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चीन और बांग्लादेश को मात देने के लिए बनेगा एक्सपोर्ट हब

Tue, 04 Feb 2020 02:35 AM IST
Vikas Kumar गौरव शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
गौरव शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 04 Feb 2020 02:35 AM IST
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Export hub will be built to beat China and Bangladesh
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

वैश्विक स्तर पर भारत के बड़े प्रतिद्वंदी के रूप में विकसित हुए चीन, बांग्लादेश और वियतनाम को निर्यात (एक्सपोर्ट) में पीछे छोड़ने के लिए गौतमबुद्ध नगर को पोंटेशियल एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्य रूप से रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग को योजनांतर्गत प्रोत्साहित किया जाएगा। केंद्र एवं प्रदेश सरकार के निर्देश पर जिला स्तरीय निर्यात संवर्धन समिति (डिस्ट्रिक्ट लेवल एक्सपोर्ट प्रमोशन कमेटी) गठित कर दी गई है।

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विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन, बांग्लादेश और वियतनाम से मिली तगड़ी प्रतिद्वंदता के कारण भारत को निर्यात कारोबार में हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। डायरेक्टर जर्नल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) की समीक्षा में सामने आया है कि सस्ती मजदूरी, निर्यात ड्यूटी में कमी और पर्यावरण संबंधी मुद्दों को लेकर विदेशी कारोबारियों का रुख इन देशों की ओर हुआ है। अपने देश में घटते निर्यात से केंद्र सरकार खासी चिंतित है। इसी से उबरने के लिए जिला स्तर पर पोंटेशियल एक्सपोर्ट हब विकसित करने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश सरकार का जोर जिले की पहचान बढ़ाने पर है। ऐसे में एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के अंतर्गत चयनित रेडीमेड गारमेंट्स को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
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5 फरवरी को खीचेंगे निर्यात की रूपरेखा
डीएम की अध्यक्षता में कमेटी का गठन हुआ है। इसमें डीजीएफटी, जिला उद्योग एवं प्रोत्साहन विभाग, बैंक, एमएसएमई आदि को सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है। बताया गया है कि 5 फरवरी को पहली बैठक होगी। निर्यात को कैसे बढ़ाया जाए? इसकी पूरी रूपरेखा तैयार की जाएगी। विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर डीजीएफटी को सौंपी जाएगी। 
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12 हजार करोड़ का है कारोबार
आंकड़ों में सामने आया है कि जिले में रेडीमेड गारमेंट्स की करीब 2700 यूनिट हैं। सालाना टर्नओवर करीब 12 हजार करोड़ रुपये का है। इन उद्योगों में लगभग सवा लाख लोग काम करते हैं। माल आयात करने वाली इकाई 425 हैं, जबकि निर्यात भी हजारों करोड़ रुपये का है, लेकिन पिछले कुछ सालों में निर्यात घटा है।

भारत सरकार दे सकती है ये रियायत?
अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, रूस समेत ब्रिटेन, फ्रांस, इटली जैसे यूरोपीय देशों का निर्यात कारोबार का रुख बांग्लादेश, वियतनाम की ओर हुआ है। इसके पीछे वजह निर्यात ड्यूटी का कम होना, मजदूरी सस्ती और पर्यावरण बेहतर होना बताया है। अफसरों का कहना है कि यदि निर्यात को बढ़ावा देना है तो भारत सरकार को भी दूसरे देशों को रिझाने के लिए मजदूरी सस्ती, निर्यात ड्यूटी की दरों में कमी लानी होगी। पर्यावरण में भी सुधार करना होगा। 5 फरवरी को इन्हीं बिंदुओं पर चर्चा होगी। जल्द ही निर्यातकों को भारत से बड़ी राहत मिल सकती है।


केंद्र एवं प्रदेश सरकार के निर्देश मिले हैं। रेडीमेड गारमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए जिले को पोटेंशियल एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। पांच फरवरी को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में इसकी रूपरेखा तैयार की जाएगी।
-अनिल कुमार, उपायुक्त-जिला उद्योग एवं प्रोत्साहन विभाग

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