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शाहबेरी हादसा: 6 मंजिला इमारत में 12 की जगह छह फुट थी नींव, 20 की जगह 12 एमएम के लगे पिलर

Fri, 20 Jul 2018 10:01 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
ब्यूरो,अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Updated Fri, 20 Jul 2018 10:01 PM IST
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expert says Use of extremely poor quality material in shahberi building collapse
building collapse shaberi - फोटो : अमर उजाला

शाहबेरी में दो इमारतें ढहने के बाद शुक्रवार को वहां पहुंचे विशेषज्ञों ने बताया कि बेहद घटिया क्वालिटी की सामग्री का इमारतें बनाने में उपयोग किया था। दलदली मिट्टी में जहां छह मंजिला इमारत के लिए 12 फुट गहराई तक खुदाई कर नींव भरी जानी थी, लेकिन मलबा हटा तो मात्र पांच से छह फुट तक ही नींव में पिलर बनाए गए थे। इस दौरान बेसमेंट में पानी भरने से कमजोर नींव से इमारत धस गई और अपने साथ नौ जिंदगियां ले गई।

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ढही दोनों इमारतों के मलबे में मिली ईंटों से सामने आया कि बेहद दोयम दर्जे पीली ईंट का उपयोग इमारतों को बनाने में किया गया था। मलबा हटाने के दौरान समतल के नीचे मिट्टी दलदली प्रतीत हो रही थी। ऐसी दलदली मिट्टी में नींव मजबूत न होना हादसे का बड़ा कारण रहा है।

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building collapse

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में कुछ बड़े प्रोजेक्टों का कार्य कराने वाले ब्रजपाल राठी की पोपलेन मशीनें भी शाहबेरी गांव में राहत और बचाव कार्य में लगी हुई थीं। उन्होंने बताया कि यहां मलबे में पिलरों में करीब 12 एमएम का सरिया लगा हुआ था जबकि छह मंजिल की इमारतों के पिलरों में 20 एमएम का सरिया लगना चाहिए था, जिसमें कोताही कर लोगों को मौत की नींद सुला दिया गया।

उन्होंने बताया कि निर्माण सामग्री में सीमेंट के उपयोग में भी बेहद कंजूसी दिखाई गई। सीमेंट और मौरंग में एक और चार का अनुपात होना चाहिए था तो बिल्डिंग बनाने वाले ने इसका अंतर एक के अनुपात दस से भी अधिक कर दिया जिससे इमारत गिर गई।

दोनों बिल्डिंग के बीच में था सिर्फ 12 फीट का रास्ता      

शाहबेरी में गिरने वाली दो बिल्डिंग के बीच में केवल 12 फीट का रास्ता था। मलबा हटने के बाद यह स्थिति साफ हो सकी है। जबकि, इससे पहले कयास लगाए जा रहा था कि दोनों बिल्डिंग साथ-साथ बनी थी। मामले की जांच कर रहे अधिकारी अगले दो दिन में अपनी रिपोर्ट एडीएम को सौंपेंगे।  बिल्डिंग गिरने की जांच एडीएम प्रशासन को सौंपी गई है। शुक्रवार को दोनों बिल्डिंग के मलबे को हटा दिया गया है।

जांच टीम के अफसरों ने बताया कि दोनों बिल्डिंग के बीच में 12 फीट चौड़ा रास्ता था। पुरानी बिल्डिंग की नीवं के बराबर में नाली बनी हुई है। अभी तक की जांच में पता चला है कि पुरानी बिल्डिंग का हिस्सा पहले गिरा था। हालांकि, रास्ते पर जो मलबा मिला है, उसकी जांच की जा रही है कि वह कौन सी बिल्डिंग का है। उन्होंने बताया कि जांच लगभग पूरी हो गई है। दो दिन के अंदर जांच रिपोर्ट एडीएम प्रशासन को सौंप दी जाएगी। 

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