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विशेष: जानिए कैसे बना है 'मिशन मंगल' का यान

Wed, 24 Sep 2014 09:14 AM IST
Updated Wed, 24 Sep 2014 09:14 AM IST
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faridabad's iron was used in mission mars yan.

क्या आपको पता है कि जिस मंगल मिशन पर पूरा देश इतरा रहा है उसे लांच करने में औद्योगिक नगरी फरीदाबाद की भी ताकत लगी हुई है। इस महत्वाकांक्षी मिशन में यहां की एक कंपनी में बनी विशेष प्रकार की मिश्रधातु लगी है।

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पोलर सैटेलाइट लांचिंग व्हीकल (पीएसएलवी) सी-25 राकेट के प्रथम चरण की मोटर केसिंग फरीदाबाद में बनी मिश्रधातु से तैयार हुई है। इसे बल्लभगढ़ एवं छांयसा स्थित रक्षा साजोसामान बनाने वाली एक निजी कंपनी ने तैयार किया। यह कंपनी पिछले आठ साल से एयरोस्पेस टेक्नालॉजी का भी काम कर रही है।
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‘अमर उजाला’ से बातचीत में कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि मंगल मिशन के क्रायोजेनिक इंजन में भी यहां की धातु लगी है। कंपनी के मुताबिक पहले चरण में 650 से 700 डिग्री सेल्सियस तक तापमान सहने वाला मैटीरियल दिया गया है।
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स्टेज-2 में लगने वाले मैटीरियल को भी विकसित करने का काम चल रहा है। इस धातु को यहां से विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर त्रिवेंद्रम ने खरीदा था।

मशहूर स्टील वैज्ञानिक की टीम का कमाल

faridabad's iron was used in mission mars yan.

सूत्रों का कहना है कि इस लोहे को मशहूर स्टील वैज्ञानिक डॉ. एसके गोयल के नेतृत्व में एक टीम ने विकसित किया है। इस बारे में जब डॉ. गोयल से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हम परोक्ष रूप से ही सही, मंगल मिशन का हिस्सा हैं।

इसकी सफलता पर कंपनी की भी नजरें टिकी हुई हैं। एयरोस्पेस टेक्नालॉजी के उपकरणों के लिए अमेरिका एवं यूरोपियन देशों पर निर्भरता अब खत्म हो रही है। पहले हम इसे आयात करते थे, लेकिन अब बना रहे हैं। सैटेलाइट एवं लांचिंग व्हीकल के उच्च तापमान में रहने वाले हाई क्रिटिकल पार्ट्स देश में बन रहे हैं।

सैटेलाइट एवं उसके लांचिंग व्हीकल के पार्ट बनाने का आर्डर मिल रहा है। इस निजी कंपनी ने छांयसा नामक स्थान पर नई यूनिट स्थापित की है, जिसमें निकिल एवं कोबाल्ट आधारित मिश्रधातु के उपकरणों को बनाने के लिए जर्मनी से मशीनें मंगाई गईं हैं।

कंपनी के वैज्ञानिकों का कहना है कि चूंकि सैटेलाइट एवं उसके लांचिंग व्हीकल में लगाने वाली धातु बहुत कम तापमान से हजारों डिग्री सेल्सियस के तापमान में जाती हैं इसलिए इसे बनाने में खास ध्यान रखा जाता है। ताकि पार्ट उच्च तापमान में जाकर अपनी प्रॉपर्टीज मेंटेन रख सकें।

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