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राजीव गांधी महिला छात्रावास खाली कराने के नोटिस पर छात्र संगठन ने जताया विरोध
Mon, 17 Aug 2020 06:07 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Mon, 17 Aug 2020 06:07 PM IST
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दिल्ली विश्वविद्यालय डीयू के राजीव गांधी महिला छात्रावास की ओर से छात्राओं को नोटिस जारी कर हॉस्टल खाली करने के साथ-साथ अप्रैल से अगस्त तक सामान रखने के किराए के रूप में एक हजार रुपये देने के आदेश के विरोध में छात्र संगठन एनएसयूआई ने विरोध जताया है।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय मीडिया उपप्रभारी मोहम्मद अली ने कहा कि वर्तमान समय में लोग कोरोना वायरस से जूझ रहे हैं। ऐसे में हॉस्टल खाली करने के लिए छात्राओं का अन्य प्रदेशों से आना खतरे से खाली नहीं होगा उन्होंने कहा कि बिहार और महाराष्ट्र में अभी भी लॉकडाउन लगा हुआ है। ऐसे में वहां की छात्राओं का आना नामुमकिन है।
उन्होंने कहा कि हॉस्टल द्वारा प्रत्येक छात्रा से प्रत्येक महीने एक हजार रुपये किराए के लिए लेना साफ तौर पर मनमानी है। क्योंकि, छात्राओं ने सामान खुद नहीं छोड़ा था बल्कि वह अचानक लगे लॉकडाउन के कारण हुआ था।
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ऐसे में पांच महीने के हिसाब से पांच हजार रुपये वसूलना तानाशाही है।उन्होंने मांग करते हुए कहा कि विवि द्वारा सुधार कर इस फरमान को तुरंत वापस लेना चाहिए और जब तक हालात सामान्य न हो तब तक किसी भी छात्रों को हॉस्टल खाली करने के लिए तथा जबरन किराया लेने के लिए नहीं बोलना चाहिए।
आइपीयू फीस वृद्धि माफी को लेकर एनएसयूआई ने उपराज्यपाल को लिखा पत्र
गुरू गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय(आइपीयू) द्वारा इस सत्र से फीस वृद्धि के मामले को लेकर एनएसयूआई ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर छूट की मांग की है। जिसमें छात्र संगठन की ओर से कहा गया है कि विश्वविद्यालय द्वारा 80 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक पाठ्यक्रमों के लिए फीस ली जा रही है। वहीं, कोरोना की वजह से कई छात्र फीस भरने में असमर्थ हैं। ऐसे में विवि को ट्यूशन फीस के अलावा अन्य फीस को माफ करना चाहिए। वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को रियायत मिलनी चाहिए। इसके साथ ही छात्रों को अनावश्यक बोझ से बचाते हुए प्रत्येक छात्र को इस सत्र में आसान ब्याज मुक्त किश्तों में शुल्क का भुगतान करने के लिए विकल्प प्रदान करें।
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एनएसयूआई के राष्ट्रीय मीडिया उपप्रभारी मोहम्मद अली ने कहा कि वर्तमान समय में लोग कोरोना वायरस से जूझ रहे हैं। ऐसे में हॉस्टल खाली करने के लिए छात्राओं का अन्य प्रदेशों से आना खतरे से खाली नहीं होगा उन्होंने कहा कि बिहार और महाराष्ट्र में अभी भी लॉकडाउन लगा हुआ है। ऐसे में वहां की छात्राओं का आना नामुमकिन है।
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उन्होंने कहा कि हॉस्टल द्वारा प्रत्येक छात्रा से प्रत्येक महीने एक हजार रुपये किराए के लिए लेना साफ तौर पर मनमानी है। क्योंकि, छात्राओं ने सामान खुद नहीं छोड़ा था बल्कि वह अचानक लगे लॉकडाउन के कारण हुआ था।
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ऐसे में पांच महीने के हिसाब से पांच हजार रुपये वसूलना तानाशाही है।उन्होंने मांग करते हुए कहा कि विवि द्वारा सुधार कर इस फरमान को तुरंत वापस लेना चाहिए और जब तक हालात सामान्य न हो तब तक किसी भी छात्रों को हॉस्टल खाली करने के लिए तथा जबरन किराया लेने के लिए नहीं बोलना चाहिए।
आइपीयू फीस वृद्धि माफी को लेकर एनएसयूआई ने उपराज्यपाल को लिखा पत्र
गुरू गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय(आइपीयू) द्वारा इस सत्र से फीस वृद्धि के मामले को लेकर एनएसयूआई ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर छूट की मांग की है। जिसमें छात्र संगठन की ओर से कहा गया है कि विश्वविद्यालय द्वारा 80 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक पाठ्यक्रमों के लिए फीस ली जा रही है। वहीं, कोरोना की वजह से कई छात्र फीस भरने में असमर्थ हैं। ऐसे में विवि को ट्यूशन फीस के अलावा अन्य फीस को माफ करना चाहिए। वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को रियायत मिलनी चाहिए। इसके साथ ही छात्रों को अनावश्यक बोझ से बचाते हुए प्रत्येक छात्र को इस सत्र में आसान ब्याज मुक्त किश्तों में शुल्क का भुगतान करने के लिए विकल्प प्रदान करें।