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Delhi NCR News: मेडिकल पढ़ाई में अब क्लिनिकल रिसर्च और एआई पर होगा जोर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 22 May 2026 08:39 PM IST
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एनएमसी-आईसीएमआर का नया प्रस्ताव, मेडिकल छात्रों को मिलेगी क्लिनिकल रिसर्च और वैज्ञानिक लेखन की विशेष ट्रेनिंग
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) मेडिकल शिक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहे हैं। प्रस्तावित योजना के तहत मेडिकल छात्रों को क्लिनिकल रिसर्च, रिसर्च पद्धति, वैज्ञानिक लेखन और मेडिकल एथिक्स की पढ़ाई अधिक व्यवस्थित ढंग से कराई जाएगी। इस नई व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को भी अहम भूमिका दी जाएगी।
एआई की मदद से डेटा विश्लेषण, भविष्य के स्वास्थ्य मॉडल तैयार करने, रिसर्च आधारित सबूत जुटाने और मेडिकल अध्ययन को बेहतर बनाने पर काम होगा। इसके साथ ही एआई आधारित रिसर्च के लिए नैतिक और कानूनी सुरक्षा मानकों का ढांचा भी विकसित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य मेडिकल शिक्षा, रिसर्च और मरीजों की देखभाल के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है, ताकि शोध के परिणामों का तेजी से स्वास्थ्य सेवाओं में उपयोग किया जा सके।
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एमबीबीएस और पोस्टग्रेजुएट छात्रों को क्लिनिकल ट्रायल, वैज्ञानिक प्रकाशन, रिसर्च पद्धति और अनुसंधान नैतिकता की विशेष ट्रेनिंग देने की भी योजना है। नई व्यवस्था में थीसिस लेखन, वैज्ञानिक लेखन और शोध मूल्यांकन की गुणवत्ता सुधारने पर खास ध्यान दिया जाएगा। छात्रों और शिक्षकों को रिसर्च विषय चयन, प्रकाशन मानकों और क्लिनिकल स्टडी के जिम्मेदार संचालन से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
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मसौदा तैयार किया जा रहा है
एनएमसी के चेयरमैन डॉ. अभिजात चंद्रकांत सेठ के मुताबिक, इस दिशा में एक मसौदा तैयार किया जा रहा है। इसके लिए एनएमसी और आईसीएमआर की संयुक्त विशेषज्ञ समिति काम कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट-डॉक्टोरल पीएचडी कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं, जिससे उन्नत चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से मेडिकल संस्थानों में शोध संस्कृति मजबूत होगी और भारत में सबूत आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही रिसर्च रिपॉजिटरी और क्लिनिकल रिसर्च के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी काम किया जाएगा। फिलहाल प्रस्ताव विचार-विमर्श के चरण में है।
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