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राजधानी में सड़कों पर अतिक्रमण तो दिल्ली से कन्याकुमारी तक लंबा : सुप्रीम कोर्ट

Sat, 08 Sep 2018 05:32 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 08 Sep 2018 05:32 AM IST
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Encroachment the road in the capital is from Delhi to Kanyakumari says supreme court
प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली में करीब 2280 किलोमीटर सड़क व फुटपाथों पर अतिक्रमण के 'जंजाल’ के आकड़े पर सुप्रीम कोर्ट ने घोर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि यह लंबाई तो दिल्ली से कन्याकुमारी तक का सफर करना जैसा है।  

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न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने इस आकड़े को देखने केबाद कहा कि इससे दिल्ली की समस्या का अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकारी जमीन पर इस कदर अतिक्रमण गंभीर बात है और चिंता का विषय है। पीठ ने दिल्ली की सरकारी अथॉरिटी से कहा, %आप समझ सकते हैं कि दिल्ली में  किस कदर अतिक्रमण है। इस समस्या को गंभीरता से लेने की जरूरत है।’ 
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वास्तव में सीलिंग और अतिक्रमण मामले की सुनवाई के दौरान पीठ को जानकारी दी गई कि 31 अगस्त तक केउपलब्ध आकड़ों के मुताबिक, उत्तरी दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में 844.33 किलोमीटर, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में 811.01 किलोमीटर और पूर्वी दिल्ली नगर निगम में 601.20 किलोमीटर सड़कों व फुटपाथ से अतिक्रमण हटाए गए। इसके अलावा नई दिल्ली नगरपालिका परिषद क्षेत्र में 11 किलोमीटर और दिल्ली विकास प्राधिकरण क्षेत्र से 12.44 किलोमीटर सड़कों से अतिक्रमण हटाए गए। इस आकड़े पर पीठ ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि यानी दिल्ली की सड़कों पर इतना अतिक्रमण है मानो दिल्ली से कन्याकुमारी तक अतिक्रमण हो रखा हो। इस मामले में अमाइकस क्यूरी ने पीठ को बताया कि दिल्ली की सरकारी अथॉरिटी की उदासीनता के कारण यहां इस कदम अतिक्रमण है। 
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वहीं सुनवाई केदौरान निगरारी समिति की ओर से पेश वकील एडीएनराव ने दिल्ली के वन क्षेत्र और जलाश्यों में अतिक्रमण का भी मसला उठाया। उन्होंने एक रिपोर्ट दाखिल कर पीठ को बताया कि दिल्ली के कई जलाश्य या तो सूख गए हैं या वहां अतिक्रमण है। इस पर दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह इस मामले में वन विभाग और दिल्ली जल बोर्ड द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर हलफनामा दाखिल करेंगे।  


शुक्रवार को सुनवाई केदौरान पीठ ने यह भी साफ किया कि अदालती आदेश के तहत सीलिंग और अतिक्रमण की कार्यवाही केलिए 25 अप्रैल को गठित स्पेशल टास्क फोर्स(एसटीएफ) अगर कोई अतिक्रमण हटाती है तो संबंधित अथॉरिटी द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उस इलाके में फिर अतिक्रमण न हो। वहीं निगरानी समिति ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट केआदेश का पालन करने केलिए हरसंभव प्रयास कर रही है लेकिन उन्हें डीडीए सहित अन्य स्थानीय निकायों से उचित सहयोग नहीं मिल पा रहा है। इस पर पीठ ने कहा कि तमाम अथॉरिटी व पुलिस से उम्मीद की जानी चाहिए कि वह कमेटी को पूरा सहयोग करेंगे जिससे कि काम सही तरीके से हो। अगली सुनवाई 12 सितंबर को होगी। 

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