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दिल्ली के चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही स्वराज इंडिया पार्टी को मिला तगड़ा झटका

Thu, 30 Mar 2017 09:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 30 Mar 2017 09:41 AM IST
सार

अदालत ने कहा ईवीएम में प्रत्याशियों के फोटो लगने से पार्टी को नहीं होगा नुकसान

- अदालत ने कहा ईवीएम में प्रत्याशियों के फोटो लगने से पार्टी को नहीं होगा नुकसान
- स्वराज इंडिया के प्रत्याशियों को बतौर निर्दलीय लड़ना होगा चुनाव
 

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election symbol appeal of swaraj india party denied by court
स्वराज इंडिया

विस्तार

आम आदमी पार्टी से अलग होकर स्वराज इंडिया नामक अलग पार्टी बनाने वाले योगेंद्र यादव को हाईकोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने एमसीडी चुनावों में उनकी पार्टी के प्रत्याशियों को कॉमन चुनाव चिन्ह प्रदान करने के लिए दायर याचिका खारिज कर दी। यानि अब स्वराज इंडिया के प्रत्याशी बतौर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ेंगे।

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न्यायमूर्ति हीमा कोहली ने अपने फैसले में कहा कि वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में प्रत्याशियों की फोटो लगाई जाएगी। ऐसे में यदि पार्टी को कॉमन चुनाव चिन्ह नहीं मिलता तो उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।
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अदालत ने कहा यह याचिका चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद दायर की गई है और काफी देर हो चुकी है। ऐसे में उनका मानना है कि चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।
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अदालत ने हाल ही में राज्य चुनाव आयोग से पूछा था कि क्या स्वराज इंडिया पार्टी को एक समान चुनाव चिन्ह दिया जा सकता है या नहीं।

खत्म कर दिया गया है ऐसा प्रावधान

election symbol appeal of swaraj india party denied by court
स्वराज इंडिया - फोटो : अमर उजाला
स्वराज इंडिया की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता शांति भूषण ने तर्क रखा था कि पंजीकरण लेकिन अपरिचित पार्टियों को चुनाव में एक समान चुनाव चिन्ह देने के लिए दिल्ली सरकार को एक पत्र लिखा गया है। जिससे कि वह नियमों में संशोधन करें और ऐसी पार्टियों को एक समान चुनाव चिन्ह प्रदान किया जा सकें।

उन्होंने कहा था कि भारतीय चुनाव आयोग के आदेश के अंतर्गत  चुनाव चिन्ह (आरक्षण और आवंटन), (संशोधन) 2016 में  आयोग स्वयं ही नए पंजीकृत राजनीतिक दलों को अपने सभी उम्मीदवारों के लिए अपना पहला चुनाव लडने के लिए एक समान चुनाव चिन्ह देता है।

वहीं चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया था संशोधन में इस प्रकार के प्रावधान को खत्म कर दिया गया है और नई पार्टी को बतौर निर्दलीय ही चुनाव लडने का प्रावधान है। इसके अलावा चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालत को हस्तक्षेप से बचना चाहिए। गौरतलब है कि 23 अप्रैल को नगर निगम के 272 वार्ड में चुनाव होना तय है।
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