Delhi: वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए एप डाउनलोड करना होगा अनिवार्य, पुलिसकर्मियों को दी जा रही ट्रेनिंग
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक जुलाई, 24 से दिल्ली समेत कई जगहों पर नए कानून लागू हो रहे हैं। इन कानूनों को दिल्ली पुलिसकर्मियों को धाराएं व एप की अलग से ट्रेनिंग दी जा रही है। केस की वैज्ञानिक तरीके से जांच करने व साक्ष्य जुटाने के लिए एक वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी के लिए ई- प्रमाण पत्र एप भी बनाया गया है।
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एक जुलाई से लागू होने वाले नए कानूनों के तहत हर केस की जांच वैज्ञानिक व निष्पक्ष तरीके से की जाएगी। इसके लिए दिल्ली पुलिस के हर पुलिसकर्मी को अपने मोबाइल पर एप डाउनलोड करना जरूरी होगा। इसका नाम ई प्रमाणपत्र एप है।
इस एप से मौके से जब्त सामान, मौका निरीक्षण आदि की आवाज के साथ वीडियो बनानी होगी। नए कानूनों में कहा गया है कि इस साक्ष्य को 48 घंटे के अंदर कोर्ट में पहुंचाना होगा। दिल्ली पुलिसकर्मियों को कानून की धाराएं व एप की अलग-अलग ट्रेनिंग हर जिला कार्यालय में दी जा रही हैं।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक जुलाई, 24 से दिल्ली समेत कई जगहों पर नए कानून लागू हो रहे हैं। इन कानूनों को दिल्ली पुलिसकर्मियों को धाराएं व एप की अलग से ट्रेनिंग दी जा रही है। केस की वैज्ञानिक तरीके से जांच करने व साक्ष्य जुटाने के लिए एक वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी के लिए ई- प्रमाण पत्र एप भी बनाया गया है। दिल्ली पुलिस के हर जवान को अपने मोबाइल में इस एप को डाउनलोड करना अनिवार्य होगा। इस एप से मौके से मिले सामान, जब्ती व निरीक्षण की कार्यवाही की छोटी-छोटी वीडियो बनाई जाएंगी।
भारतीय साक्ष्य संहिता में कहा गया है कि जांच अधिकारी ने एप से जो वीडियो बनाई है उसे वह तुरंत एप पर अपलोड करेगा। इन वीडियो को लोड करने पर एप में यूआरएल (यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर यानि वेब एड्रेस), विवरण कुंजी और हैश वैल्यू दिखाई देगी। साथ ही भारतीय साक्ष्य संहिता में कहा गया है कि यूआरएल और विवरण कुंजी का उल्लेख डीडी एंट्री यानि केस डायरी में करना अनिवार्य होगा। जो भी व्यक्ति चाहे वह आम आदमी हो या पुलिसकर्मी, सभी को भारतीय आचार संहिता की धारा 36(4) के तहत ये लिखकर देगा होगा कि वीडियो के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है। अगर पुलिसकर्मी है तो फिर मालखाने के इंचार्ज को लिखकर देना होगा।
ऐसे जुटाए जाएंगे साक्ष्य
- एक जुलाई, 24 से मोबाइल फोन आधारित एप्लीकेशन(एप) की आवश्यक धाराएं-
- 105 बीएनएसएस- एप वाले मोबाइल से ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से तलाशी और जब्ती की रिकॉर्डिंग की जाएगी।
- 173(1)(2)(बी)- संज्ञेय मामलों में बीएनएसएस सूचना रिकार्ड करने के अलावा असाधारण परिस्थितियों में महिला पीड़िता, शारीरिक व मानसिक रूप से अक्षम पीड़ितों से जुड़े मामले में तुरंत वीडियोग्राफी की जाएगी।
- 185(2)बीएनएसएस- जांच के दौरान तलाशी कार्रवाई की वीडियोग्राफी एप के माध्यम से की जाएगी।
- 176(3)- 7 वर्ष या अधिक सजा वाले अपराधों में एसओसी की वीडियोग्राफी की जाएगी।
- 180(3) बीएनएसएस पुलिस द्वारा गवाह की जांच, ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से की गई रिकॉर्डिंग।
पीड़ित द्वारा दिया गया विवरण लिखा जाएगा
फोटो व वीडियो बनाने के बाद उससे संबंधित विवरण (बोले गए शब्दों का भी) दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त वीडियो नोट्स भी जोड़े जा सकते हैं और सेव बटन दबाकर उन्हें एप में सुरक्षित रखा जा सकेगा। अपलोड किए गए साक्ष्य अपलोड किए गए साक्ष्य टैब में देखे जा सकते हैं। हर थंबनेल पर क्लिक करने पर साक्ष्यवार विवरण देखे जा सकते हैं।
एप में केस की ये जानकारियां होंगी
एफआईआर नंबर, वर्ष, डीडी नंबर, दिनांक, जिला यूनिट, पुलिस स्टेशन का नाम और ऑडियो व वीडियो की जानकारी।