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ऑनलाइन टूर्नामेंट को मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी, तैयार हो रही है ठोस योजना
Sat, 20 Mar 2021 11:46 PM IST
प्राची प्रियम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sat, 20 Mar 2021 11:46 PM IST
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शुरु हुई गेमिंग समिट
- फोटो : अमर उजाला
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ईफोरएम गेम ऑन के पहले दिन, गृरुवार को शुरु हुई गेमिंग समिट में डॉ. अनुराग बत्रा और मोबाइल प्रीमियर लीग के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर और सह-संस्थापक साई श्रीनिवास मौजूद रहे। इसका विषय 'इंडियन गेमिंग कंपनीज गोइंग ग्लोबल' था।
पिछले 12 महीने का समय रोलर कॉस्टर की तरह काफी उतार चढ़ाव वाला रहा है। उसी बीच गेमिंग इंडस्ट्री भी एक दो साल आगे बढ़ चुका है। किसी के लिए भी इतने लंबे समय तक घर के अंदर रहना आसान नहीं होता, लेकिन कोविड की वैक्सीन आने के बाद सभी को उम्मीद है कि सब लोग ऑफिसों में बहुत जल्द वापस आ सकेंगे।
वैसे तो गेमिंग हमेशा से मुख्यधारा की एक्टिविटी रहा है। यह सिर्फ इतना है कि अब, इंटरनेट और मोबाइल फोन के आने के बाद , यह अधिक से अधिक सुलभ हो रहा है। साथ ही, गेमिंग ही खुद में एसा एकमात्र प्रारूप है जिसमें भाषा की कोई समस्या नहीं है।
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यह बात आप गेमिंग के अलावा किसी और चीज के लिए नहीं कह सकते, भले ही वह फिल्म, वीडियो, ऑडियो या कंटेंट हो। गेमिंग खुद एक यूनिवर्सल भाषा है और इसीलिए किसी के लिए भी इसे समझना इतना आसान है। यही कारण है कि अन्य प्रारूपों गेमिंग इतनी तेजी से बढ़ रहा है।
साई श्रीनिवास ने कहा कि अब से कुछ वर्षो में कुछ ऐसा होगा कि एक प्लेटफार्म बनेगा चाहे वह एमपीएल हो या कोई और यह तो समय ही बताएगा, जहां बड़े पैमाने पर वैश्विक टूर्नामेंट आयोजित होंगे। जैसे की शतरंज का खेल। बड़े पैमाने पर ऑनलाइन टूर्नामेंट होंगे जहां लाखों लोग खेल रहे होंगे। न केवल इस टूर्नामेंट का पैमाना बल्कि उस स्थिति की कल्पना करें जहां दो लोग टूर्नामेंट का क्वार्टर फाइनल खेल रहे होंगे और यह निश्चित रूप से तय होगा कि दुनिया भर के लोगों का एक महत्वपूर्ण समूह भी लाइव प्रसारण देखना चाह रहा होगा कि कैसे खेल चल रहा है, क्योंकि बहुत सारे लोग एलिमिनेटेड हो चुके होंगे। यही ई-स्पोर्ट्स का भविष्य है।
यह मोबाइल के इस्तेमाल से ज्यादा चलने वाला है क्योंकि ज्यादातर लोग मोबाइल से ही इसे एक्सेस कर सकते हैं। व्यावहारिक रूप से, हर कोई जो शतरंज को समझता है, उस माइलस्टोन का उपयोग करके शतरंज का एक टूर्नामेंट ऑनलाइन खेल सकता है। यदि इसी तरह का टूर्नामेंट ऑफलाइन आयोजित किया जाता, तो 10000 लोगों को ऑफलाइन समायोजित करना असंभव है, और यह ऑनलाइन डिजिटल खेलों की सुंदरता है जहां एसा कुछ भी नहीं है।
हमारे देश में बहुत सारे स्वदेशी डेवलपर्स हैं जो बहुत अच्छा कर रहे हैं। बहुत सारे स्वदेशी डेवलपर्स है जो वैश्विक दर्शकों के लिए खेल बना रहे हैं। भारतीय भाषाओं में गेमिंग अगला बड़ा फ्रंटियर है या नहीं यह भी सोचने वाली बात है। हालांकि भाषाओं से अधिक, खेल भारतीय कहानियों पर निर्मित होते हैं।
