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आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक बताएंगे बड़खल झील भरने का तरीका
Updated Mon, 16 Jul 2018 06:56 PM IST
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आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक बताएंगे बड़खल झील भरने का तरीका
- हाइड्रो जियोलॉजी वैज्ञानिक डेढ़ माह में तैयार करेंगे फिजिबिलिटी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी की पहचान कही जाने वाले बड़खल झील कृत्रिम संसाधनों से भरे जाने के बाद लबालब रहेगी या यह पानी दरारों से रिस जाएगा इसका निर्धारण आईआईटी रुड़की के हाइड्रो जियोलॉजी वैज्ञानिक करेंगे। यानी बड़खल झील की रौनक अब आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट पर टिकी है।
बड़खल झील की प्राकृतिक रौनक लौटाने के लिए 2012 से प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने पद संभालने के बाद बड़खल झील भरने की घोषणा की थी। ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल बड़खल झील को समय सीमा में पानी भरने के लिए मुख्यमंत्री ने यह काम सिंचाई विभाग से लेकर स्मार्ट सिटी लिमिटेड को सौंप दिया। भूवैज्ञानिक तथ्यों के मुताबिक झील की तलहटी में दरारें पड़ने की वजह से पानी रिस गया था। यह समस्या दोबारा न हो इसके लिए मुख्यमंत्री ने झील को स्मार्ट तरीके से भरने के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल किया।
स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सलाहकार एनके कटारा ने बताया कि झील को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में शोधित पानी से भरा जाना है। आईआईटी रुड़की के हाइड्रो जियोलॉजी वैज्ञानिकों की सलाहकारी रिपोर्ट मांगी गई है कि यह पानी झील में भरा रहेगा या फिर पानी दरारों से रिस जाएगा और झील सूख जाएगी। संस्थान को 12 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। झील को एसटीपी के पानी से भरने की डीपीआर तैयार हो चुकी है, आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट आने के बाद ही प्रोजेक्ट पर काम किया जाएगा।
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आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक बताएंगे बड़खल झील भरने का तरीका
- हाइड्रो जियोलॉजी वैज्ञानिक डेढ़ माह में तैयार करेंगे फिजिबिलिटी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी की पहचान कही जाने वाले बड़खल झील कृत्रिम संसाधनों से भरे जाने के बाद लबालब रहेगी या यह पानी दरारों से रिस जाएगा इसका निर्धारण आईआईटी रुड़की के हाइड्रो जियोलॉजी वैज्ञानिक करेंगे। यानी बड़खल झील की रौनक अब आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट पर टिकी है।
बड़खल झील की प्राकृतिक रौनक लौटाने के लिए 2012 से प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने पद संभालने के बाद बड़खल झील भरने की घोषणा की थी। ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल बड़खल झील को समय सीमा में पानी भरने के लिए मुख्यमंत्री ने यह काम सिंचाई विभाग से लेकर स्मार्ट सिटी लिमिटेड को सौंप दिया। भूवैज्ञानिक तथ्यों के मुताबिक झील की तलहटी में दरारें पड़ने की वजह से पानी रिस गया था। यह समस्या दोबारा न हो इसके लिए मुख्यमंत्री ने झील को स्मार्ट तरीके से भरने के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल किया।
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स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सलाहकार एनके कटारा ने बताया कि झील को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में शोधित पानी से भरा जाना है। आईआईटी रुड़की के हाइड्रो जियोलॉजी वैज्ञानिकों की सलाहकारी रिपोर्ट मांगी गई है कि यह पानी झील में भरा रहेगा या फिर पानी दरारों से रिस जाएगा और झील सूख जाएगी। संस्थान को 12 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। झील को एसटीपी के पानी से भरने की डीपीआर तैयार हो चुकी है, आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट आने के बाद ही प्रोजेक्ट पर काम किया जाएगा।
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