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जन्म के बाद से ही त्वचा का रंग पड़ने लगा था नीला, 20 दिन के बच्चे को ऐसे मिला नया जीवन

Tue, 11 Dec 2018 08:00 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 11 Dec 2018 08:00 PM IST
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Doctors save new born baby by Transpose of Great Artery Surgery in delhi
सांकेतिक तस्वीर

संतान की प्राप्ति हर माता-पिता के जीवन में परम सुख है, लेकिन उसी नई जिंदगी के बीमार होने का दुख भी किसी सदमे से कम नहीं होता। ऐसे ही उत्तरी दिल्ली निवासी माता-पिता वीना और विनोद बेटे के जन्म को लेकर बेहद खुश थे, लेकिन जब उन्हें पता चला कि उनका बेटा जन्मजात दिल की बीमारी ट्रांस्पोजिशन ऑफ ग्रेटर आर्टरीज(शरीर नीला पड़ने लगता है) से पीड़ित है तो वे परेशान हो उठे। वह बच्चे को अपोलो अस्पताल लेकर पहुंचे। बच्चे को तुरंत ऑपरेशन की जरूरत होने पर अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. मुथू जोशी के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम तैयार हुई और आपरेशन कर बच्चे की जान बचाई।

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डॉ. जोथी के अनुसार, बच्चे के जन्म के एक सप्ताह के अंदर ही उसका शरीर नीला पड़ने लगा, तभी माता-पिता उसे लेकर एक स्थानीय डॉक्टर के पास पहुंचे, जहां जांच के बाद बीमारी का पता चला। इस बीमारी में दिल से फेफड़ों एवं शरीर के अन्य हिस्सों तक खून ले जाने वाली धमनियां बिल्कुल उल्टी तरह से जुड़ी होती हैं। 
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जिनमें मुख्य धमनी (आर्योटा आर्टरी) दाएं वेंट्रिकल से और पल्मोनरी धमनी बाएं वेंट्रिकल से जुड़ी थी, यह दिल की सामान्य संरचना से बिल्कुल विपरीत था। इसके अलावा 20 दिन के इस बच्चे के दिल में दो बड़े छेद (वीएसडी और एएसडी) थे। साथ ही उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। 

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इन वजहों से हो सकती है बीमारी

चूंकि बच्चे का वजन 2.2 किलो ही था, इसलिए ऑपरेशन के दौरान करीब 40 फीसदी जोखिम के साथ डॉक्टरों ने सर्जरी शुरू की। करीब पांच घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद बच्चे को बचाने में डॉक्टरों को सफलता मिली। डॉक्टरों के अनुसार, करीब एक सप्ताह की निगरानी के बाद बच्चे को छुट्टी दे दी है।             

डॉ. जोथी का कहना है कि इस बीमारी का कोई कारण नहीं होता। हालांकि, अगर मां की उम्र ज्यादा हो या परिवार में किसी नजदीकी रिश्तेदार के साथ शादी होने पर या गर्भावस्था के दौरान पोषण की कमी के कारण हो सकती है। इसके अलावा अगर गर्भधारण के पहले तीन महीनों में मां को संक्रमण हो जाए, उसे एंटीबायोटिक देने पड़ें या मां द्वारा शराब का सेवन, धूम्रपान करना भी इसके कारण हो सकते हैं। इनसे लोगों को बचना चाहिए। 

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