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एससी-एसटी पीड़ितों को समय पर सहायता सुनिश्चित करें : उपायुक्त
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- साल 2024 में जिले में सबसे अधिक हुई अंतरजातीय शादी
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने शुक्रवार को जिला सचिवालय स्थित सभागार में जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की समीक्षा बैठक ली। बैठक के दौरान उपायुक्त ने अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उपायुक्त ने कहा कि अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के पीड़ित व्यक्तियों को एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत निर्धारित सहायता बिना किसी देरी के उपलब्ध कराई जाए। सहायता मुहैया कराने में संबंधित विभाग के अधिकारी किसी भी प्रकार की देरी न करें। इसके साथ ही पीड़ित व्यक्तियों के आवेदन पर जल्द से जल्द कार्रवाई करते हुए आर्थिक सहायता प्रदान करें। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जातियों व अनुसूचित जनजातियों की समस्याओं के बारे में जागरूक करने के लिए डिबेट और सेमिनार की संख्या बढ़ाई जाए। इससे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को इनका लाभ मिल सके।
साल 2025 में 83.50 लाख की सहायता राशि दी गई : उपायुक्त ने बताया कि एससी-एसटी एक्ट के राहत एवं पुनर्वास सुविधाओं के तहत साल 2025-26 के तहत 83 पीड़ितों को 86 लाख 50 हजार रुपए की राशि प्रदान की गई। वहीं, साल 2024-25 के तहत 128 पीड़ितों को 1 करोड़ 6 लाख 32 हजार 500 रुपए की सहायता दी गई। साल 2023-24 में 176 पीड़ितों को 1 करोड़, 56 लाख 30 हजार रुपए की सहायता प्रदान की गई।
साल 2025 में 21 जोड़ों ने की अंतरजातीय शादी : जिला कल्याण विभाग की ओर से कि मुख्यमंत्री सामाजिक समरसता अंतरजातीय विवाह शगुन योजना के तहत भी सहायता दिया गया है। साल 2025-26 के तहत 21 नवविवाहित जोड़ों को 52 लाख 50 हजार रुपए की राशि प्रदान की गई। वहीं, साल 2024-25 के तहत 28 नवविवाहित जोड़ों को 70 लाख रूपए की सहायता दी गई। साल 2023-24 में 11 नवविवाहित जोड़ों को 27 लाख 50 हजार रुपए की सहायता दी गई। बैठक में डीएमसी मनीषा शर्मा, सीटीएम प्रीति रावत, डीआरओ बलराज सिंह दांगी, डीडीपीओ उपमा अरोड़ा सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने शुक्रवार को जिला सचिवालय स्थित सभागार में जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की समीक्षा बैठक ली। बैठक के दौरान उपायुक्त ने अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उपायुक्त ने कहा कि अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के पीड़ित व्यक्तियों को एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत निर्धारित सहायता बिना किसी देरी के उपलब्ध कराई जाए। सहायता मुहैया कराने में संबंधित विभाग के अधिकारी किसी भी प्रकार की देरी न करें। इसके साथ ही पीड़ित व्यक्तियों के आवेदन पर जल्द से जल्द कार्रवाई करते हुए आर्थिक सहायता प्रदान करें। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जातियों व अनुसूचित जनजातियों की समस्याओं के बारे में जागरूक करने के लिए डिबेट और सेमिनार की संख्या बढ़ाई जाए। इससे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को इनका लाभ मिल सके।
साल 2025 में 83.50 लाख की सहायता राशि दी गई : उपायुक्त ने बताया कि एससी-एसटी एक्ट के राहत एवं पुनर्वास सुविधाओं के तहत साल 2025-26 के तहत 83 पीड़ितों को 86 लाख 50 हजार रुपए की राशि प्रदान की गई। वहीं, साल 2024-25 के तहत 128 पीड़ितों को 1 करोड़ 6 लाख 32 हजार 500 रुपए की सहायता दी गई। साल 2023-24 में 176 पीड़ितों को 1 करोड़, 56 लाख 30 हजार रुपए की सहायता प्रदान की गई।
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साल 2025 में 21 जोड़ों ने की अंतरजातीय शादी : जिला कल्याण विभाग की ओर से कि मुख्यमंत्री सामाजिक समरसता अंतरजातीय विवाह शगुन योजना के तहत भी सहायता दिया गया है। साल 2025-26 के तहत 21 नवविवाहित जोड़ों को 52 लाख 50 हजार रुपए की राशि प्रदान की गई। वहीं, साल 2024-25 के तहत 28 नवविवाहित जोड़ों को 70 लाख रूपए की सहायता दी गई। साल 2023-24 में 11 नवविवाहित जोड़ों को 27 लाख 50 हजार रुपए की सहायता दी गई। बैठक में डीएमसी मनीषा शर्मा, सीटीएम प्रीति रावत, डीआरओ बलराज सिंह दांगी, डीडीपीओ उपमा अरोड़ा सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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