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तिहाड़ में फर्जीवाड़ा: 2020 से 50 जेलकर्मी थे तैनात, मचा हड़कंप... सभी हुए बर्खास्त; ऐसे खुला पूरा मामला

Sat, 02 Dec 2023 08:41 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Sat, 02 Dec 2023 08:41 PM IST
सार

दिल्ली की तिहाड़ जेल में 50 फर्जी कर्मी और अधिकारियों की नियुक्ति का खुलासा हुआ है। जिसके बाद आनन-फानन में जेल प्रशासन ने सहायक अधीक्षक समेत सभी को नौकरी से बर्खास्त करने का नोटिस थमा दिया है।

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exposed 50 fake personnel and officers through DSSB in Delhi Tihar Jail
तिहाड़ जेल - फोटो : ANI

विस्तार

तिहाड़ जेल में नियुक्तियों में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। 2020 से जेल कर्मी बनकर 50 लोग अलग-अलग पदों पर कर रहे थे। इसमें नौ लोगों की तैनाती सहायक अधीक्षक के पद पर थी। जबकि 39 पर वार्डर और दो पर मेट्रन पद की जिम्मेदारी थी। इसका खुलासा बायोमेट्रिक और फोटो में विसंगति मिलने से हुआ।

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डीएसएसबी के जरिए हुई थी नियुक्ति
हैरानी की बात यह कि सभी नियुक्तियां दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसबी) के जरिए हुई थीं। इतने बड़े व सनसनीखेज फर्जीवाड़े की जानकारी बाहर आते ही जेल में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में जेल प्रशासन ने सभी को निलंबित कर दिया है। साथ ही नौकरी से बर्खास्त करने का नोटिस भी थमा दिया है।
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50 जेलकर्मियों को नोटिस
जेल के अधिकारियों ने बताया कि जिन 50 जेलकर्मियों को नोटिस जारी किया गया है। सभी तिहाड़, मंडोली व रोहिणी जेल परिसर में तैनात थे। फिलहाल सभी को निलंबित कर दिया गया है और उनसे कोई काम नहीं लिया जा रहा है। सभी 50 जेलकर्मी 2020 से जेल में कार्यरत थे।
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इस दौरान वह कई संवेदनशील जगहों पर तैनात रहे। जेल अधिकारियों ने बताया कि जेल में सहायक अधीक्षक पद तक के कर्मियों की भर्ती दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से होती है। इन पदों के लिए साल 2017 में भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई थी। पूरी प्रक्रिया होने के बाद 2020 में इनकी नियुक्ति हुई थी।

ऐसे हुआ खुलासा
साल 2020 में जेल में इन कर्मचारियों की नियुक्ति होने के बाद एक शख्स ने परीक्षा में हेरफेरी का आरोप लगाया। मामला के तूल पकड़ने के बाद दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने अपने स्तर पर छानबीन शुरू की। नियुक्ति की प्रक्रिया के दौरान दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड सभी परीक्षार्थियों के डाटा को लेता है और सुरक्षित रखता है।

जांच के दौरान बोर्ड ने भर्ती किए गए सभी 477 अधिकारी व कर्मचारियों के बायोमेट्रिक डाटा को अपने पास मौजूद डाटा से मिलान किया। इसमें 50 कर्मचारियों के डाटा का मिलान नहीं हुआ। इसके बाद पूरा फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ। बोर्ड की ओर से इस बात की जानकारी जेल प्रशासन को दी गई। जेल प्रशासन ने मामले पर कार्रवाई करते हुए सभी कर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया। इन्हें बर्खास्त किए जाने से पहले की प्रक्रिया के तहत 30 नवंबर को इन्हें एक महीना का नोटिस दिया है।

किसी अन्य के परीक्षा देने का है शक
जेल अधिकारी को आशंका है कि जिन लोगों की भर्ती हुई है, उनकी जगह पर किसी अन्य ने परीक्षा दी है। परीक्षा के दौरान कोई अन्य व्यक्ति परीक्षा केंद्र पर बैठा और उनसे असली परीक्षार्थी को परीक्षा उत्तीर्ण कराया। अधिकारियों का मानना है कि इन नियुक्ति में बड़े पैमाने पर धांधली की गई है। इसमें परीक्षा केंद्र के निगरानी अधिकारी से लेकर इससे जुड़े कई लोगों पर शिकंजा कसा जा सकता है।

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