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Delhi: एम्स में हर साल हो रहे दस लोगों के हार्ट ट्रांसप्लांट, 30 जुलाई को खेल कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे मरीज

Wed, 05 Jul 2023 07:44 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Wed, 05 Jul 2023 07:44 AM IST
सार

हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद अधिकतर मरीज सामान्य जीवन बिता रहे हैं। कई मरीजों को 20 साल का समय हो गया है। एम्स ने ऐसे सभी मरीजों को 30 जुलाई को बुलाया है। इन मरीजों के लिए एम्स परिसर में खेल कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें ये मरीज इनडोर और आउटडोर खेल का हिस्सा बन सकेंगे।

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Every year ten people are getting heart transplant in AIIMS
एम्स दिल्ली - फोटो : फाइल

विस्तार

अंगदान में आई तेजी के बाद से एम्स में हार्ट ट्रांसप्लांट की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले कुछ सालों में हार्ट ट्रांसप्लांट की संख्या बढ़कर प्रति वर्ष 10 तक पहुंच गई है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि अंगदान की संख्या बढ़ती है तो ट्रांसप्लांट का आंकड़ा बढ़ सकता है। 

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हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद अधिकतर मरीज सामान्य जीवन बिता रहे हैं। कई मरीजों को 20 साल का समय हो गया है। एम्स ने ऐसे सभी मरीजों को 30 जुलाई को बुलाया है। इन मरीजों के लिए एम्स परिसर में खेल कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें ये मरीज इनडोर और आउटडोर खेल का हिस्सा बन सकेंगे। इस बारे में एम्स दिल्ली में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. संदीप सेठ ने बताया कि अंगदान की संख्या बढ़ने से हार्ट ट्रांसप्लांट की संख्या बढ़कर हर साल 10 तक पहुंच गई है, जबकि छह-सात साल पहले यह आंकड़ा एक-दो तक था।
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अनुभव सांझा करने 30 मरीजों के आने की संभावना 
हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद मरीज सामान्य जीवन बिता रहे हैं। एम्स में ऐसे कई मरीज पंजीकृत हैं जिनका ट्रांसप्लांट 20 साल पहले हुआ था। ऐसे मरीजों के अनुभव को साझा करने और उनके बारे में जानने के लिए दिल्ली-एनसीआर से ऐसे सभी मरीजों को बुलाया गया है जिनका एम्स में हार्ट ट्रांसप्लांट हुआ है। उन्होंने कहा कि 30 जुलाई को आयोजित इस कार्यक्रम में सभी मरीजों के लिए खेल कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया है, जिसमें इनडोर और आउटडोर खेल आयोजित होंगे। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि इस कार्यक्रम में ऐसे 30 मरीज आ सकते है। 
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शोध परियोजनाओं के प्रस्ताव के खिलाफ निकाला मार्च
एम्स में शोधार्थियों की परियोजना संख्या सीमित करने के विरोध में मंगलवार को परिसर में मार्च निकाला गया। साथ ही, निदेशक को पत्र लिखकर इस फैसले का विरोध किया गया। शोधार्थियों का कहना है कि एम्स में कई शोध परियोजनाओं में कार्यरत या पीएचडी कर रहे 1100 से अधिक शोधार्थी हैं। अभी तक ये कई परियोजनाओं से जुड़कर काम कर रहे थे, लेकिन अब इस नियम में बदलाव की तैयारी है। 
इसे लेकर  सोसाइटी ऑफ यंग साइंटिस्ट्स (एसवाईएस) ने मंगलवार को विरोध किया। प्रस्तावित दिशानिर्देश के तहत एक शोधार्थी की परियोजना की संख्या को दो तक सीमित किया जाना है। इस फैसले के तहत विभिन्न परियोजनाओं में कार्यरत शोध कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का प्रयास किया जा रहा है। ब्यूरो


लिफ्ट खराब होने से सफदरजंग में नहीं हो रही सर्जरी
सफदरजंग अस्पताल के आर्थोपेडिक ब्लॉक में लिफ्ट खराब होने से सर्जरी नहीं हो पा रही हैं। यहां पर रैंप भी नहीं है जिस कारण पैरों में गंभीर फ्रैक्चर के पीड़ित मरीज ऊपर तक नहीं आ पाते। मरीजों का कहना है कि 10 दिनों में यह लिफ्ट दो बार खराब हो चुकी है। इसे ठीक होने में भी समय लग जाता है, जबकि गंभीर मरीज को स्ट्रेचर पर ऊपर लाना पड़ता है। वहीं, विभाग के डॉक्टरों ने बताया कि आर्थोपेडिक वार्ड ब्लाक में दो लिफ्ट लगी हैं। इस ब्लॉक से करीब 30 मीटर की दूरी पर दूसरे भवन की तीसरी मंजिल पर आपरेशन थियेटर ब्लाॅक है। ऐसे में गंभीर मरीज खुद चलकर ऊपर नहीं आ पाते।

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