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Delhi NCR News: डीयू में एक वर्षीय पीजी कोर्स को हरी झंडी, उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव की शुरुआत
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- एनईपी 2020 के तहत नए पाठ्यक्रमों को मंजूरी, मेडिकल, विदेशी भाषा और इंटरनेशनल स्टडी के विकल्प भी बढ़े
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की अकादमिक परिषद (एसी) की बुधवार को हुई 1026वीं बैठक में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलावों को मंजूरी दी गई है। कुलपति प्रो. योगेश सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में एक वर्षीय स्नातकोत्तर (पीजी) कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव पास किया गया। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप उठाया गया है, जिसके तहत चार वर्षीय स्नातक (यूजी) कार्यक्रम का चौथा वर्ष पूरा करने वाले छात्रों को सीधे एक वर्षीय पीजी कोर्स में प्रवेश का अवसर मिलेगा। बता दें कि आपके अपने अखबार अमर उजाला ने पिछले वर्ष दिसंबर के अंत में डीयू में एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम लागू करने के संबंधी में खबर प्रकाशित की थी।
कई विषयों के कोर्सेज को मिली स्वीकृति -
बैठक में कला, भाषा और विज्ञान से जुड़े कई विषयों में नए कोर्सेज को स्वीकृति दी गई। दर्शनशास्त्र विभाग में एमए के एक वर्षीय और दो वर्षीय दोनों स्वरूपों को मंजूरी मिली। वहीं हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी और संस्कृत जैसे विषयों में भी पाठ्यक्रमों को हरी झंडी दी गई। गणितीय विज्ञान संकाय के तहत एक वर्षीय एमएससी गणित (पहले और दूसरे सेमेस्टर) तथा दो वर्षीय एमएससी (तीसरे और चौथे सेमेस्टर) को भी स्वीकृति प्रदान की गई। वहीं दूरस्थ शिक्षा को भी मजबूत करने की दिशा में विश्वविद्यालय ने स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) के लिए नए कार्यक्रमों को मंजूरी दी है। इसके तहत मल्टीमीडिया और जनसंचार जैसे कोर्सेज ऑफलाइन/ओडीएल मोड में शुरू किए जाएंगे। साथ ही एमए (अंग्रेजी) व और बीए आनर्स (मल्टीमीडिया और जनसंचार) जैसे पाठ्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे, जिससे दूरस्थ शिक्षा लेने वाले छात्रों को अधिक विकल्प मिल सकेंगे।
मेडिकल कोर्सेज को मिली मंजूरी -
मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में डीएम पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी और मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में डीएम मेडिकल जेनेटिक्स कोर्स शुरू करने के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली है। इन कोर्सेज में प्रत्येक वर्ष दो-दो सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। इससे विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, रिसर्च काउंसिल का नाम बदलकर ‘रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल’ करने का फैसला भी लिया गया, जिससे शोध और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
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50 सीटों के साथ एमएड होगा शुरू-
बैठक में महर्षि वाल्मीकि कॉलेज ऑफ एजुकेशन में शैक्षणिक सत्र 2026-2027 से 50 सीटों के साथ एम एड दो वर्षीय प्रोग्राम शुरू करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। हालांकि यह स्वीकृति केवल तभी मान्य होगी। अगर कॉलेज खाली और स्वीकृत पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया पूरी कर लेता है। साथ ही 30 अप्रैल तक अपनी एनसीटीई मान्यता को मार्च 2026 से आगे बढ़वा लेता है।
विदेश भाषा में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सेज होंगे संचालित-
इसके अलावा विश्वविद्यालय ने विदेशी भाषाओं में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का भी फैसला लिया है। इनमें फ्रेंच, स्पेनिश, जर्मन, पुर्तगाली, इतालवी, चीनी, कोरियाई, जापानी और रूसी जैसी भाषाएं शामिल होंगी। इससे छात्रों को वैश्विक स्तर पर रोजगार के नए अवसर मिल सकेंगे।
विदेश में जाकर कर सकेंगे पढ़ाई-
अकादमिक परिषद की बैठक में ‘सेमेस्टर अवे प्रोग्राम’ पर भी चर्चा हुई, जिसके तहत छात्र अपने कोर्स का एक सेमेस्टर किसी विदेशी विश्वविद्यालय में पूरा कर सकेंगे। वहां से अर्जित क्रेडिट को उनकी डिग्री में शामिल किया जाएगा। इससे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव और नई सीख हासिल करने का मौका मिलेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन सुधारों से छात्रों को अधिक लचीलापन मिलेगा और वे अपनी रुचि व करियर के अनुसार बेहतर विकल्प चुन सकेंगे। कुलपति ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी नए कोर्सेज को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और पूरी तैयारियों के बाद ही इन्हें शुरू किया जाएगा। इन फैसलों के साथ डीयू ने उच्च शिक्षा में आधुनिक, लचीली और वैश्विक दृष्टिकोण अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
30 दिन के अंदर भेजे जर्नल्स-
