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75 वर्ष से अधिक आयु के बंदियों की रिहाई के लिए सरकार कदम उठाए
Updated Sun, 03 Jun 2018 07:35 PM IST
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75 वर्ष से अधिक आयु के बंदियों की रिहाई के लिए सरकार कदम उठाए
फरीदाबाद। जेल में बंद 75 वर्ष से अधिक आयु के बंदियों की रिहाई के लिए सरकार को कदम उठाने की जरूरत है। इस उम्र में व्यक्ति अनेक प्रकार के शारीरिक व मानसिक कष्टों से गुजरता है। रविवार को नीमका स्थित जिला जेल के निरीक्षण पर आए सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति आदर्श गोयल व यूयू ललित ने जेल में बंद बंदियों से मुलाकात करने के बाद कहा। दोनों न्यायमूर्तियों ने बाल सुधारगृह का भी निरीक्षण किया। जिला जज दीपक गुप्ता ने दोनों न्यायमूर्तियों का स्वागत किया।
न्यायमूर्ति आदर्श गोयल ने कहा कि निरीक्षण के दौरान पता चला है कि कई मामलों में बंदियों को जमानती नहीं मिलने के कारण जेल में ही रहना पड़ता है। इस पर भी सरकार व न्यायालय को संज्ञान लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में गवाह के उपस्थित न होने के कारण या उनके न मिलने के कारण अदालतों में लंबित मामलों के निपटारे में देरी हो रही है। ऐसे मामलों में यदि मुल्जिम काफी दिनों से बंद है और गवाह नहीं आ रहे हैं तो बंदी को पर्सनल बॉड पर छोड़ दिया जाए या जमानत दे दी जाए। न्यायमूर्ति यूयू ललित ने कहा कि लीगल सर्विस अथॉरिटी अपने पैनल अधिवक्ताओं के माध्यम से बंदियों से तालमेल कर उनकी हर समस्या का समाधान कराएं, ताकि जेलों में रह रहे कैदियों को न्याय मिल सके और वे समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकें।
इस मौके पर मुख्य रूप से न्यायाधीश राजेश मल्होत्रा, कंचन माही, वीरेंद्र मलिक, कुलदीप सिंह, वीरेंद्र प्रसाद, देवेंद्र सिंह, जगजीत सिंह, जैसमीन शमा, सौरभ गोंसाई, तरुण सिंघल, डा. अशोक, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी व सचिव जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण मोना सिंह, संदीप कुमार, रितु यादव, गरिमा यादव, साक्षी सैनी, मंजीतपाल, राकेश कुमार व पैनल अधिवक्ता रविंद्र गुप्ता के अलावा पुलिस आयुक्त अमिताभ सिंह ढिल्लो और जिला उपायुक्त अतुल कुमार द्विवेदी भी मौजूद थे।
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फरीदाबाद। जेल में बंद 75 वर्ष से अधिक आयु के बंदियों की रिहाई के लिए सरकार को कदम उठाने की जरूरत है। इस उम्र में व्यक्ति अनेक प्रकार के शारीरिक व मानसिक कष्टों से गुजरता है। रविवार को नीमका स्थित जिला जेल के निरीक्षण पर आए सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति आदर्श गोयल व यूयू ललित ने जेल में बंद बंदियों से मुलाकात करने के बाद कहा। दोनों न्यायमूर्तियों ने बाल सुधारगृह का भी निरीक्षण किया। जिला जज दीपक गुप्ता ने दोनों न्यायमूर्तियों का स्वागत किया।
न्यायमूर्ति आदर्श गोयल ने कहा कि निरीक्षण के दौरान पता चला है कि कई मामलों में बंदियों को जमानती नहीं मिलने के कारण जेल में ही रहना पड़ता है। इस पर भी सरकार व न्यायालय को संज्ञान लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में गवाह के उपस्थित न होने के कारण या उनके न मिलने के कारण अदालतों में लंबित मामलों के निपटारे में देरी हो रही है। ऐसे मामलों में यदि मुल्जिम काफी दिनों से बंद है और गवाह नहीं आ रहे हैं तो बंदी को पर्सनल बॉड पर छोड़ दिया जाए या जमानत दे दी जाए। न्यायमूर्ति यूयू ललित ने कहा कि लीगल सर्विस अथॉरिटी अपने पैनल अधिवक्ताओं के माध्यम से बंदियों से तालमेल कर उनकी हर समस्या का समाधान कराएं, ताकि जेलों में रह रहे कैदियों को न्याय मिल सके और वे समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकें।
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इस मौके पर मुख्य रूप से न्यायाधीश राजेश मल्होत्रा, कंचन माही, वीरेंद्र मलिक, कुलदीप सिंह, वीरेंद्र प्रसाद, देवेंद्र सिंह, जगजीत सिंह, जैसमीन शमा, सौरभ गोंसाई, तरुण सिंघल, डा. अशोक, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी व सचिव जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण मोना सिंह, संदीप कुमार, रितु यादव, गरिमा यादव, साक्षी सैनी, मंजीतपाल, राकेश कुमार व पैनल अधिवक्ता रविंद्र गुप्ता के अलावा पुलिस आयुक्त अमिताभ सिंह ढिल्लो और जिला उपायुक्त अतुल कुमार द्विवेदी भी मौजूद थे।
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