सम-विषम की घोषणा के साथ ही फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती
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दिल्ली सरकार द्वारा राजधानी में प्रदूषण कम करने की दिशा में दोबारा सम-विषम फार्मूला शुरू करने की घोषणा के साथ ही निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका भी दायर हो गई।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन करने की अपेक्षा दुर्भावनापूर्ण तरीके से अन्य वाहनों को सड़कों पर आने से रोक रही है। इसके अलावा अनाधिकृत कॉलोनियों में चल रहे कारखानों और औद्योगिक इकाइयों को बंद करवाने का भी निर्देश दिया जाए।
यह जनहित याचिका अभियान नामक एनजीओ ने दायर की है। आरोप लगाया गया है कि राजधानी में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या इस कारण बढ़ रही है क्योंकि सरकार ऐसे वाहनों को दंडित करने के प्रावधान वाले मोटर वाहन अधिनियम 1988 को लागू करने में असफल रही है।
राजधानी में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या बढ़ी है
अधिवक्ता अनिल अग्रवाल द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि प्रदूषण चेकिंग केंद्रों पर किए जा रहे परीक्षण एक दिखावा मात्र है। यहां प्रमाणपत्र (पीयूसी) लापरवाही पूर्ण दिए जा रहे हैं और सरकार को इसकी जानकारी है।
याचिका में दिल्ली सरकार के अलावा केंद्र व उपराज्यपाल को भी पक्ष बनाया गया है। कहा कि याचिका में पक्ष बनाए गए तीनों प्रतिवादी मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190 को लागू करने में विफलता के लिए उत्तरदायी हैं। उनकी लापरवाही से पिछले कुछ वर्षों से राजधानी में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या बढ़ी है।
आग्रह किया कि गृह मंत्रालय व एलजी को तुरंत अधिनियम को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया जाए। इतना ही नहीं प्रदूषण नियंत्रण केंद्रों पर औचक निरीक्षण कर जांचने का भी निर्देश दिया जाए।