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तैयारी : दुर्गम पहाड़ियों तक होगा विस्तार, पहलगाम तक जाएगी ट्रेन; सामरिक महत्व की परियोजनाओं पर काम तेज गति से

Thu, 01 May 2025 04:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा नवनीत शरण, नई दिल्ली
नवनीत शरण, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 01 May 2025 04:12 AM IST
सार

सामरिक महत्व वाली जगहों और दुर्गम पहाड़ी तक भारतीय रेलवे का विस्तार अपनी रफ्तार में है। 

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Expansion of railways to inaccessible hills, train will run till Pahalgam
भारतीय रेल - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

आतंकवादियों ने पर्यटकों को जरूर निशाना बनाया है लेकिन भारत का इरादा काफी मजबूत है। सामरिक महत्व वाली जगहों और दुर्गम पहाड़ी तक भारतीय रेलवे का विस्तार अपनी रफ्तार में है। 

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उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक ही नहीं पहलगाम तक ट्रेन चलाने के लिए रेल लाइन का सर्वेक्षण किया जा रहा है। अनंतनाग-पहलगाम तक नई लाइन (करीब 78 किलोमीटर) बिछेगी। इसके अलावा जम्मू एवं कश्मीर में आने वाले 4 और सर्वेक्षण हाल ही में शुरू किया गया है।
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इसमें मुख्य रूप से बारामूला-उरी नई लाइन (46 किलोमीटर), सोपोर-कुपवाड़ा नई लाइन (37 किलोमीटर), अवंतीपुरा-शोपियां नई लाइन (28 किलोमीटर) और बनिहाल-बारामुला दोहरीकरण (118 किलोमीटर) शामिल है। इस नई लाइन के बन जाने से ना केवल पर्यटकों को सुविधा होगी कि बल्कि घाटी क्षेत्र की आर्थिकी स्थिति मजबूत होने के साथ बार्डर एरिया तक युद्ध की स्थिति में सेना को रसद पहुंचाना आसान होगा। 
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कई अहम योजनाएं तैयार...
पहलगाम में हुए हमले ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। आतंकवादियों ने पर्यटकों को निशाना बना कर कायरता का परिचय दिया है। केंद्र सरकार ने इसका करारा जवाब देने का निर्णय तो लिया ही है साथ ही जम्मू-कश्मीर के विकास और सामरिक दृष्टिकोण से भी कई अहम योजनाएं तैयार की हैं। इसमें जम्मू कश्मीर के अलावा भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल लाइन के पहले चरण में ट्रैक बिछाने का काम चल रहा है। बिलासपुर-मनाली-लेह नई लाइन परियोजना (489 किमी) का सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। 

अखनूर-राजौरी के रास्ते जम्मू और पुंछ तक रेल लाइन
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना भी सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस रेल लाइन के 70-80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। हालांकि अखनूर और राजौरी के रास्ते जम्मू और पुंछ (223 किमी) के बीच नई लाइन का सर्वेक्षण किया गया था। परियोजना की लागत 22,771 करोड़ रुपये आंकी गई थी। यातायात अनुमान कम होने की वजह से फिलहाल इसे रोक लिया गया है। इसी तरह 2016-17 में श्रीनगर-कारगिल-लेह (480 किमी) नई रेल लाइन का सर्वेक्षण किया गया था। सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार  परियोजना की अनुमानित लागत 55,896 करोड़ रुपये थी। 

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  • बहरहाल, कम यातायात अनुमानों के कारण रेलवे का कहना है कि परियोजना का कार्य आगे नहीं किया जा सका। इसके अलावा बिलासपुर-मनाली-लेह नई लाइन, जो आंशिक रूप से लद्दाख में पड़ती है, को सामरिक लाइन के रूप में चिह्नित किया गया है। 
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