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केजरीवाल सरकार के लिए मुसीबत बन रहा 'आम आदमी'
सीमा शर्मा/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 31 Jan 2014 10:54 AM IST
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दिल्ली में सरकारी झुनझुनों और प्रबंधन के कांट्रेक्ट खत्म करने के दबाब के बाद भी डीटीसी कांट्रेक्ट कर्मियों की हड़ताल चौथे दिन भी जारी है।
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मुख्यमंत्री के बाद बृहस्पतिवार देर शाम परिवहन मंत्री सौरभ भारद्वाज ने मिलेनियम डिपो जाकर कर्मियों को पक्का करने का आश्वासन देते हुए सड़कों पर बसों को निकालने की मिन्नत की लेकिन उन्हें बैरंग लौटाते हुए मांग पूरी न होने तक हड़ताल संग चक्का जाम करने की चेतावनी भी दे डाली है।
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मिलेनियम डिपो के गेट नंबर 4 के बाहर चार दिन से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल व धरने पर बैठे डीटीसी कांट्रेक्ट ड्राइवर व कंडक्टर बृहस्पतिवार दोपहर से परिवहन मंत्री सौरभ भारद्वाज का इंतजार कर रहे थे। उन्हें उम्मीद थी कि यात्रियों की दिक्कत और चुनाव से पहले ‘आप’ के वादों के मद्देनजर शायद पक्का करने का कोई रास्ता सरकार ने खोज निकाला हो।
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लगभग साढ़े छह बजे परिवहन मंत्री की गाड़ी जैसे ही मिलेनियम डिपो धरना स्थल पर रूकी, सभी कर्मी खड़े हो गए। कर्मी जितेंद्र व अशोक के मुताबिक, मंत्री ने आते ही सीधे सपाट शब्दों में कह गया कि हम अभी आपको पक्का नहीं कर सकते हैं।
मंत्री ने कर्मियों से एक महीने का समय मांगते हुए कहा कि दस दिन में कमेटी अपनी रिपोर्ट दे देगी, उसी के आधार पर आगे की प्रक्रिया चलेगी। मंत्री ने कर्मियों से यात्रियों की परेशानी व डीटीसी के लाखों के नुकसान का हवाला भी दिया।
मंत्री ने घोषणा की कि इन चार दिनों में जो कांट्रेक्ट कर्मी डयूटी पर नहीं आए हैं, उनकी अनुपस्थिति नहीं लगेगी और पूरा वेतन मिलेगा। इसके अलावा सभी कांट्रेक्ट कर्मियों को ड्यूटी पर पहुंचने पर बस दी जाएगी। मंत्री का यह आश्वासन सुनकर प्रदर्शनकारियों में दो गुट बन गए।
एक ने हड़ताल खत्म करने की घोषणा कर दी तो दूसरे ने अनशन जारी रखने की। काफी जद्दोजेहद के बाद मंच से आखिर मांग पूरी न होने तक हड़ताल जारी रखने पर सहमति बनीं। कर्मियों का कहना है कि जब तक पक्का करने की मांग पूरी नहीं होगी, वे हड़ताल नहीं तोड़ेंगे। कर्मियों ने मांग पूरी न होने पर चक्का जाम की भी चेतावनी दे डाली है।
प्रबंधन के तेवर सख्त, 250 को नोटिस
चार दिन से डिपो में अटकी तीन हजार से अधिक बसों को सड़कों पर उतारने के लिए प्रबंधन हड़ताल तोड़ने की जद्दोजेहद में लगा हुआ है। इंद्रप्रस्थ स्थित मुख्यालय में दिनभर बैठकों में चेयरमैन देवाश्री सीनियर अधिकारियों से बसों को सड़कों पर कैसे उतारा जाए पर मंथन करती रहीं। प्रबंधन ने कांट्रेक्ट कर्मियों को डराने के लिए 250 को तीन दिन में डयूटी ज्वाइन करने का नोटिस भेज दिया है। नोटिस में लिखा है कि यदि तीन दिन में डिपो जाकर बसों को सड़कों पर नहीं उतारा तो उनका कांट्रेक्ट रद कर दिया जाएगा।
यूपी व हरियाणा के गांवों से आ रहा खाना व लस्सी
रिंग रोड स्थित मिलेनियम डिपो आजकल पिकनिट स्पॉट बना हुआ है। छोटे से टेंट में सैकड़ों कर्मियों के बैठने की जगह है। मंच पर भूख हड़ताल पर बैठे 15 से 20 कर्मी तो सामने जमीन पर सैकड़ों कर्मचारी पक्का करने की मांग पर बैठे रहते हैं। टेंट के बाहर सड़क के दोनों किनारे उससे भी अधिक संख्या में हर समय कर्मी डटे रहते हैं। दिन-रात चल रहे धरने के लिए खाना, लस्सी और पानी दिल्ली समेत यूपी व हरियाणा के गांवों से आ रहा है। इन क्षेत्रों से आने वाले कर्मी बड़े-बड़े डिब्बों में हड़तालियों के लिए कारों में खाना लेकर पहुंच रहे हैं।
घंटों का इंतजार तो आर्थिक बजट बिगड़ा
इन दिनों सड़कों पर यात्री बसों के लिए घंटों का इंतजार करते नजर आते हैं। बसों की किल्लत के चलते उनका आर्थिक बजट भी बिगड़ गया है। क्योंकि गंतव्य तक पहुंचने के लिए ऑटो वालों को मनमाना किराया देना पड़ रहा है।