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शादियों में शगुन देने पर संकट: लोग परेशान कि 500-1000 का नोट डालना गलत न हो जाए
विनोद डबास/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 10 Nov 2016 09:29 AM IST
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‘डोली सजाकर रखना, मेंहदी लगाकर रखना, लेने तुझे ओ गौरी आएंगेे तेरे सजना’ इस तरह के गानों की धुनों के बीच दूल्हों का घोड़ी पर सवार होकर अपनी जीवन साथी के साथ बृहस्पतिवार से परिणय सूत्र में बंधने का सिलसिला शुरू होने जा रहा है, मगर इस बार शादियां कर रहे लोगों और शादियों में शामिल होने वाले लोगों के समक्ष रंग में भंग पड़ गया है, क्योंकि प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद उनके पास शादी के लिए तामझाम पर किए जाने वाले खर्च व शगुन तक का संकट आ गया है।
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तिलक नगर निवासी मामचंद गुप्ता बताते हैं कि उनको पंजाब में अपने रिश्तेदार के यहां शादी में जाना है। वहां शगुन देने के लिए उन्होंने दो दिन पहले एक-एक हजार रुपये के पांच नोट निकलवाए थे, मगर यह नोट बंद होने के बाद उनके समक्ष शगुन के लिए रुपये नहीं होने की दिक्कत पैदा हो गई है।
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उनकी तरह जनकपुरी निवासी जयप्रकाश ने बताया कि उनके यहां एक दर्जन शादियों के निमंत्रण आए हुए हैं, लेकिन उनके पास शगुन डालने के लिए सौ-पचास रुपये के नोट नहीं हैं। ऐसे में पांच सौ या हजार का नोट डालना गलत हो जाएगा।
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आज से शुभ मुहूर्त
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नजफगढ़ निवासी खजान सिंह के अनुसार, उन्हें शादियों में शगुन देने के लिए सौ-पचास रुपये के नोट कोई उधार भी नहीं दे रहा है, जबकि उनको करीब डेढ़ दर्जन शादियों में शगुन देना है। शकूर बस्ती निवासी मखन सिंह अपनी बेटी की शादी में टेंट, हलवाई आदि का भुगतान करने के मामले को लेकर परेशान हैं।
विख्यात ज्योतिष आचार्य कृष्ण दत्त शास्त्री के अनुसार, धार्मिक रुकावट के दूर होने के बाद करीब चार माह पश्चात से बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में शादियां होनी शुरू हो रही हैं। उनके अनुसार, बृहस्पतिवार को देव प्रबोधिनी एकादशी होने के चलते विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू हैं। इस दिन विवाह करने के लिए मुहूर्त निकलवाने की कोई आवश्यकता नहीं होती। यह दिन देवों का माना जाता है।
विख्यात ज्योतिष आचार्य कृष्ण दत्त शास्त्री के अनुसार, धार्मिक रुकावट के दूर होने के बाद करीब चार माह पश्चात से बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में शादियां होनी शुरू हो रही हैं। उनके अनुसार, बृहस्पतिवार को देव प्रबोधिनी एकादशी होने के चलते विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू हैं। इस दिन विवाह करने के लिए मुहूर्त निकलवाने की कोई आवश्यकता नहीं होती। यह दिन देवों का माना जाता है।