केंद्र सरकार ने शीला दीक्षित के फैसले को किया बैन
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दिल्ली की सड़कों से ई-रिक्शा की छुट्टी कर दी गई है। केंद्रीय मोटर वाहन (सीएमवी) एक्ट में संशोधन के जरिए इस तरह के वाहन का प्रावधान ही खत्म कर दिया गया है।
पहले ढाई सौ वाट से कम क्षमता वाले ई-रिक्शा को छोड़कर बाकी पर कार्रवाई की बात हो रही थी, लेकिन इस टाइप के वाहन का प्रावधान खत्म होने से अब कम वाट वाले ई-रिक्शा को भी सड़कों से हटाया जाएगा।
राजधानी की सड़कों पर दौड़ रहे ई-रिक्शा को भी हटाने का आदेश जारी कर दिया गया है। अभी तक ढाई सौ से ज्यादा को जब्त किया जा चुका है। दिल्ली की सड़कों पर वर्तमान में एक लाख से ज्यादा ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं।
तो अब भूल जाइए ई-रिक्शे की सवारी
परिवहन विभाग ने डीलरों पर नकेल कसने के लिए दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने को कहा है। परिवहन विभाग ने हाल ही में एक अध्ययन कराया था, जिसमें पता चला कि सड़कों पर दौड़ रहे ई-रिक्शा की क्षमता ढाई सौ वाट से अधिक है।
इतनी क्षमता वाले वाहन मोटर व्हीकल एक्ट के तहत आते हैं। इसके बाद परिवहन विभाग ने अधिसूचना जारी करके ढाई सौ वाट से अधिक क्षमता वाले वाहन चालकों को लाइसेंस, बैज और रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा।
डीलरों को भी पंजीकरण का आदेश दिया गया। मगर इसी दौरान केंद्र सरकार ने ई-रिक्शा को लेकर एक कमेटी का गठन कर दिया।
शीला दीक्षित ने की थी शुरुआत
में ई-रिक्शा की शुरुआत तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने पर्यावरण बचाने के मकसद से की थी। तब ढाई सौ वाट से कम क्षमता वाले ई-रिक्शा उतारने की बात की गई थी।
रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस और बैज बनवाने से भी राहत दी गई थी। इसका फायदा उठाते हुए सड़कों पर इनकी भरमार हो गई। इनकी वजह से सड़कों पर जाम लगने लगा और दुर्घटनाएं होनी लगीं।
ई-रिक्शा पर रोक लगाने की सबसे बड़ी वजह बनी यात्रियों की सुरक्षा। इनमें सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं है। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में कार्रवाई शुरू हो चुकी है। इनफोर्समेंट डिपार्टमेंट की अलग-अलग टीमें कार्रवाई कर रही हैं।