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सूरत-ए-हालः यातना गृह से कम नहीं हैं अनाज मंडी की फैक्टरियां
Mon, 09 Dec 2019 05:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा
राजीव कुमार, नई दिल्ली
राजीव कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 09 Dec 2019 05:15 AM IST
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हादसे के बाद
- फोटो : अमर उजाला
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समय करीब दोपहर 12 बजे। जगह न्यू अनाज मंडी की एक फैक्टरी। इससे चंद कदम दूर अग्निकांड में 43 लोगों की मौत हो गई। इस इमारत का ढांचा भी कमोवेश आग की चपेट में आई फैक्टरी सरीखा था। इससे पहले पुलिस ने बैरीकेडिंग लगाकर इलाके को बंद कर रखा था।
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जद्दोजहद के बाद थोड़ा आगे बढ़े तो एक फैक्टरी का मुख्य दरवाजा खुला नजर आया। अंदर घुसते ही हैरान करने वाला नजारा दिखाई दिया। एक बारगी तो समझ ही नहीं आया कि वहां किस तरह अमानवीय हालात में लोग काम करते हैं। यहां जगह-जगह गंदगी फैली थी।
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संकरी और एकदम सीधी सीढ़ियों पर घुप अंधेरा था। इन सीढ़ियों से एक साथ दो लोग अगल-बगल नहीं चल सकते। यह सीढ़ियां तीन मंजिला इमारत के ऊपरी हिस्से तक पहुंचने का एकमात्र जरिया है। हर फ्लोर पर करीब 10 वर्ग मीटर के छोटे-छोटे एक से दो कमरे बने हैं।
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प्रत्येक में 10 से 15 मजदूर काम करते हैं। कमरे में हवा के लिए न तो खिड़की है और न ही कोई रोशनदान। मजदूरों की कमाई भी सिर्फ इतनी होती है कि किसी तरह पेट भर जाए।
इमारत की दूसरी मंजिल पर दो युवक मिले। मधुबनी (बिहार) का रहने वाले सुदान (22) ने बताया कि वह आठ साल से इस फैक्टरी में काम करता है। वह ज्वैलरी शोरूम में इस्तेमाल होने वाले थैला बनाता है।
फैक्टरी में छह लोग काम करते हैं और काम करने के बाद सभी वही पर सो जाते हैं। फैक्टरी मालिक आलम प्रति थैला उसे पांच रुपये देता है। उसके मुताबिक, फैक्टरी में सुबह नौ से रात 12 बजे तक काम चलता है।
सुदान शादीशुदा और एक बच्चे का पिता है। रोजी-रोटी के लिए वह ऐसे हालात में काम करता है। वह दिन में 80 बैग तैयार कर पाता है। दूसरे युवक ने अपना नाम मोहम्मद सद्दाम (20) बताया। उसने कहा कि वह पढ़ा-लिखा नहीं है और उनकी मजबूरी काम करना है।
परिवार में माता-पिता, पांच भाई और एक बहन है। वह घर में सबसे छोटा है और दो साल से यहां काम करता है। कमरे के भीतर आठ मशीनें लगी थीं और वहीं जमीन पर मजदूरों के बिस्तर लगे थे। जब हम ऊपर पहुंचे तो हैरान रह गए। ऊपर जाने वाले गेट पर जंजीर में लगा ताला लटक रहा था। ऐसे में अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि आग लगने की स्थिति में मजदूरों का क्या होगा।