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तालाबंदी की कगार पर नगर निगम, 335 करोड़ का है कर्ज

Sat, 02 Apr 2016 09:32 AM IST
भोला पांडेय/अमर उजाला, फरीदाबाद
भोला पांडेय/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Sat, 02 Apr 2016 09:32 AM IST
सार

  • 335 करोड़ का है कर्ज, कर्मचारियों को वेतन देने के पड़े लाले 
  • 26 करोड़ के खर्च में चार से सात करोड़ रुपये ही हो पा रही है इंकम 
  • सरकार न दे अनुदान तो कर्मचारियों के घरों में न जल पाएं चूल्हे 
  • टैक्स वसूली के लिए निगम नहीं बना पा रहा कोई प्लान

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faridabad nagar nigam in heavy debt

विस्तार

सही तरीके से करों की वसूली न हो पाने और आय का कोई अन्य साधन न होने के कारण शहर का माईबाप कहा जाने वाला नगर निगम तालाबंदी के कगार पर खड़ा है। हालात इस कदर खराब हैं कि कर्मचारियों को वेतन देने तक के लाले पड़ रहे हैं।

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विकास कार्य कराने की बात तो दूर की है। हर महीने नियत 26 करोड़ रुपये के खर्च में महज 7-8 करोड़ रुपये की ही इनकम हो पा रही है। यानी हर महीने 16 से 18 करोड़ रुपये की कमी निगम को झेलनी पड़ती है।
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सरकार से मिलनी वाली ग्रांट के सहारे निगम चल पा रहा है। निगम के पास ऐसी कोई योजना नहीं है जिससे इनकम को बढ़ाया जा सके। एक-दो योजनाएं हैं भी तो वह भी फाइलों में दबी पड़ी हैं। इसके लिए निगम अधिकारी खुद जिम्मेदार हैं। यानी उन योजनाओं को धरातल पर लाना ही नहीं चाहते। यही कारण है कि वित्तीय संकट के चलते शहर के विकास कार्य ठप्प पड़े हैं।
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निगम पर 335 करोड़ का है कर्ज
-नगर निगम पर आज भी करीब 335 करोड़ रुपये का कर्ज है। इनमें 85 करोड़ रुपये का बकाया ठेकेदारों का है जिन्होंने शहर के विभिन्न हिस्सों में विकास कार्य किए हैं। ठेकेदार बकाए के लिए आंदोलन भी कर चुके हैं लेकिन आज तक उनका भुगतान चुकता नहीं हो पाया है। इसके अलावा गुडग़ांव नगर निगम से उधार ली गई धनराशि 170 करोड़ तथा हुडको से लिया गया 80 करोड़ रुपये है।

मात्र 11 करोड़ की हो पाई वसूली
नगर निगम की टैक्स वसूली का हाल देखिए कि इस वर्ष जनवरी और फरवरी महीने में मात्र 11 करोड़ रुपये की ही वसूली हाउस टैक्स, सीवर व पानी आदि से हो पाई है। निगम सूत्रों की मानें तो जनवरी में करीब 4 करोड़ और फरवरी महीने में मात्र 7 करोड़ की ही वसूली हो पाई है।

16 करोड़ रुपये वेतन पर होते हैं खर्च
नगर निगम के खर्चों पर नजर दौड़ाएं तो रेगुलर, पेरोल, ठेकेदारी और आउटसोर्सिंग के जरिए निगम में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों की संख्या 6500 से अधिक है। इनके वेतन पर हर महीने 16 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होते हैं। जिनमें तीनों जोन के करीब 3700 सफाईकर्मियों को साढ़े छह करोड़ रुपये वेतन भुगतान करना होता है। 

ना मिले ग्रांट तो बंद हो जाए निगम
प्रदेश का सबसे पुराना नगर निगम फरीदाबाद सरकार द्वारा मिलने वाली ग्रांट से ही चल रहा है। यदि सरकार ग्रांट न दे तो कभी भी ताला लग सकता है। वर्ष 2015-16 के बजट में सरकार से 530 करोड़ रुपये की मांग की गई थी जिसमें से सरकार ने करीब 200 करोड़ रुपये ही अनुदान दिया। इस बार 555 करोड़ रुपये की ग्रांट सरकार से मांग की गई है। 


निगम के बड़े खर्च:(विकास कार्य छोड़कर)
-कर्मचारियों का वेतन 16 करोड़ से अधिक
-दफ्तरों व ट्यूबवेलों के बिजली बिल पर 6 करोड़ से अधिक
-वाहनों में डीजल व पेट्रोल पर 90 लाख से अधिक

वर्ष 2007 के बाद नया प्रॉपर्टी टैक्स सर्वे किया जाएगा। इससे अभी तक की दो लाख इकाईयों से इसकी संख्या बढ़कर करीब पांच लाख तक हो जाएगी। इससे टैक्स में बढ़ोत्तरी होगी। साथ ही एनआईटी क्षेत्र में सरकार से फ्लोर एरिया रेसियो को बढ़ाने की गुजारिश की गई है। इनकम बढने के साथ-साथ अवैध निर्माण पर रोक लगेगी। साथ ही पॉर्किंग पॉलिसी और एडवरटीजमेंट पॉलिसी पर तेजी से काम हो रहा है। निश्चित रूप से इससे निगम की इनकम बढ़ जाएगी और धन की कमी नहीं होगी।-डॉ. आदित्य दहिया, निगमायुक्त नगर निगम

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