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Faridabad News: फ्लैट बेचने के नाम पर 1.41 करोड़ ठगे, जमानत याचिका खारिज
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कोर्ट ने कहा-निष्पक्ष जांच के लिए आरोपी से पूछताछ जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने सेक्टर-37 में फ्लैट बेचने के नाम पर 1.41 करोड़ ठगने के आरोपी रूपेश गुप्ता की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने 22 अप्रैल को आदेश में कहा कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और निष्पक्ष जांच के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने मई 2025 में आरोपी के साथ एक निर्माणाधीन फ्लैट खरीदने का समझौता किया था। कुल सौदा 1.51 करोड़ रुपये में तय हुआ था, जिसमें से शिकायतकर्ता 1.41 करोड़ पहले ही दे चुका था और शेष 10 लाख रजिस्ट्री के समय देने थे। समझौते के अनुसार फ्लैट फरवरी 2026 तक तैयार कर सौंपा जाना था, लेकिन तय समय सीमा के बावजूद न तो फ्लैट तैयार हुआ और न ही बिक्री की प्रक्रिया पूरी की गई। बाद में आरोपी द्वारा फ्लैट देने से इनकार करने का आरोप भी सामने आया।
अदालत ने इस तथ्य को विशेष रूप से गंभीर माना कि जिस संपत्ति का सौदा किया गया, वह पहले से ही एक वित्तीय संस्था के कर्ज के अधीन थी, जबकि समझौते में इसे पूरी तरह कर्ज मुक्त बताया गया था। अदालत के अनुसार यह स्थिति आरोपी की शुरुआत से ही धोखाधड़ी की मंशा की ओर संकेत करती है। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी पहले भी धोखाधड़ी के एक अन्य मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। इस तथ्य को भी अदालत ने महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि इससे आरोपी के आचरण पर संदेह और मजबूत होता है। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि मामले की जांच अभी जारी है और पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए आरोपी से गहन पूछताछ जरूरी है। अदालत ने इस तर्क से सहमति जताते हुए कहा कि इस स्तर पर अग्रिम जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने सेक्टर-37 में फ्लैट बेचने के नाम पर 1.41 करोड़ ठगने के आरोपी रूपेश गुप्ता की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने 22 अप्रैल को आदेश में कहा कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और निष्पक्ष जांच के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने मई 2025 में आरोपी के साथ एक निर्माणाधीन फ्लैट खरीदने का समझौता किया था। कुल सौदा 1.51 करोड़ रुपये में तय हुआ था, जिसमें से शिकायतकर्ता 1.41 करोड़ पहले ही दे चुका था और शेष 10 लाख रजिस्ट्री के समय देने थे। समझौते के अनुसार फ्लैट फरवरी 2026 तक तैयार कर सौंपा जाना था, लेकिन तय समय सीमा के बावजूद न तो फ्लैट तैयार हुआ और न ही बिक्री की प्रक्रिया पूरी की गई। बाद में आरोपी द्वारा फ्लैट देने से इनकार करने का आरोप भी सामने आया।
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अदालत ने इस तथ्य को विशेष रूप से गंभीर माना कि जिस संपत्ति का सौदा किया गया, वह पहले से ही एक वित्तीय संस्था के कर्ज के अधीन थी, जबकि समझौते में इसे पूरी तरह कर्ज मुक्त बताया गया था। अदालत के अनुसार यह स्थिति आरोपी की शुरुआत से ही धोखाधड़ी की मंशा की ओर संकेत करती है। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी पहले भी धोखाधड़ी के एक अन्य मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। इस तथ्य को भी अदालत ने महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि इससे आरोपी के आचरण पर संदेह और मजबूत होता है। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि मामले की जांच अभी जारी है और पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए आरोपी से गहन पूछताछ जरूरी है। अदालत ने इस तर्क से सहमति जताते हुए कहा कि इस स्तर पर अग्रिम जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है।
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