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अब भी नहीं सुधरे तो दिल्ली में फिर देखेंगे कोरोना की नई लहर
Mon, 14 Dec 2020 12:28 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Mon, 14 Dec 2020 12:28 PM IST
सार
- मास्क और सोशल डिस्टैसिंग को ही दिल्ली वालों के लिए असली बचाव बताया
- तीसरी से भी ज्यादा घातक हो सकती है चौथी लहर
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एक शख्स के स्वैब का नमूना एकत्र करती महिला स्वास्थ्य कर्मी।
- फोटो : PTI
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विस्तार
दिल्ली में कोरोना वायरस को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लोगों ने अभी भी सबक नहीं लिया तो दिल्ली वाले एक बार फिर कोरोना संक्रमण की नई लहर दे सकते हैं। महामारी विशेषज्ञों का यहां तक कहना है कि दिल्ली एकमात्र ऐसा राज्य है जहां के लोग तीन तीन बार कोरोना की लहर देख चुके हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह दिल्ली के लोगों की ओर से नियमों का पालन करना नहीं है।
दिल्ली में अगर नियमों की सख्ती से पालन किया जाता है तो पूरी उम्मीद है कि राजधानी को संक्रमण की चौथी लहर देखने को न मिले। सफदरजंग अस्पताल के डॉ. जुगल किशोर का कहना है कि दिल्ली में अब तक तीन बार संक्रमण की लहर देखी जा चुकी है। हर बार लोग लापरवाही बरतने लगते हैं और संक्रमण का अपना असर तेज कर लेता है।
आंकड़ों पर ही गौर करें तो दिल्ली में कोरोना की हर लहर पिछली वाली की तुलना में ज्यादा असरदार रही है। पहली लहर में जहां रोजाना दो हजार से कम संक्रमित मरीज मिल रहे थे वही आंकड़ा तीसरी लहर आते आते साढ़े आठ हजार तक पहुंच गया था। इसके अलावा दिल्ली में सबसे ज्यादा मौतें नवंबर माह में हुई हैं। जब कोरोना की तीसरी लहर के दौरान ढ़ाई हजार से ज्यादा लोगों की मौत 30 दिन में हुई है।
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दिल्ली एम्स के डॉ. विनोद कुमार का कहना है कि दिल्ली में अगर त्योहार के वक्त लोग सावधानी बरतने का प्रयास करते तो शायद राजधानी को तीसरी बार संक्रमण के प्रकोप का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा कि अभी भी कोरोना वायरस की अगली लहर को आने से रोका जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि दिल्ली के हर व्यक्ति का सहयोग मिले।
इनके अलावा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के पूर्व महामारी विशेषज्ञ डॉ. रमन आर गंगाखेड़कर का कहना है कि कोरोना वायरस की बार बार लहर आ सकती हैं। दुनिया के कई देशों में दो दो बार संक्रमण की लहर देखने को मिल चुकी है। भारत में अलग अलग राज्य में लहर अलग ही दिखाई दे रही है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं है कि अगर लोग सचेत नहीं हुए तो दिल्ली में चौथी, पांचवीं और छठी तक लहर देखने को मिल सकती है।
उधर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली के लोगों में संक्रमण को लेकर बहुत जल्दी भ्रामकता आ गई है। लोगों को लगता है कि उन्हें संक्रमण नहीं होगा। उनके परिवार में किसी को यह बीमारी नहीं होगी। इसलिए लोग भी अपने पुराने वाले व्यवहार की ओर वापस आ रहे हैं लेकिन लोगों को यह समझना जरूरी है कि टीका आने के बाद भी मास्क और सोशल डिस्टैसिंग का पालन हम सभी को करना है।
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दिल्ली में अगर नियमों की सख्ती से पालन किया जाता है तो पूरी उम्मीद है कि राजधानी को संक्रमण की चौथी लहर देखने को न मिले। सफदरजंग अस्पताल के डॉ. जुगल किशोर का कहना है कि दिल्ली में अब तक तीन बार संक्रमण की लहर देखी जा चुकी है। हर बार लोग लापरवाही बरतने लगते हैं और संक्रमण का अपना असर तेज कर लेता है।
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आंकड़ों पर ही गौर करें तो दिल्ली में कोरोना की हर लहर पिछली वाली की तुलना में ज्यादा असरदार रही है। पहली लहर में जहां रोजाना दो हजार से कम संक्रमित मरीज मिल रहे थे वही आंकड़ा तीसरी लहर आते आते साढ़े आठ हजार तक पहुंच गया था। इसके अलावा दिल्ली में सबसे ज्यादा मौतें नवंबर माह में हुई हैं। जब कोरोना की तीसरी लहर के दौरान ढ़ाई हजार से ज्यादा लोगों की मौत 30 दिन में हुई है।
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दिल्ली एम्स के डॉ. विनोद कुमार का कहना है कि दिल्ली में अगर त्योहार के वक्त लोग सावधानी बरतने का प्रयास करते तो शायद राजधानी को तीसरी बार संक्रमण के प्रकोप का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा कि अभी भी कोरोना वायरस की अगली लहर को आने से रोका जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि दिल्ली के हर व्यक्ति का सहयोग मिले।
इनके अलावा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के पूर्व महामारी विशेषज्ञ डॉ. रमन आर गंगाखेड़कर का कहना है कि कोरोना वायरस की बार बार लहर आ सकती हैं। दुनिया के कई देशों में दो दो बार संक्रमण की लहर देखने को मिल चुकी है। भारत में अलग अलग राज्य में लहर अलग ही दिखाई दे रही है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं है कि अगर लोग सचेत नहीं हुए तो दिल्ली में चौथी, पांचवीं और छठी तक लहर देखने को मिल सकती है।
उधर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली के लोगों में संक्रमण को लेकर बहुत जल्दी भ्रामकता आ गई है। लोगों को लगता है कि उन्हें संक्रमण नहीं होगा। उनके परिवार में किसी को यह बीमारी नहीं होगी। इसलिए लोग भी अपने पुराने वाले व्यवहार की ओर वापस आ रहे हैं लेकिन लोगों को यह समझना जरूरी है कि टीका आने के बाद भी मास्क और सोशल डिस्टैसिंग का पालन हम सभी को करना है।