वहीं इस बैठक में सामाजिक विज्ञान संकाय एवं भाषाओं जैसे कुछ विभागों के विषयों में स्कोप्स जर्नल्स की अनुपलब्धता के कारण पेपर प्रकाशित होने में कठिनाई के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। इस पर कुलपति योगेश सिंह ने सभी विभागों से आह्वान किया कि वह अपने-अपने फील्ड के 20-20 बेस्ट जर्नल्स की सूची बनाएं और 30 दिन के अंदर उसे भेजें। विभाग जर्नल्स के लिए मानदंड तय करें और उनके लिए अंक निर्धारित करें। उसके आधार पर ही नंबर देकर जर्नल्स की वरीयता सूची तैयार करें।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की अकादमिक परिषद (एसी) की बुधवार को हुई 1026वीं बैठक में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलावों को मंजूरी दी गई है। कुलपति प्रो. योगेश सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में एक वर्षीय स्नातकोत्तर (पीजी) कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव पास किया गया। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप उठाया गया है, जिसके तहत चार वर्षीय स्नातक (यूजी) कार्यक्रम का चौथा वर्ष पूरा करने वाले छात्रों को सीधे एक वर्षीय पीजी कोर्स में प्रवेश का अवसर मिलेगा। बता दें कि आपके अपने अखबार अमर उजाला ने पिछले वर्ष दिसंबर के अंत में डीयू में एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम लागू करने के संबंधी में खबर प्रकाशित की थी।
कई विषयों के कोर्सेज को मिली स्वीकृति -
बैठक में कला, भाषा और विज्ञान से जुड़े कई विषयों में नए कोर्सेज को स्वीकृति दी गई। दर्शनशास्त्र विभाग में एमए के एक वर्षीय और दो वर्षीय दोनों स्वरूपों को मंजूरी मिली। वहीं हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी और संस्कृत जैसे विषयों में भी पाठ्यक्रमों को हरी झंडी दी गई। गणितीय विज्ञान संकाय के तहत एक वर्षीय एमएससी गणित (पहले और दूसरे सेमेस्टर) तथा दो वर्षीय एमएससी (तीसरे और चौथे सेमेस्टर) को भी स्वीकृति प्रदान की गई। वहीं दूरस्थ शिक्षा को भी मजबूत करने की दिशा में विश्वविद्यालय ने स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) के लिए नए कार्यक्रमों को मंजूरी दी है। इसके तहत मल्टीमीडिया और जनसंचार जैसे कोर्सेज ऑफलाइन/ओडीएल मोड में शुरू किए जाएंगे। साथ ही एमए (अंग्रेजी) व और बीए आनर्स (मल्टीमीडिया और जनसंचार) जैसे पाठ्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे, जिससे दूरस्थ शिक्षा लेने वाले छात्रों को अधिक विकल्प मिल सकेंगे।
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मेडिकल कोर्सेज को मिली मंजूरी -
मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में डीएम पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी और मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में डीएम मेडिकल जेनेटिक्स कोर्स शुरू करने के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली है। इन कोर्सेज में प्रत्येक वर्ष दो-दो सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। इससे विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, रिसर्च काउंसिल का नाम बदलकर ‘रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल’ करने का फैसला भी लिया गया, जिससे शोध और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
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50 सीटों के साथ एमएड होगा शुरू-
बैठक में महर्षि वाल्मीकि कॉलेज ऑफ एजुकेशन में शैक्षणिक सत्र 2026-2027 से 50 सीटों के साथ एम एड दो वर्षीय प्रोग्राम शुरू करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। हालांकि यह स्वीकृति केवल तभी मान्य होगी। अगर कॉलेज खाली और स्वीकृत पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया पूरी कर लेता है। साथ ही 30 अप्रैल तक अपनी एनसीटीई मान्यता को मार्च 2026 से आगे बढ़वा लेता है।
विदेश भाषा में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सेज होंगे संचालित-
इसके अलावा विश्वविद्यालय ने विदेशी भाषाओं में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का भी फैसला लिया है। इनमें फ्रेंच, स्पेनिश, जर्मन, पुर्तगाली, इतालवी, चीनी, कोरियाई, जापानी और रूसी जैसी भाषाएं शामिल होंगी। इससे छात्रों को वैश्विक स्तर पर रोजगार के नए अवसर मिल सकेंगे।
विदेश में जाकर कर सकेंगे पढ़ाई-
अकादमिक परिषद की बैठक में ‘सेमेस्टर अवे प्रोग्राम’ पर भी चर्चा हुई, जिसके तहत छात्र अपने कोर्स का एक सेमेस्टर किसी विदेशी विश्वविद्यालय में पूरा कर सकेंगे। वहां से अर्जित क्रेडिट को उनकी डिग्री में शामिल किया जाएगा। इससे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव और नई सीख हासिल करने का मौका मिलेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन सुधारों से छात्रों को अधिक लचीलापन मिलेगा और वे अपनी रुचि व करियर के अनुसार बेहतर विकल्प चुन सकेंगे। कुलपति ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी नए कोर्सेज को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और पूरी तैयारियों के बाद ही इन्हें शुरू किया जाएगा। इन फैसलों के साथ डीयू ने उच्च शिक्षा में आधुनिक, लचीली और वैश्विक दृष्टिकोण अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
30 दिन के अंदर भेजे जर्नल्स-
वहीं इस बैठक में सामाजिक विज्ञान संकाय एवं भाषाओं जैसे कुछ विभागों के विषयों में स्कोप्स जर्नल्स की अनुपलब्धता के कारण पेपर प्रकाशित होने में कठिनाई के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। इस पर कुलपति योगेश सिंह ने सभी विभागों से आह्वान किया कि वह अपने-अपने फील्ड के 20-20 बेस्ट जर्नल्स की सूची बनाएं और 30 दिन के अंदर उसे भेजें। विभाग जर्नल्स के लिए मानदंड तय करें और उनके लिए अंक निर्धारित करें। उसके आधार पर ही नंबर देकर जर्नल्स की वरीयता सूची तैयार करें।