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गायत्री महायज्ञ से हुई शक्ति संवर्धन की अनुदानों की वर्षा
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महायज्ञ में 1296 दंपतियों ने दी आहूति
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित 108 कुंडीय महायज्ञ में शुक्रवार को 1296 दंपतियों ने आहूति डाल शक्ति संवर्द्धन का आह्वान किया। बाटा मेट्रो स्टेशन के निकट हुड्डा ग्राउंड पर आयोजित विशालतम यज्ञशाला में प्रवेश से पहले बनाए गए सजल श्रद्धा और प्रखरप्रज्ञा के प्रतीक स्तंभों में जलती हुई मशाल के विहंगम दृश्य को देखकर लोग शांतिकुंज की यादों में खो गए।
शुक्रवार से शुरू हुए 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में प्रत्येक कुंड पर चार-चार जोड़ों को बैठाया गया था। दोपहर बाद तक तीन पालियों में महायज्ञसंपन्न हुआ। इससे पहले ध्यान साधना दीप प्रज्वलन व देव पूजन कर गुरु सत्ता वगायत्री माता का आह्वान किया गया। इसमौके पर एनसीआर जोन के प्रभारी जमुनाप्रसाद साहू ने कहा कि गायत्री मंत्र सर्वोपरि मंत्र है, जिसकी साधना से अनेक प्रयोजनों को सिद्ध किया जा सकता है। इससे बड़ा और कोई मंत्र नहीं है।
एनसीआर जोन के सह प्रभारी श्री जयराम मोटवानीने कहा कि यदि किसी विशेष आपत्ति का निवारण करना हो तो गायत्री की उपासना से बेहतर और कोई साधना नहीं है उन्होंने कहा कि गायत्री साधना आत्मबल बढ़ाने का एक अचूक अध्यात्मिक व्यायाम है। शांतिकुंज के प्रतिनिधि दयानंद सूर्यवंशी ने कहा कि गायत्री का जाप करने से साधक को आयु, प्राण, शक्ति, कीर्ति, धन और ब्रह्मतेजजैसे रत्न प्राप्त होते हैं. उन्होंने इसे वेदमाता भी बताया, क्योंकि चारों वेदोंमें गायत्री मंत्र का किसी न किसी रूप में जिक्र किया गया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित 108 कुंडीय महायज्ञ में शुक्रवार को 1296 दंपतियों ने आहूति डाल शक्ति संवर्द्धन का आह्वान किया। बाटा मेट्रो स्टेशन के निकट हुड्डा ग्राउंड पर आयोजित विशालतम यज्ञशाला में प्रवेश से पहले बनाए गए सजल श्रद्धा और प्रखरप्रज्ञा के प्रतीक स्तंभों में जलती हुई मशाल के विहंगम दृश्य को देखकर लोग शांतिकुंज की यादों में खो गए।
शुक्रवार से शुरू हुए 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में प्रत्येक कुंड पर चार-चार जोड़ों को बैठाया गया था। दोपहर बाद तक तीन पालियों में महायज्ञसंपन्न हुआ। इससे पहले ध्यान साधना दीप प्रज्वलन व देव पूजन कर गुरु सत्ता वगायत्री माता का आह्वान किया गया। इसमौके पर एनसीआर जोन के प्रभारी जमुनाप्रसाद साहू ने कहा कि गायत्री मंत्र सर्वोपरि मंत्र है, जिसकी साधना से अनेक प्रयोजनों को सिद्ध किया जा सकता है। इससे बड़ा और कोई मंत्र नहीं है।
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एनसीआर जोन के सह प्रभारी श्री जयराम मोटवानीने कहा कि यदि किसी विशेष आपत्ति का निवारण करना हो तो गायत्री की उपासना से बेहतर और कोई साधना नहीं है उन्होंने कहा कि गायत्री साधना आत्मबल बढ़ाने का एक अचूक अध्यात्मिक व्यायाम है। शांतिकुंज के प्रतिनिधि दयानंद सूर्यवंशी ने कहा कि गायत्री का जाप करने से साधक को आयु, प्राण, शक्ति, कीर्ति, धन और ब्रह्मतेजजैसे रत्न प्राप्त होते हैं. उन्होंने इसे वेदमाता भी बताया, क्योंकि चारों वेदोंमें गायत्री मंत्र का किसी न किसी रूप में जिक्र किया गया है।
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