यदि आप जापान को देखते हैं, तो बहुत सारे खेल हैं जो उस भूमि से उत्पन्न कहानियों के आधार पर बनाए गए हैं। भारत में, हमारे पास बताने के लिए बहुत सी कहानियां हैं और हर खेल एक तरह से कहानी कहने का तरीका है। भाषा से अधिक, भारतीय दर्शकों से परिचित कहानियों पर बनने वाले खेल अच्छा प्रदर्शन करेंगे। जैसे ही अधिक भारतीय लोग ऑनलाइन के माध्यम से जुड़ेंगे, ऐसे कुछ स्टूडियो होंगे जो इन खेलों में से कुछ पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
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पिछले 12 महीने का समय रोलर कॉस्टर की तरह काफी उतार चढ़ाव वाला रहा है। उसी बीच गेमिंग इंडस्ट्री भी एक दो साल आगे बढ़ चुका है। किसी के लिए भी इतने लंबे समय तक घर के अंदर रहना आसान नहीं होता, लेकिन कोविड की वैक्सीन आने के बाद सभी को उम्मीद है कि सब लोग ऑफिसों में बहुत जल्द वापस आ सकेंगे।
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वैसे तो गेमिंग हमेशा से मुख्यधारा की एक्टिविटी रहा है। यह सिर्फ इतना है कि अब, इंटरनेट और मोबाइल फोन के आने के बाद , यह अधिक से अधिक सुलभ हो रहा है। साथ ही, गेमिंग ही खुद में एसा एकमात्र प्रारूप है जिसमें भाषा की कोई समस्या नहीं है।
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यह बात आप गेमिंग के अलावा किसी और चीज के लिए नहीं कह सकते, भले ही वह फिल्म, वीडियो, ऑडियो या कंटेंट हो। गेमिंग खुद एक यूनिवर्सल भाषा है और इसीलिए किसी के लिए भी इसे समझना इतना आसान है। यही कारण है कि अन्य प्रारूपों गेमिंग इतनी तेजी से बढ़ रहा है।
साई श्रीनिवास ने कहा कि अब से कुछ वर्षो में कुछ ऐसा होगा कि एक प्लेटफार्म बनेगा चाहे वह एमपीएल हो या कोई और यह तो समय ही बताएगा, जहां बड़े पैमाने पर वैश्विक टूर्नामेंट आयोजित होंगे। जैसे की शतरंज का खेल। बड़े पैमाने पर ऑनलाइन टूर्नामेंट होंगे जहां लाखों लोग खेल रहे होंगे। न केवल इस टूर्नामेंट का पैमाना बल्कि उस स्थिति की कल्पना करें जहां दो लोग टूर्नामेंट का क्वार्टर फाइनल खेल रहे होंगे और यह निश्चित रूप से तय होगा कि दुनिया भर के लोगों का एक महत्वपूर्ण समूह भी लाइव प्रसारण देखना चाह रहा होगा कि कैसे खेल चल रहा है, क्योंकि बहुत सारे लोग एलिमिनेटेड हो चुके होंगे। यही ई-स्पोर्ट्स का भविष्य है।
यह मोबाइल के इस्तेमाल से ज्यादा चलने वाला है क्योंकि ज्यादातर लोग मोबाइल से ही इसे एक्सेस कर सकते हैं। व्यावहारिक रूप से, हर कोई जो शतरंज को समझता है, उस माइलस्टोन का उपयोग करके शतरंज का एक टूर्नामेंट ऑनलाइन खेल सकता है। यदि इसी तरह का टूर्नामेंट ऑफलाइन आयोजित किया जाता, तो 10000 लोगों को ऑफलाइन समायोजित करना असंभव है, और यह ऑनलाइन डिजिटल खेलों की सुंदरता है जहां एसा कुछ भी नहीं है।
हमारे देश में बहुत सारे स्वदेशी डेवलपर्स हैं जो बहुत अच्छा कर रहे हैं। बहुत सारे स्वदेशी डेवलपर्स है जो वैश्विक दर्शकों के लिए खेल बना रहे हैं। भारतीय भाषाओं में गेमिंग अगला बड़ा फ्रंटियर है या नहीं यह भी सोचने वाली बात है। हालांकि भाषाओं से अधिक, खेल भारतीय कहानियों पर निर्मित होते हैं।
यदि आप जापान को देखते हैं, तो बहुत सारे खेल हैं जो उस भूमि से उत्पन्न कहानियों के आधार पर बनाए गए हैं। भारत में, हमारे पास बताने के लिए बहुत सी कहानियां हैं और हर खेल एक तरह से कहानी कहने का तरीका है। भाषा से अधिक, भारतीय दर्शकों से परिचित कहानियों पर बनने वाले खेल अच्छा प्रदर्शन करेंगे। जैसे ही अधिक भारतीय लोग ऑनलाइन के माध्यम से जुड़ेंगे, ऐसे कुछ स्टूडियो होंगे जो इन खेलों में से कुछ पर ध्यान केंद्रित करेंगे।