फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   ESIC sets daily stipend at rs 14 for man who lost both hands in accident

Delhi: हादसे में कटे दोनों हाथ, ESIC ने तय किया 14 रुपये रोजाना वजीफा; अब हाईकोर्ट ने दिया ये निर्देश

Fri, 21 Nov 2025 11:21 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Fri, 21 Nov 2025 11:21 PM IST
सार

कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए गहरी चिंता जताई कि इतनी कम राशि से दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से आती है। बेंच ने कहा कि हम स्थायी रूप से 100% दिव्यांग मुन्ना के दर्द को महसूस करते हैं।

विज्ञापन
ESIC sets daily stipend at rs 14 for man who lost both hands in accident
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने 36 साल पहले फैक्टरी हादसे में दोनों हाथ गंवाने वाले याचिकाकर्ता को दिए गए वजीफे पर अपनी असंतुष्टि दिखाई। हालांकि, अदालत ने माना कि कानूनी तौर पर कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की स्थायी दिव्यांगता लाभ राशि 14 रुपये प्रतिदिन को संशोधित नहीं किया जा सकता। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता मुन्ना प्रसाद की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने मांग की थी कि ईएसआईसी की स्थायी दिव्यांगता लाभ राशि को न्यूनतम मजदूरी के बराबर किया जाए। कोर्ट ने ईएसआई कानून के मौजूदा नियमों को संविधान विरोधी घोषित करने से भी इनकार कर दिया।

विज्ञापन

न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की डिवीजन बेंच ने फैसले में कहा कि दिव्यांगता लाभ और न्यूनतम मजदूरी दो अलग-अलग कानूनों के तहत अलग-अलग उद्देश्यों के लिए हैं। न्यूनतम मजदूरी नौकरी के दौरान काम के बदले मिलती है जबकि पीडीबी दुर्घटना के कारण कमाई की क्षमता खोने की भरपाई है इसलिए इन्हें एक-दूसरे से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 1989 के बाद ईएसआई एक्ट से धारा 99 हटा दी गई थी जिसके तहत निगम खुद लाभ राशि बढ़ा सकता था। अब यह अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।

विज्ञापन
विज्ञापन

राशि दो जून की रोटी के लिए पर्याप्त नहीं
कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए गहरी चिंता जताई कि इतनी कम राशि से दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से आती है। बेंच ने कहा कि हम स्थायी रूप से 100% दिव्यांग मुन्ना के दर्द को महसूस करते हैं। मौजूदा पीडीबी राशि किसी भी मानक से दो जून की रोटी के लिए भी पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने ईएसआईसी और श्रम मंत्रालय को निर्देश दिया कि हर दो साल में एक समिति गठित की जाए जो महंगाई, जीवनयापन की लागत और न्यूनतम मजदूरी सहित सभी पहलुओं को देखकर पीडीबी बढ़ाने की सिफारिश करे। कोर्ट ने कहा कि समिति सिर्फ न्यूनतम मजदूरी कानून से बंधी न रहे बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करे।

विज्ञापन

यह है मामला
25 जून 1989 को सावनी रबर इंडस्ट्रीज में काम करते समय मुन्ना के हाथ कट गए। ईएसआईसी ने 1990 में उन्हें 14 रुपये प्रतिदिन की दर से आजीवन पीडीबी दी जो समय-समय पर संशोधन के बाद भी अभी बहुत कम है (वर्तमान में करीब 49 रुपये प्रतिदिन)। वर्ष 1999 में कंपनी ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया था। लेबर कोर्ट ने निकाले जाना वैध बताया था लेकिन हाईकोर्ट की सिंगल बेंच और फिर डिवीजन बेंच ने मुआवजे के रूप में 2 लाख रुपये दिए थे क्योंकि कंपनी बंद हो गई थी। 2016 में डिवीजन बेंच ने ईएसआईसी को निर्देश दिया था कि लाभ राशि कम से कम न्यूनतम मजदूरी के करीब हो लेकिन ईएसआईसी ने नियमों का हवाला देकर इनकार कर दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed