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अमर उजाला अभियान: मालिकाना हक तय नहीं, निगम ने बांटे सीएलयू-एलआईओ

Fri, 22 Mar 2019 06:10 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 22 Mar 2019 06:10 PM IST
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अमर उजाला अभियान: मालिकाना हक तय नहीं, निगम ने बांटे सीएलयू-एलआईओ
अमर उजाला अभियान: मालिकाना हक तय नहीं, निगम ने बांटे सीएलयू-एलआईओ
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फरीदाबाद। अरावली को बचाने के जिम्मेदार अधिकारियों ने सरकारी नियम और कानूनों में चोर दरवाजे खोल कर माफिया को विश्व की सबसे प्राचीन प्राकृतिक संपदा लूटने का मौका दिया। वह भी तब जब अरावली के मालिकाना हक का केस न्यायालय में लंबित है। इधर केस विचाराधीन रहा और उधर अधिकारियों ने परंतुक (प्रोविजो) लगाकर माफिया को जमीन का सीएलयू करने का पत्र थमा दिया। खुद अधिकारियों ने ही अरावली में बेनामी संपत्ति बना डाली। यह आरोप अरावली बचाने की मुहिम में लगे सेव फरीदाबाद ग्रुप के सदस्यों का है।
सेव फरीदाबाद ग्रुप के सदस्य विष्णु गोयल बताते हैं कि अनखीर, अनंगपुर स्थित अरावली की जमीन पर नगर निगम मालिकाना हक का दावा करता है। वह बताते हैं कि अनखीर स्थित अरावली के कुछ इलाके के मालिकाना हक का दावा शहर के भीम सिंह नाम के व्यक्ति ने किया था, नगर निगम ने उसके दावे को नकारते हुए इसे निगम की जमीन करार दिया था। वर्ष 1997 से जमीन के मालिकाना हक का केस हाईकोर्ट में (आरएसएस 23) विचाराधीन है। वहीं, पवन शून्य बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट वर्ष 2008 में ही अरावली संरक्षित वन क्षेत्र घोषित कर चुका है। सरकारों ने भी अरावली को संरक्षित करने के लिए मास्टर प्लान 2011 से बाहर रखा, यानी इस क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। विष्णु गोयल कहते हैं कि सरकार ने व्यापक जनहित के कार्यों के लिए अरावली में निर्माण की गुुंजाइश रखी थी। यह कार्य बिना वन एवं पर्यावरण विभाग, खनन विभाग, जिला प्रशासन, नगर निगम सहित कई अन्य सरकारी विभागों से एनओसी हासिल किए नहीं हो सकते थे। उनका आरोप है कि निगम के अधिकारियों ने इसी प्रावधान का इस्तेमाल माफिया को लाभ पहुंचाने के लिए किया। वर्ष 2013-14 में तत्कालीन वरिष्ठ नगर योजनाकार ने अरावली संरक्षित क्षेत्र में फार्म हाउस, होटल आदि निर्माण के लिए पांच एलओआई/आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी किए। इन आशय पत्रों में शर्त लगाई गई कि यदि आवेदक वन विभाग, खनन विभाग, जिला प्रशासनन सहित अन्य संबंधित विभागों से एनओसी ले लेता है तो उसे सीएलयू दे दी जाएगी। आरोप है कि आवेदकों ने एनओसी तो ली नहीं निर्माण कार्य शुरू करवा दिए। गलत ढंग से एलओआई देने के कारण वरिष्ठ नगर योजनाकार सतीश पाराशर को निलंबित कर मुख्यालय से अटैक किया गया था।
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जांच में भी सामने आए कई नाम
धीरज राणा कहते हैं कि पांच एलओआई तो रद्द हुई नहीं, उनकी देखादेखी अन्य लोगों ने अरावली में अवैध फार्म हाउस, बैंक्वेट हॉल और मैरिज लॉन आदि बना डाले, इसके लिए हजारों की संख्या में हरियाली समाप्त कर दी गई। पूर्व निगमायुक्त एम शाईन ने अरावली में अवैध निर्माण और कब्जों की जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट में नगर निगम के कई अधिकारियों और उनके रिश्तेदारों के नाम भी प्लॉट होने की बात सामने आई थी। विष्णु गोयल का आरोप है कि अधिकारियों की बेनामी संपत्ति होने के कारण ही सर्वे रिपोर्ट पर दबा दी गई, उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने इसकी शिकायत स्टेट विजिलेंस में की है।
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