{"_id":"6ab29f49d152fbec9103f355","slug":"drones-deployed-for-property-tax-recovery-3d-survey-begins-in-two-wards-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-156138-2026-09-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: संपत्ति कर वसूली में ड्रोन की नजर, दो वार्डों से शुरू हुआ थ्रीडी सर्वे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: संपत्ति कर वसूली में ड्रोन की नजर, दो वार्डों से शुरू हुआ थ्रीडी सर्वे
विज्ञापन
रोहिणी एफ और घरोली वार्ड में पायलट परियोजना, जीआईएस-लिडार और एआई से वास्तविक निर्माण का होगा आकलन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।दिल्ली नगर निगम ने संपत्ति कर निर्धारण व्यवस्था को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए ड्रोन आधारित जीआईएस और थ्रीडी डिजिटल ट्विन सर्वे की पायलट परियोजना शुरू की है। पहले चरण में रोहिणी जोन के रोहिणी एफ वार्ड और शाहदरा दक्षिण जोन के घरोली वार्ड में हवाई सर्वेक्षण किया जा रहा है। सर्वे से तैयार डिजिटल डाटा के आधार पर निगम वास्तविक निर्माण और मौजूदा संपत्ति कर रिकॉर्ड के बीच अंतर का पता लगाएगा।
सर्वेक्षण में ड्रोन व हवाई मैपिंग के साथ लिडार, जीआईएस, जियो-टैगिंग, एआई/एमएल आधारित विश्लेषण और थ्रीडी डिजिटल मॉडलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रत्येक संपत्ति का अधिक सटीक और एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है।
ड्रोन सर्वे के जरिये उन संपत्तियों की पहचान में मदद मिलेगी, जो अभी संपत्ति कर के दायरे में नहीं हैं या जिनका कर वास्तविक निर्माण की तुलना में कम निर्धारित है। इसके अलावा रिकॉर्ड में दर्ज नहीं अतिरिक्त मंजिलों और अन्य निर्माण का भी आकलन किया जा सकेगा। गलत तरीके से मैप की गई या डुप्लीकेट संपत्ति प्रविष्टियों की पहचान भी संभव होगी।
विज्ञापन
निगम घोषित और वास्तविक निर्मित क्षेत्र के बीच अंतर की भी निगरानी करेगा। थ्रीडी और जीआईएस डाटा के आधार पर निर्मित क्षेत्र, मंजिलों की संख्या और संपत्ति के उपयोग जैसी जानकारियों का इस्तेमाल कर कर निर्धारण में एकरूपता लाने का प्रयास किया जाएगा।
नोटिस से बकाया वसूली तक निगरानी
डिजिटल व्यवस्था के तहत संपत्तियों से जुड़ी विसंगतियों की पहचान के साथ नोटिस जारी करने, बकाया राशि और वसूली की स्थिति की निगरानी भी की जा सकेगी। वार्ड और जोन स्तर पर डैशबोर्ड के जरिये संपत्ति कर संबंधी आंकड़ों पर नजर रखी जाएगी। निगम के अनुसार, तकनीक आधारित सर्वे से मैनुअल भौतिक निरीक्षण और अनावश्यक भौतिक संपर्क कम होगा। जियो-टैग की गई जानकारी से शिकायतों के निपटारे में भी तेजी आने की उम्मीद है। निगम ने स्पष्ट किया है कि ड्रोन सर्वे तकनीकी मानचित्रण और सत्यापन का अभ्यास है और इससे प्राप्त जानकारी का इस्तेमाल लागू नियमों के अनुरूप कर निर्धारण व प्रशासनिक कार्यों में किया जाएगा।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।दिल्ली नगर निगम ने संपत्ति कर निर्धारण व्यवस्था को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए ड्रोन आधारित जीआईएस और थ्रीडी डिजिटल ट्विन सर्वे की पायलट परियोजना शुरू की है। पहले चरण में रोहिणी जोन के रोहिणी एफ वार्ड और शाहदरा दक्षिण जोन के घरोली वार्ड में हवाई सर्वेक्षण किया जा रहा है। सर्वे से तैयार डिजिटल डाटा के आधार पर निगम वास्तविक निर्माण और मौजूदा संपत्ति कर रिकॉर्ड के बीच अंतर का पता लगाएगा।
सर्वेक्षण में ड्रोन व हवाई मैपिंग के साथ लिडार, जीआईएस, जियो-टैगिंग, एआई/एमएल आधारित विश्लेषण और थ्रीडी डिजिटल मॉडलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रत्येक संपत्ति का अधिक सटीक और एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है।
विज्ञापन
ड्रोन सर्वे के जरिये उन संपत्तियों की पहचान में मदद मिलेगी, जो अभी संपत्ति कर के दायरे में नहीं हैं या जिनका कर वास्तविक निर्माण की तुलना में कम निर्धारित है। इसके अलावा रिकॉर्ड में दर्ज नहीं अतिरिक्त मंजिलों और अन्य निर्माण का भी आकलन किया जा सकेगा। गलत तरीके से मैप की गई या डुप्लीकेट संपत्ति प्रविष्टियों की पहचान भी संभव होगी।
विज्ञापन
निगम घोषित और वास्तविक निर्मित क्षेत्र के बीच अंतर की भी निगरानी करेगा। थ्रीडी और जीआईएस डाटा के आधार पर निर्मित क्षेत्र, मंजिलों की संख्या और संपत्ति के उपयोग जैसी जानकारियों का इस्तेमाल कर कर निर्धारण में एकरूपता लाने का प्रयास किया जाएगा।
नोटिस से बकाया वसूली तक निगरानी
डिजिटल व्यवस्था के तहत संपत्तियों से जुड़ी विसंगतियों की पहचान के साथ नोटिस जारी करने, बकाया राशि और वसूली की स्थिति की निगरानी भी की जा सकेगी। वार्ड और जोन स्तर पर डैशबोर्ड के जरिये संपत्ति कर संबंधी आंकड़ों पर नजर रखी जाएगी। निगम के अनुसार, तकनीक आधारित सर्वे से मैनुअल भौतिक निरीक्षण और अनावश्यक भौतिक संपर्क कम होगा। जियो-टैग की गई जानकारी से शिकायतों के निपटारे में भी तेजी आने की उम्मीद है। निगम ने स्पष्ट किया है कि ड्रोन सर्वे तकनीकी मानचित्रण और सत्यापन का अभ्यास है और इससे प्राप्त जानकारी का इस्तेमाल लागू नियमों के अनुरूप कर निर्धारण व प्रशासनिक कार्यों में किया जाएगा।