सोसायटी की 16वीं मंजिल पर पहुंचा कुत्ता, कई लोगों को बनाया शिकार
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शहर में लावारिस कुत्तों का खौफ बढ़ता जा रहा है। विगत एक महीने में दो सेक्टरों में दर्जनों लोग लावारिस कुत्तों के शिकार बन चुके हैं। लेकिन प्राधिकरण और प्रशासनिक लाचारी से समस्या समाधान नहीं निकल पा रहा है। इसकी एक वजह पशु प्रेमी लोग भी हैं, जो इनको सेक्टरों से बाहर करने पर तुरंत कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं।
इस बार सेक्टरवासियों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर समस्या बताई है, ताकि लावारिस कुत्तों से निजात मिल सके। एक कुत्ता तो सोसायटी की 16वीं मंजिल तक पहुंच गया और उसने दर्जनों लोगों को शिकार बनाया।
सेक्टर-34 व 30 के निवासी लावारिस कुत्तों से परेशान हैं। सेक्टर-34 आरडब्ल्यूए महासचिव धर्मेंद्र शर्मा ने मानवाधिकार आयोग को लिखे पत्र में कहा कि विगत एक महीने में कई बार लावारिस कुत्तों ने महिलाओं, बुजुर्गों व बच्चों को अपना शिकार बनाया है। इनके डर से लोगों ने घरों से निकलना बंद कर दिया है।
शिकायत के बाद भी जिला प्रशासन व प्राधिकरण कार्रवाई नहीं कर रहा है। जबकि अच्छी खासी रकम एसपीसीए व दिल्ली की संस्था को सिर्फ कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी करने में खर्च की जाती है। यही आलम सेक्टर-30 का भी है।
बंदर व लावारिस कुत्तों के डर से घरों में दुबके लोग
सेक्टर-30 अध्यक्ष प्रदीप वर्मा ने बताया कि एक महीने में दर्जनों लोगों को लावारिस कुत्तों ने काटा है। यहां रहने वाली डॉ. रुचि अग्रवाल ने बताया कि उनके बुजुर्ग माता-पिता को लावारिस कुत्तों ने शिकार बनाया। प्राधिकरण से शिकायत की। लेकिन कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। ऐसे में प्राधिकरण व जिला प्रशासन को सख्ती बरतनी चाहिए।
सेक्टर-77 की कई सोसायटी के लोग डर के साये में रह रहे हैं। चूंकि यहां बंदर व लावारिस कुत्ते निवास कर रहे हैं। प्रतीक विस्टिरिया निवासी निशा राय ने बताया कि सोसायटी में बंदरों ने हंगामा चरम पर है। बाहर जाने में डर लगता है। सोसायटी की सीढ़ियों पर बंदर बैठे रहते हैं। कई बार बच्चों पर हमला कर चुके हैं। वहीं, सोसायटी के अंदर लावारिस कुत्ते रह रहे हैं। सोसायटी के निवासी अधिक रुपये खर्च करने के बाद भी ठीक से रह नहीं पा रहे हैं।
फोनरवा अध्यक्ष एनपी सिंह ने कहा कि प्राधिकरण ने शहर की अच्छाई के लिए कोई भी काम मना से नहीं किया है। कई बार लावारिस कुत्तों से निजात दिलाने के लिए अधिकारियों से अपील की गई है कि नोएडा को चार जोन में बांटकर टीम गठित की जाए। लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। ऐसे में लोगों की जान को खतरा है।