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दिल्ली हिंसा के बीच ये हैं इंसानियत की मिसालें
Thu, 27 Feb 2020 06:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 27 Feb 2020 06:55 AM IST
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पुलिस की हिफाजत में एक परिवार
- फोटो : अमर उजाला
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किडनी के मरीज नईम को अजय ने अस्पताल पहुंचाकर बचाई जान
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हिंसाग्रस्त चमनपुरी में किडनी के मरीज नईम अहमद अपने घर पर तीन दिनों से डायलिसिस के अभाव में पड़े हुए थे। परिवार ने उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए हर किसी से मदद मांगी लेकिन हिंसा के डर से कोई भी उन्हें अस्पताल ले जाने को राजी नहीं हुआ। इसकी खबर उनके घर के पास रहने वाले अजय शर्मा को हुई तो वह बगैर किसी की परवाह किए उनके घर पहुंचे और निजी एंबुलेंस की मदद से उन्हें अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया। इससे उनकी जान बचाई जा सकी।
इरफान के परिवार को बचाने उपद्रवियों के के सामने ढाल बनकर खड़े हुए घनश्याम
ब्रह्मपुरी इलाके में इरफान का पूरा परिवार मंगलवार रात हिंसा के बीच उपद्रवियों से घिर गया था। यह देखकर उनके पड़ोस में रहने वाले घनश्याम मिश्रा परिवार को बचाने के लिए उपद्रवियों के सामने ढाल बनकर खड़े हो गए। उन्होंने दंगाइयों का डटकर सामना किया और पुलिस को बुलाकर इरफान के परिवार की जान बचाई। उनके इस साहस को देखने के बाद इलाके के लोगों का कहना है कि इसे देखकर शायद पूरे इलाके में एक बार फिर अमन चैन कायम हो जाए।
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तीन दिनों से फंसे मनोज और उसके परिवार को एसआई अरुण सिंधु की टीम ने दिया खाना
चमनपुरी स्थित राजधानी पब्लिक स्कूल के बाहर ड्यूटी पर तैनात एसआई अरुण सिंधु अपनी टीम के साथ दोपहर का खाना खाने जा रहे थे। तभी उन्हें स्कूल के भीतर से एक इंसान टकटकी निगाहों से देखता नजर आया। सिंधु ने उसे बुलाकर पूछताछ की तो वह बिलख कर रोने लगा। स्कूल का चौकीदार मनोज पूरे परिवार के साथ तीन दिनों से उपद्रव में फंसा हुआ था। उसने बताया कि उपद्रवियों ने पूरे स्कूल को आग के हवाले कर दिया। उसने किसी तरह स्कूल के पिछले हिस्से में छिपकर जान बचाई। मनोज व उसका पूरा परिवार भूख-प्यास से परेशान था। इसे सुनने के बाद एसआई अरुण ने साथी पुलिसवालों के खाने का पैकेट पीड़ित परिवार को दे दिया। मनोज व उसकी पत्नी ने खाना खुद खाने के बजाय बेटे व बेटी को दे दिया। दंपती का कहना था कि खुद भूख-प्यास सह सकते हैं, लेकिन बच्चों को रोता नहीं देख सकते हैं।
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