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लॉकडाउन में गृहराज्य लौटने वाले छात्रों के स्कूल से नहीं कटेंगे नाम, केंद्र ने राज्यों को भेजी गाइडलाइन

Wed, 15 Jul 2020 10:57 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 15 Jul 2020 10:57 AM IST
सार

- सरकार ने घर लौटने वाले प्रवासी कामगारों के बच्चों के लिए गाइडलाइन राज्यों को भेजी, दोनों राज्यों के स्कूलों में रहेगा दाखिला

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During coronavirus lockdown migrant students who return their home states their name wont be cut from school HRD ministry issues guidelines to states
श्रमिक स्पेशल ट्रेन से पूरे परिवार के साथ लौटते मजदूर (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा समेत देशभर के राज्यों में लौटने वाले प्रवासी कामगारों(माइग्रेंट वर्कर) के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। ऐसे प्रवासी कामगारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के मकसद से केंद्र सरकार ने पांच बिंदुओं पर विशेष गाइडलाइन तैयार करके राज्यों को भेजी है। राज्यों को इन गाइडलाइन को लागू करना अनिवार्य होगा।

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों के मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव को यह गाइडलाइन भेजी गई हैं। इसमें लिखा है कि लॉकडाउन के चलते गृहराज्य लौटने वाले ऐसे परिवारों के छात्रों का नाम नाम स्कूल नहीं काटेंगे। उनके नाम के आगे लिखा जाएगा कि कोविड-19 के चलते वे इस समय शहर या राज्य में नहीं है।
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ऐसे छात्रों के लौटने का इंतजार किया जाएगा। इनसे फीस की भी डिमांड नहीं की जाएगी। न ही ऐसे छात्रों को स्कूल अनुपस्थिति दर्शा सकते हैं। ऐसे कामगारों के बच्चों का नाम दोनों राज्यों के स्कूलों में एक साथ जुड़ने का भी प्रावधान किया गया है। इसकी रिपोर्ट बनाकर सभी राज्यों को केंद्र को भेजनी भी अनिवार्य होगी।
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ट्रांसफर सर्टिफिकेट की नहीं कर पाएंगे मांग:
राज्यों को ऐसे कामगारों की स्किल मैपिंग  के दौरान बनी सूची में से जिला, स्थानीय प्रशासन और पंचायत के माध्यम से ऐसे  प्रवासी कामगारों के बच्चों की सूची बनानी होगी। इसी सूची के माध्यम से उनको वहीं के स्कूलों से जोड़ना होगा। कोई भी स्कूल प्रशासन किसी ऐसे अभिभावक से ट्रांसफर सर्टिफिकेट की मांग नहीं करेगा। अभिभावक जो भी अपना पहचान पत्र दिखाएंगे, उसी के आधार पर सरकारी सहायता प्राप्त या पड़ोस के स्कूलों में दाखिला होगा। कोई उनसे फीस की मांग भी नहीं करेगा। क्योंकि ऐसे प्रवासी कामगारों के बच्चे ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत आते हैं। उनकी किताबों से लेकर दाखिले की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन करेगा।


मिड-डे मील देना अनिवार्य:
केंद्र सरकार के मिड-डे-मील योजना के तहत उस इलाके में जैसे अन्य छात्रों को मिड-डे-मील की सुविधा मिल रही है, ऐसे ही प्रवासी कामगारों के बच्चों को भी देना अनिवार्य होगा। इसकी अलग से सूची और रिपोर्ट बनानी होगी।

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