इंटरनेट से चलने वाली खास मशीन से करते थे ठगी, फर्जीवाड़े की तकनीक जानकर पुलिस भी हैरान
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इंटरनेट से चलने वाली एक ऐसी खास मशीन थी, जिसका इस्तेमाल कर करोड़ों का खेल चलता था। फर्जीवाड़े की तकनीक जानकर पुलिस भी हैरान रह गई। जानिए
नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर चलाकर अमेरिका के नागरिकों से धोखाधड़ी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय ठग गिरोह का थाना सेक्टर-49 पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने मंगलवार सुबह फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर संचालक समेत 23 लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस को अब भी मामले में एक तकनीक विशेषज्ञ, अमेरिकी नागरिकों का डाटा बेचने वाला और हवाला कारोबार से जुड़े एक व्यक्ति की तलाश है। एसएसपी डॉ. अजयपाल शर्मा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठगने वाला गिरोह पहली बार नोएडा पुलिस के हत्थे चढ़ा है। गिरोह का मास्टरमाइंड और फर्जी कॉल सेंटर का संचालक पीपली चौक मकराना नागौर राजस्थान निवासी भवानी सिंह है।
12वीं पास भवानी करीब दो माह पहले नोएडा आया था। इससे पहले उसने अपने दोस्त नितिश के साथ गुरुग्राम के ऐसे ही एक फर्जी कॉल सेंटर में लगभग छह माह तक नौकरी कर फर्जीवाड़ा सीखा। गुरुग्राम के ऑफिस पर छापा पड़ने के बाद सभी गिरफ्तार हो गए। नितिश भी जेल गया था। उस दिन छुट्टी पर होने के कारण भवानी सिंह बच गया था।
खास मशीन के सहारे इंटरनेट से ठगी
इसके बाद करीब डेढ़ माह पहले उसने नोएडा के सेक्टर-59 में किराये पर बिल्डिंग लेकर अपना फर्जी कॉल सेंटर खोल लिया। मामले में पुलिस को अभी भी इनके कॉल सेंटर का सेटअप तैयार करने वाले तकनीक विशेषज्ञ शंभू, आरोपियों को अमेरिका के नागरिकों का डाटा उपलब्ध कराने वाले और हवाला के जरिये इन लोगों को विदेशी मुद्रा का भुगतान भारतीय मुद्रा में करने वाले राजस्थान निवासी विनय की पुलिस को तलाश है।
एसएसपी ने बताया कि आरोपी फर्जी कॉल सेंटर में कंप्यूटर पर मेसेज टाइप कर उसे अमेरिका में बोली जाने वाली अंग्रेजी में वाइस मेसेज के तौर पर कनवर्ट कर लेते थे। इसके बाद ये लोग मेसेज को अमेरिका के नागरिकों के लैंडलाइन व मोबाइल फोन पर भेजते थे और लोन दिलाने का झांसा देते थे।
मैसेज में एक टोल फ्री नंबर भी दिया जाता था, इस पर फोन मिलाने पर यह कॉल भारत के इस फर्जी कॉल सेंटर के लैंडलाइन पर आती थी। खास बात ये है कि अमेरिका के नागरिकों को पता नहीं चलता था कि उनके पास भारत से मेसेज आया है या फोन पर उनकी बात भारत में हो रही है।
मैसेज और कॉलिंग में उन्हें अमेरिका का ही नंबर दिखता था। इसके लिए आरोपी एक खास मशीन का इस्तेमाल करते थे जो इंटरनेट से चलती है। ये मशीन और कॉल सेंटर का सेटअप तकनीक विशेष शंभू ने तैयार किया था, जो फरार है। झांसे में आने के बाद आरोपी लोन प्रक्रिया शुरू करने से पहले फाइल चार्ज के तौर पर 100-200 डॉलर वसूलते थे। फाइल चार्ज लेने के बाद संबंधित नागरिक से संपर्क तोड़ दिया जाता था।