फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Faridabad News ›   चार वर्ष से सामान्य स्कूल की तरह चल रहा कन्या विद्यालय, विभाग को जानकारी नहीं

चार वर्ष से सामान्य स्कूल की तरह चल रहा कन्या विद्यालय, विभाग को जानकारी नहीं

Thu, 19 Jul 2018 10:00 PM IST
Updated Thu, 19 Jul 2018 10:00 PM IST
विज्ञापन
चार वर्ष से सामान्य स्कूल की तरह चल रहा कन्या विद्यालय, विभाग को जानकारी नहीं

विज्ञापन
सरकारी स्कूल का हाल : दो शिक्षक और 20 विद्यार्थी
- दयालपुर खेड़ा गांव में सर्व शिक्षा अभियान को लग रहा पलीता
- कक्षा एक से पांच तक के स्कूल में पढ़ते हैं सिर्फ बीस बच्चे

अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी के गांव दयालपुर में एक ऐसा सरकारी स्कूल भी है, जोकि शिक्षा विभाग के अधिकारियों में सर्व शिक्षा अभियान की अनदेखी को उजागर करता है। कक्षा-5 तक के इस स्कूल में जहां दो अध्यापक तैनात हैं, वहीं विद्यार्थियों की संख्या भी मात्र 20-21 ही है। खास बात यह है कि इन कुल विद्यार्थियों की संख्या बरसात के मौसम के दौरान मात्र चार से पांच ही रह जाती है।
दयालपुर के सरकारी स्कूल में गांव के सिर्फ चार ही बच्चों का एडमिशन है। इस स्कूल के बाकी बच्चे गांव के बाहर जंगल में मौजूद ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों के हैं। बरसात के दिनों में ईंट-भट्ठे बंद होने पर यह श्रमिक अपना पेट भरने के लिए किसी अन्य काम की तलाश में चले जाते हैं। ऐसे में वह अपने बच्चों को भी साथ ले जाते हैं। तब इस स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या मात्र चार से पांच ही रह जाती है। गांव का यह स्कूल करीब 22 साल पुराना है, मगर विगत करीब सात-आठ साल से स्थाई विद्यार्थियों की संख्या यहां दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाई है। विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए स्कूल में एक स्थाई अध्यापक दिनेश कुमार और अतिथि महिला अध्यापक कमलेश कुमार तैनात हैं। दोनों अध्यापकों की बायोमेट्रिक हाजरी लगाई जाती है। इन दिनों बायोमेट्रिक मशीन भी खराब है। इसलिए स्कूल के दोनों अध्यापक पास के गांव में बने सीनियर सेकेंडरी हाई स्कूल में अपनी हाजिरी लगाते हैं।
विज्ञापन


चार साल पहले कॉमन कर दिया गया स्कूल
दयालपुर खेड़ा का यह सरकारी स्कूल पहले सिर्फ लड़कियों के लिए था, मगर छात्राओं की लगातार गिरती संख्या को देखते हुए 2014 में इस स्कूल को कॉमन कर दिया गया था। इसके बाद इसमें छात्राओं के साथ ही छात्रों के एडमिशन भी शुरू कर दिए गए। इसके बावजूद स्कूल सिर्फ ईंट-भट्ठा श्रमिकों के बच्चों पर ही आधारित रहा है। दो-तीन माह की पढ़ाई करने के बाद श्रमिकों के यह बच्चे करीब पांच-छह माह के लिए कहीं चले जाते हैं। वापस आने पर स्कूल में फिर से उन्हें एडमिशन दे दिया जाता है। स्कूल की इमारत भी सिर्फ दो कमरों की है।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्कूल का नाम राजकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय है। कन्या विद्यालय को 2013-14 में ही राजकीय प्राथमिक स्कूल की संज्ञा दी जा चुकी है। रिकॉर्डों को दुरुस्त कराया जाएगा। जल्द ही स्कूल के मुख्य गेट पर भी स्कूल का नया नाम लिखवाया जाएगा।

-अनीता शर्मा, जिला खंड शिक्षा अधिकारी, बल्लभगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed