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दो फाड़ में बंटी इनेलो, मां के विधानसभा क्षेत्र डबवाली से चुनाव लड़ सकते हैं दुष्यंत चौटाला

Tue, 27 Nov 2018 04:03 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 27 Nov 2018 04:03 AM IST
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Dushyant Chautala can contest election from Dabwali constituency
दुष्यंत चौटाला - फोटो : फाइल फोटो

26 नवंबर दुष्यंत चौटाला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। वह अपनी मां नैना चौटाला के विधानसभा क्षेत्र डबवाली से चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। साफ है कि हरियाणा  विधानसभा चुनाव दुष्यंत के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। दिग्विजय चौटाला ने दुष्यंत के लोकसभा चुनाव न लड़ने की घोषणा की है।      

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इनेलो में दो फाड़ हो जाने के बाद अजय चौटाला परिवार राजनैतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कवायद कर रहा है। इसी क्रम में हरियाण के विधानसभा चुनाव में  मुख्यमंत्री के रूप में दुष्यंत चौटाला पर दांव लगाने की तैयारी में है। इस बात पर मुहर दिग्विजय चौटाला के बयान से लग गई है। दिग्विजय ने सिरसा में एलान किया कि दुष्यंत विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। अभी दुष्यंत हरियाणा ऊंचाना लोकसभा सीट से सांसद हैं।    
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इससे साफ जाहिर है कि अजय चौटाला का परिवार दुष्यंत को आगे बढ़ा राजनैतिक समीकरण में अहम कड़ी जोड़ना चाहता है, क्योंकि पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा अजय चौटाला दो साल से सक्रिय राजनीति से दूर हैं। दिग्विजय का पब्लिक कनेक्ट भी सीमित है। नैना चुनरी चौपाल के चलते हरियाणा में लोकप्रिय हैं, लेकिन दुष्यंत युवा होने के साथ साफ सुथरी और मिलनसार छवि के चलते लोकप्रिय हैं। इसलिए 9 दिसंबर को नई पार्टी के गठन के बाद नई पार्टी को चुनाव समीकरण में बैठाने में भी बड़ा माइलेज मिल सकता है।       
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उधर, मेवात और कैथल में भी 9 जिलों के प्रधान ने इनेलो छोड़ दी है। जिस तरह से बड़ी संख्या में लोग इनेलो छोड़कर अजय चौटाला से जुड़ रहे हैं। उससे इनेलो की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं। इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने आरोप लगाया है कि अजय चौटाला परिवार केवल पॉलिटिकल स्टंट कर रहे हैं। जो लोग पहले छोड़कर चले हैं उन्हें बुला बुलाकर मीटिंग कर छोड़ने का एलान कर रहे हैं।   

    
वहीं, अजय चौटाला के समर्थक और वरिष्ठ नेता ने कहा कि अभी पहले पार्टी का गठन प्राथमिकता है। इसके बाद रणनीति बनेगी। लेकिन इतना तय है कि पार्टी का चेहरा दुष्यंत ही होंगे। लेकिन गठबंधन के लिए जीत और धर्मनिरपेक्ष होना एक मात्र पैमाना होगा। जहां तक सवाल बसपा केसाथ गठबंधन का है तो यह फैसला पलट भी सकता है। हम तथ्यों के आधार पर यह कह रहे हैं। इसका: खुलासा जल्द होगा।        

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