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दिल्ली सरकार की नई नीतियों से उलझन में उद्यमी, फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

Wed, 04 Nov 2020 05:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 04 Nov 2020 05:26 AM IST
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Entrepreneurs confused with Delhi government's new policies
demo pic - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्र की रूपरेखा बदलने का निर्णय चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ जहां नये उद्योग लगाने वालों में उत्साह है तो वहीं इस व्यवसाय से जुड़े लोगों में निराशा है। यह भी कहा जा रहा है कि यह आदेश कोई नया नहीं है, क्योंकि दिल्ली के मास्टर प्लान में यह पहले से तय है। 

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वहीं, कई लोगों का कहना है कि यह वोट बैंक की राजनीति है। सरकार के पास नया औद्योगिक क्षेत्र बनाने का रोड मैप तक नहीं है। नोटिफिकेशन को लेकर भी असमंजस की स्थिति है। यह बात भी दीगर है कि औद्योगिक क्षेत्र को लेकर कई मामले में अदालत व एनजीटी की गाइडलाइंस हैं।
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व्यापक असर दिखेगा
सरकार की नई गाडलाइन का व्यापक असर देखने को मिल सकता है। इसका दूरगामी प्रभाव यह होगा कि मजदूर यहां से चले जाएंगे। ऐसी स्थिति में बेरोजगारी की समस्या बढ़ेगी। कीमतें बढ़ेंगी। 21 इंडस्ट्री प्रभावित होंगी क्योंकि मंडोली, करावल नगर, मुंडका समेत कई औद्योगिक क्षेत्र नोटिफाई तक नहीं हैं।
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- ललित गोयल सचिव न्यू मंडोली इंडस्ट्रियल एरिया

वाइट एरिया को छूट मिलनी चाहिए
सरकार को कम से कम वाइट एरिया (प्रदूषण रहित क्षेत्र) में निर्माण उद्योग लगाने की अनुमति देनी चाहिए। अच्छी बात इसमें यह है कि पुरानी इंडस्ट्री के साथ किसी तरह छेड़छाड़ नहीं की गई है, लेकिन सरकार की मंशा स्पष्ट है कि कंझावला जैसी खाली भूमि की बिक्री तेज हो जाएगी क्योंकि मायापुरी, वजीरपुर, नारायणा समेत अन्य जगह जमी फैक्ट्रियां बंद होने लगेंगी।
- दिल्ली व्यापार महासंघ के अयक्ष देवराज बावेजा

दिल्ली के उद्योग को बर्बाद करने वाली नीति
दिल्ली के उद्योग को बर्बाद करने वाली नीति है। जमे हुए उद्योग को उजाड़ने की नीति है। भ्रष्टाचार की वजह से वैसे ही उद्योग चलाना भारी है। बवाना, नांगलोई, ओखला में पहले से ही बड़ी फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं। आम आदमी तो व्यापार कर ही नहीं सकता। इंस्पेक्टर राज है।
- राजेंद्र कुमार गुप्ता दिल्ली स्टील एसोसिएशन

सिर्फ वादे बड़े-बड़े हैं
सरकार वादे तो बड़े-बड़े करती है, लेकिन योजनाएं धरी रह जाती हैं। इस योजना से नये लोगों को फायदा पहुंच सकता है। कोरोना काल में इंडस्ट्री का हाल वैसे ही खराब है। अब नई-नई नीतियों की वजह से दिल्ली का पूरा उद्योग खत्म हो जाएगा।

- अजय अरोड़ा फेडरेशन ऑफ ट्रेड एसोसिएशन अध्यक्ष

आंखों में धूल झोंकने वाली नीति
नई नीति आंखों में धूल झोंकने वाली है। मास्टर प्लान के तहत ही यह नीति तय की गई है। 2011 में ही गजट नोटिफिकेशन आया था। दिल्ली के पास पावर ही नहीं है कि औद्योगिक नीति में बदलाव करें। उस वक्त भी डीडीए ने इस नीति को मानने से इंकार किया था। रेड इंडस्ट्री को दिल्ली से बाहर किया गया। तभी दिल्ली से उद्योग अन्य राज्यों में शिफ्ट कर गये थे। सरकार सिर्फ डराने का काम कर रही है। सरकार की नीति का विरोध करते हैं।
- रघुवंश अरोड़ा उपाध्यक्ष एपेक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ एनसीटी दिल्ली 

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