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सरकार को नहीं बेटियों की सेहत का ध्यान, ये कैसा अभियान..
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सरकार को नहीं बेटियों की सेहत का ध्यान, ये कैसा अभियान
380 सरकारी स्कूलों में से महज 4 में ही सेनेटरी नेपकिन वेेंडिंग मशीन
राजकीय स्कूलों में हैं 52,615 छात्राएं, कक्षा आठ से 12 में हैं 19,768
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं की सेहत की तरफ सरकार का कोई ध्यान नहीं है। राजकीय स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं के खास दिनों (मासिक धर्म) में स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए कोई मुहिम नहीं चलाई। जिले के 380 राजकीय स्कूलों में मात्र चार स्कूल ही ऐसे हैं जहां सेनेटरी नेपकिन वेंडिंग मशीन लगाई गई हैं। यह वेंडिंग मशीनें भी एनजीओ (नॉन गर्वमेंट आर्गनाइजेशन) ने लगाई हैं और वे ही इनका संचालन कर रहे हैं। इसके अलावा फरीदाबाद के कई राजकीय स्कूल बिना शौचालय ही चल रहे हैं।
जिले के राजकीय स्कूलों में 52,615 बेटियां पढ़ रही हैं। इनमें कक्षा आठ से 12 तक की 19,768 छात्राएं हैं। किशोरावस्था में कदम रख चुकी कक्षा आठ से 12 तक की छात्राओं को खास दिनों में अपना विशेष ध्यान रखना होता है। मगर जागरूकता के अभाव व शर्म के कारण वह किसी से भी इस बारे में खुलकर बात नहीं कर पाती हैं। सरकार बच्चियों की सेहत के लिए बड़े-बड़े दावे तो करती है, मगर सरकारी स्कूलों की स्थित उनकी पोल खोल कर रख देते हैं। छात्राओं के खास दिनों के लिए जिले में एनआईटी-5, मेट्रो मोड, सराय ख्वाजा स्थित आदर्श विद्यालय व एनआईटी-2 स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में ही सेेनेटरी नेपकिन वेंडिंग मशीन उपलब्ध है। वह भी कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से लगाई गई है।
इतना ही नहीं बीते वर्ष सरकार की ओर से शिक्षा विभाग को इनोवेटिव हेड के नाम से दिया गया 26 लाख रुपये का बजट बच्चियों को स्कूल की ओर आकर्षित करने के लिए दिया गया था। मगर विभाग इस बजट का भी इस्तेमाल नहीं कर पाया और बाद में वह लैप्स हो गया। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी शशी अहलावत ने बताया कि स्मार्ट सिटी टीम और जिला उपायुक्त के साथ मिलकर इस दिशा में काम किया जा रहा है।
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सरकार को नहीं बेटियों की सेहत का ध्यान, ये कैसा अभियान
380 सरकारी स्कूलों में से महज 4 में ही सेनेटरी नेपकिन वेेंडिंग मशीन
राजकीय स्कूलों में हैं 52,615 छात्राएं, कक्षा आठ से 12 में हैं 19,768
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं की सेहत की तरफ सरकार का कोई ध्यान नहीं है। राजकीय स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं के खास दिनों (मासिक धर्म) में स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए कोई मुहिम नहीं चलाई। जिले के 380 राजकीय स्कूलों में मात्र चार स्कूल ही ऐसे हैं जहां सेनेटरी नेपकिन वेंडिंग मशीन लगाई गई हैं। यह वेंडिंग मशीनें भी एनजीओ (नॉन गर्वमेंट आर्गनाइजेशन) ने लगाई हैं और वे ही इनका संचालन कर रहे हैं। इसके अलावा फरीदाबाद के कई राजकीय स्कूल बिना शौचालय ही चल रहे हैं।
जिले के राजकीय स्कूलों में 52,615 बेटियां पढ़ रही हैं। इनमें कक्षा आठ से 12 तक की 19,768 छात्राएं हैं। किशोरावस्था में कदम रख चुकी कक्षा आठ से 12 तक की छात्राओं को खास दिनों में अपना विशेष ध्यान रखना होता है। मगर जागरूकता के अभाव व शर्म के कारण वह किसी से भी इस बारे में खुलकर बात नहीं कर पाती हैं। सरकार बच्चियों की सेहत के लिए बड़े-बड़े दावे तो करती है, मगर सरकारी स्कूलों की स्थित उनकी पोल खोल कर रख देते हैं। छात्राओं के खास दिनों के लिए जिले में एनआईटी-5, मेट्रो मोड, सराय ख्वाजा स्थित आदर्श विद्यालय व एनआईटी-2 स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में ही सेेनेटरी नेपकिन वेंडिंग मशीन उपलब्ध है। वह भी कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से लगाई गई है।
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इतना ही नहीं बीते वर्ष सरकार की ओर से शिक्षा विभाग को इनोवेटिव हेड के नाम से दिया गया 26 लाख रुपये का बजट बच्चियों को स्कूल की ओर आकर्षित करने के लिए दिया गया था। मगर विभाग इस बजट का भी इस्तेमाल नहीं कर पाया और बाद में वह लैप्स हो गया। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी शशी अहलावत ने बताया कि स्मार्ट सिटी टीम और जिला उपायुक्त के साथ मिलकर इस दिशा में काम किया जा रहा है।
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