कांग्रेस के इन्हीं नेताओं ने उसे जीरो पर पहुंचाया, अब क्या उम्मीदः गोपाल राय
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सवाल- गोपाल जी, दिल्ली में आप का कांग्रेस के साथ गठबंधन न हो पाने की अहम वजह क्या रही?
जवाब- शायद यह सवाल आपको कांग्रेस से करना चाहिए। हम तो केवल इतना ही कह सकते हैं कि हमने अपनी तरफ से ईमानदार कोशिश की। देश के हित के लिए हम 'जहर' पीने को तैयार थे। लेकिन कांग्रेस की बेरुखी की वजह से गठबंधन नहीं हो सका। जनता इस बात को देख रही है।
सवाल- क्या सीटों पर तालमेल नहीं बनी?
जवाब- सीटों की संख्या कोई मुद्दा ही नहीं था। मैं नहीं जानता कि वे किसी दबाव में यह फैसला ले रहे हैं या यह उनका अपना विचार है। मैं इतना ही कहूंगा कि ईमानदार कोशिश करने से हर समस्या का हल निकलता है। कांग्रेस ने देशहित के सामने अपना निजी हित ऊपर रखा जिसकी वजह से गठबंधन नहीं हो पाया।
सवाल- कांग्रेस का एक पक्ष था कि अगर लोकसभा चुनाव में साथ लड़ते हैं तो विधानसभा चुनाव में एक दूसरे के खिलाफ उतरना हास्यास्पद होता?
जवाब- बिल्कुल नहीं। यह कहीं कोई मुद्दा नहीं है। महागठबंधन बनने के समय ही यह साफ हो गया था कि यह गठबंधन केवल लोकसभा चुनाव के लिए होने जा रहा है। विधानसभाओं में सभी दल अपनी पूर्व की स्थिति में चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र होते।
सवाल- जिस तरह अरविंद केजरीवाल ने खुलेआम जनता के सामने गठबंधन को लेकर व्याकुलता दिखाई, क्या आपको नहीं लगता कि इससे जनता के बीच और कार्यकर्ताओं में नकारात्मक संदेश गया है?
जवाब- बिल्कुल गया है, सहमत हूं। लेकिन हमने राष्ट्रहित में साथ आने को महत्त्व दिया। जब हम देख रहे हैं कि सेना से लेकर कोर्ट तक सबको राजनीति में घसीटा जा रहा है। लोकतंत्र खतरे में है, तब देशहित के लिए हमने साथ आने का फैसला किया। हर खिलाफ आवाज को देशद्रोही करार दिया जा रहा है। ऐसे में लोकतंत्र बचाने के लिए यह जरुरी है कि सभी साथ आकर भाजपा को हराएं। अब हम अकेले ही चुनाव लड़ने और जीतने के लिए तैयार हैं।
सवाल- कहा जा रहा है कि कांग्रेस अपने भविष्य को देखते हुए आप के साथ नहीं आना चाहती है। क्या कहेंगे?
जवाब- इसी जनता ने कांग्रेस के इन्हीं नेताओं के रहते हुए जीरो पर पहुंचा दिया था। आखिर ऐसा क्या हुआ है जिससे उन्हें लगता है कि वे जीत हासिल कर लेंगे। इससे केवल वोटों का बंटवारा होगा और इसका फायदा भाजपा को होगा।
सवाल- आपको क्या लगता है, किन वजहों की वजह से कांग्रेस ने आप के साथ आने से इनकार कर दिया?
जवाब- यह उनके दल की निजी बात है। इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। लेकिन यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में गठबंधन के साथ न आकर भाजपा की मदद करना चाहती है। इसका गलत संदेश जाएगा।
सवाल- विधानसभा चुनाव के बाद आप का प्रदर्शन आपकी आशाओं के अनुरुप नहीं रहा है। लोकसभा चुनाव में क्या उम्मीद है?
जवाब- हमने जीरो से शुरुआत की थी। पहले 28 सीट पर पहुंचे और फिर 67 सीटों पर। यह सब तब हुआ जब कि हमारे पास अपना काम दिखाने के लिए कुछ नहीं था। अब हमारे पास जनता के बीच उपलब्धि दिखाने के लिए शिक्षा व्यवस्था का बदलाव, मोहल्ला क्लीनिक, सड़कें और महिलाओं-बच्चों के लिए किए गए काम-काज हैं। ऐसे में अब हमारे कमजोर होने का कोई सवाल ही नहीं है।