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Delhi NCR News: गठिया को सपनों की राह में बाधा न बनने दें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2026 06:55 PM IST
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विश्व गठिया दिवस पर डॉक्टरों ने दी सलाह, समय पर जांच
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सही इलाज और नियमित व्यायाम से बनाए रखें सक्रिय जीवन

अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। विश्व गठिया दिवस पर डॉक्टरों ने जोड़ों के दर्द को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और इलाज से गठिया के मरीज भी सक्रिय जीवन जी सकते हैं।
जोड़ों का दर्द केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी और आत्मविश्वास को भी प्रभावित करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गठिया को आमतौर पर बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता है, है लेकिन यह बच्चों और युवाओं को भी प्रभावित कर सकता है। जोड़ों में लगातार दर्द, सुबह उठने पर अकड़न, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी इसके प्रमुख लक्षण हैं।
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इन संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। जॉइंट रिप्लेसमेंट एवं स्पोर्ट्स मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. विपुल विजय ने बताया कि गठिया के कारण मरीज के साथ उसके परिवार की दिनचर्या भी प्रभावित होती है। उन्होंने शुरुआती जांच, संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और सही चिकित्सकीय सलाह को बीमारी नियंत्रित करने के लिए जरूरी बताया।
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इलाज का उद्देश्य आत्मनिर्भरता
ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट डॉ. नवल भाटिया ने कहा कि गठिया का इलाज केवल दर्द कम करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका उद्देश्य मरीज को उसकी सामान्य जिंदगी में वापस लौटने में मदद करना भी है। उन्होंने जोर दिया कि जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन या अकड़न को उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर बीमारी का पता चलने से उचित इलाज शुरू किया जा सकता है। इससे व्यक्ति की चलने-फिरने की क्षमता और आत्मनिर्भरता बनी रहती है।


फिजियोथेरेपी जरूरी है
डॉ. विक्रांत भारद्वाज के अनुसार, गठिया के इलाज में फिजियोथेरेपी और पुनर्वास की महत्वपूर्ण भूमिका है। सही व्यायाम से मांसपेशियों को मजबूत बनाने, शरीर की गतिविधियों में सुधार करने और चलने-फिरने का आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलती है। पुनर्वास का असली उद्देश्य मरीज को आत्मनिर्भर बनाना है।
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