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कुत्ते की दहशत: कोच और खिलाड़ियों को नोच खाया, अस्पताल में मिल नहीं रहे इंजेक्शन..

Wed, 25 Apr 2018 09:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Wed, 25 Apr 2018 09:51 AM IST
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dogs bite football coach and 3 players and no injections available in hospital
dog bite - फोटो : अमर उजाला

खेल परिसर सेक्टर-12 में सोमवार शाम को एक पागल कुत्ते ने फुटबॉल कोच प्रमोद कुमार पॉल और तीन खिलाड़ियों को काट लिया।

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नगर निगम को सूचना दिए जाने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो मंगलवार सुबह परिसर में मौजूद मजदूरों और खिलाड़ियों ने कुत्ते को लाठी डंडों से पीट-पीटकर मार डाला।

जिला खेल अधिकारी जेजी बनर्जी ने कोच प्रमोद पाल को शौचालयों के साफ-सफाई के निरीक्षण की जिम्मेदारी भी दे रखी है। इस कारण कोच प्रमोद सोमवार शाम को खेल परिसर के भूतल का निरीक्षण करने के बाद प्रथम तल के शौचालयों का निरीक्षण करने जा रहे थे।
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इस दौरान सीढ़ियों पर बैठे भूरे रंग के कुत्ते ने उन पर हमला कर दिया। कुत्ते ने उनको पैर में काट कर घायल कर दिया। इस दौरान कोच किसी तरह से अपना पैर छुड़ा कर नीचे की ओर भागे तो कुत्ता भी उनके पीछे दौड़ पड़ा।
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किसी तरह उन्होंने पागल कुत्ते से पीछा छुड़ाया। इसके बाद कुत्ते ने एथलेटिक खिलाड़ी तुषार और जिम्नास्टिक सीखने के लिए पहली बार खेल परिसर आई खिलाड़ी और वरिष्ठ खिलाड़ी को अपना शिकार बनाया।

करीब पांच लोगों को कुत्ते के काटने की खबर स्टेडियम में फैल गई। कोच प्रमोद कुमार ने बताया कि अन्य कोच उन्हें उपचार के लिए बीके अस्पताल ले गए थे। 

अगले दिन फिर दूसरे खिलाड़ियों पर किया हमला

dogs bite football coach and 3 players and no injections available in hospital
dog bite - फोटो : अमर उजाला

खेल परिसर में कुत्ते के काटे जाने की घटना के बाद खिलाड़ी काफी डरे हुए थे। इसकी सूचना खिलाड़ियों ने नगर निगम को भी दे दी थी, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मंगलवार को परिसर में अभ्यास कर रहे तीरंदाजी खिलाड़ियों पर भी पागल कुत्ते ने हमला कर दिया। इस पर खेल परिसर में ही निर्माणाधीन इंडोर स्टेडियम में काम कर रहे मजदूरों व खिलाड़ियों ने लाठी डंडों से हमला कर कुत्ते को मार दिया।
      
नगर निगम के पास नहीं हैं कोई इंतजाम
नगर निगम के पास लावारिस कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि वे कुत्तों को पकड़ कर उन्हें कहीं और नहीं छोड़ सकते हैं।

ऐसे में केवल उनकी नसबंदी करना ही एक विकल्प है। मगर उसके लिए भी नगर निगम ने अभी तक कुछ नहीं किया है। नगर निगम ने लावारिस कुत्तों की संख्या में कमी लाने के लिए उनकी नसबंदी करवानी है।

इसके लिए कमेटी ने उसका बजट आदि तय करना है, मगर पिछले कई माह से कमेटी गठित करने के लिए भी बैठक नहीं हो पाई है। महापौर सुमन बाला का कहना है कि नगर निगम लावारिस जानवरों से शहरवासियों को निजात दिलाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही अधिकारियों की बैठक बुलाकर इस गंभीर मामले का कोई न कोई समाधान अवश्य निकालेंगी।

दो माह से बीके अस्पताल में नहीं हैं रैबीज के इंजेक्शन

शहर के सबसे बड़े बादशाह खान सिविल अस्पताल में इस साल फरवरी माह के आखिरी सप्ताह में रैबीज के इंजेक्शन समाप्त हो चुके हैं। उसके बाद से अस्पताल में इंजेक्शन नहीं आए हैं।

ऐसे में 18 लाख की आबादी वाले इस शहर के अस्पताल में कुत्ते या बंदर के काटे जाने पर इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टर इंजेक्शन बाजार से लाने के लिए भेज देते हैं।

बाजार में एक इंजेक्शन की कीमत 350 से 400 रुपये है। कुत्ते या बंदर के काटने पर रैबीज के तीन इंजेक्शन का कोर्स होता है। रोजाना बीके में 25 से 30 मरीज कुत्ते या बंदर के काटने के आते हैं।

ऐसे में हर कोई इतने महंगे इंजेक्शन नहीं ले पाता है, मगर मजबूरी में उसे बाहर से इंजेक्शन खरीदने पड़ते हैं।  

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