होगी तो वह स्काडा मॉनिटरिंग में तुरंत पकड़ में आ जाएगी। इसे तुरंत दुरुस्त कराया जाएगा। सभी सीवर कनेक्शन नियमित किए जाएंगे और कंप्यूटर आधारित बिलिंग की जाएगी। निगम आयुक्त मो. शाईन ने बताया कि सीवरेज सिस्टम का उन्नयन (अपग्रेड) किया जाएगा। पहले चरण में एनआईटी जोन का सर्वे किया गया है। करीब 100 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार हुआ है। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इस पर काम शुरू करवाया जाएगा।
- स्काडा से जुड़ेंगे डिस्पोजल, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, खत्म होगी ओवरफ्लो की समस्या
- एनआईटी जोन का सर्वे हुआ पूरा, 98 करोड़ रुपये के बजट से सुधरेगी सीवरेज व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी को सीवर जाम और ओवरफ्लो से मुक्ति दिलाने की कवायद नगर निगम प्रबंधन ने शुरू कर दी है। अबाधित सीवरेज सिस्टम के लिए पुरानी लाइनों का अपग्रेडेशन, बदलाव और नई लाइन बिछाने का खाका तैयार किया गया है। सीवर जाम और ओवरफ्लो की समस्या से निपटने के लिए सभी लाइन को नेटवर्क आधारित सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (स्काडा) तकनीक से लैस किया जाएगा। इससे समस्या का तुरंत समाधान हो सकेगा।
जर्मन नगर योजनाकार मेजर पीटर नॉर्मन निसेन के डिजाइन पर बसाए गए न्यू इंडस्ट्रियल टाउन में सीवरेज और स्टार्म वाटर लाइनों की व्यवस्था की गई थी। यह सीवर लाइन तीस साल के लिए डाली गई थीं। लाइन डाले हुए अब छह दशक बीत चुके हैं। तब से अब तक शहर की आबादी तीन गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है। बढ़ी हुई आबादी की जरूरतों को पूरा करने में यह लाइनें सक्षम नही हैं। यही कारण है कि सीवर जाम और ओवरफ्लो की समस्या शहर में आम है। नगर निगम प्रबंधन ने इस समस्या से निपटने के लिए स्काडा आधारित नई सीवरेज व्यवस्था करने की योजना बनाई है।
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कंट्रोल रूम से होगा मॉनिटर
नगर निगम सूत्रों के मुताबिक, प्रथम चरण में एनआईटी जोन में सीवरेज व्यवस्था सुधरेगी, इसके लिए सर्वेे भी कराया जा चुका है। 98 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार हुआ है, इसमें पुरानी सीवेज लाइनों को अपग्रेड करना, नई लाइनें बिछाना, डिस्पोजल और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का अपग्रेडेशन और नए का निर्माण करना शामिल है। इस पूरी लाइन को स्काडा से लैस किया जाएगा। इससे नगर निगम के कंट्रोल रूम में बैठे-बैठे ही यह देखा जा सकेगा कि किस पाइपलाइन मेें सीवरेज का कितना फ्लो है। डिस्पोजल और एसटीपी की भी मॉनिटरिंग होगी।
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यदि कहीं ओवरफ्लो या सीवर जाम की समस्या होगी तो वह स्काडा मॉनिटरिंग में तुरंत पकड़ में आ जाएगी। इसे तुरंत दुरुस्त कराया जाएगा। सभी सीवर कनेक्शन नियमित किए जाएंगे और कंप्यूटर आधारित बिलिंग की जाएगी। निगम आयुक्त मो. शाईन ने बताया कि सीवरेज सिस्टम का उन्नयन (अपग्रेड) किया जाएगा। पहले चरण में एनआईटी जोन का सर्वे किया गया है। करीब 100 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार हुआ है। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इस पर काम शुरू करवाया जाएगा।