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स्वतंत्रता दिवस : नई पीढ़ी में आजादी के संघर्ष की समझ जगाने का माध्यम बने शिक्षा, बलिदान का अहसास जगाना चुनौती

Thu, 15 Aug 2024 06:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 15 Aug 2024 06:58 AM IST
सार

हम यह कैसे सुनिश्चित करें कि स्वतंत्रता के बाद जन्मी युवा पीढ़ी वास्तव में उन लोकतांत्रिक सिद्धांतों को समझती है और उन्हें महत्व देती है, जो उनके राष्ट्र का आधार बनते हैं?

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education should become a medium to create understanding of the struggle for freedom in the new generation.
demo pic... - फोटो : ANI

विस्तार

भारत जब आजादी के सात दशक से अधिक का जश्न मना रहा है, एक महत्वपूर्ण चुनौती उभरती है, हम यह कैसे सुनिश्चित करें कि स्वतंत्रता के बाद जन्मी युवा पीढ़ी वास्तव में उन लोकतांत्रिक सिद्धांतों को समझती है और उन्हें महत्व देती है, जो उनके राष्ट्र का आधार बनते हैं? जिस स्वतंत्रता का वे आज आनंद लेते हैं, उसके बारे में उन्होंने केवल कहानियों में पढ़ा या सुना है। नई सरहदों के दोनों ओर लाखों लोगों को खौफजदा करने वाले विभाजन की भयावहता और और 15 अगस्त 1947 का ऐतिहासिक क्षण, जब भारत ने अंततः मुक्त सांस ली, आज के युवाओं के लिए दूर की यादें हैं। यह असंपृक्तता एक महत्वपूर्ण सवाल उठाती है- हम समझ और प्रशंसा के इस अंतर को कैसे पाट सकते हैं?

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बलिदान की विरासत की अनुभूति : 1947 के बाद होश संभालने वाली पीढ़ी ने औपनिवेशिक उत्पीड़न का दर्द, या कड़ी मेहनत से अर्जित स्वतंत्रता की खुशी महसूस नहीं की है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अभिन्न अंग इन भावनाओं को अक्सर पाठ्यपुस्तकों या व्याख्यानों के माध्यम से व्यक्त करने पर कमजोर कर दिया जाता है। सिर्फ इतिहास की किताबें कृतज्ञता और जिम्मेदारी की गहरी भावना पैदा नहीं कर सकती हैं। मुक्त होने का क्या मतलब है, यह एहसास जगना भी जरूरी है। यह एहसास हमारे युवाओं में स्वतंत्रता के बारे में समझ पैदा करने के लिए नए दृष्टिकोण की मांग करता है-न केवल एक ऐतिहासिक घटना के रूप में बल्कि एक सतत विरासत के रूप में, जिसे संरक्षित और पोषित किया जाना चाहिए।
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अतीत से सजीव संवाद : उच्च शिक्षा में अभिनव प्रयोग, कहानियों, स्किट, फिल्मों, इतिहास और सीधे संवाद के जरिये हम भावी पीढ़ियों के लिए स्वतंत्रता की भावना को जीवित रख सकते हैं। फिल्मों और श्रृंखलाओं के माध्यम से दृश्य कहानी के जरिये भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की चुनौतियों और जीत को स्पष्ट रूप से चित्रित कर सकते हैं। इसके अलावा, स्कूलों व कॉलेजों को छात्रों को ऐतिहासिक घटनाओं के नाटकों और नाटकों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। ये प्रदर्शन इतिहास को जीवंत कर सकते हैं।
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साथ ही, स्वतंत्रता सेनानियों या उनके वंशजों द्वारा अपनी कहानियां साझा करने के सत्र छात्रों को अतीत से सीधे जोड़ते हैं। हमारी स्वतंत्रता के प्रतीकों, विशेष रूप से हमारे राष्ट्रीय ध्वज पर गर्व करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। 'हर घर तिरंगा' अभियान प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं को ध्वज के साथ व्यक्तिगत संबंध महसूस कराने की दिशा में एक कदम है। 
उच्च शिक्षा...विरासत को आगे ले जाना : स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को आगे बढ़ाने में उच्च शिक्षा संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। 

टीजी सीताराम
अध्यक्ष, एआईसीटीई

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