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मासूम के हाथ में घुसी चार इंच मोटी छड़: देरी से पहुंचता अस्पताल तो काटनी पड़ती बांह, बच्चे का हाल देख डॉक्टर भी गए कांप

Mon, 04 Jul 2022 09:13 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Mon, 04 Jul 2022 09:13 PM IST
सार

दुर्घटना तब हुई जब बच्चा ई-रिक्शा की यात्रा कर रहा था और इस दौरान वह लोहे की छड़ पर गिर गया। बच्चा लोहे की रॉड पर इतनी तेजी से गिरा कि उसके बाएं हाथ तक खून पहुंचाने वाली प्राइमरी आर्टरी अलग हो गई। इससे हाथ सुन्न हो गया।

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Doctors removed a four inch thick iron rod that had entered arm of a child in Delhi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

दिल्ली के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने तीन साल के बच्चे के हाथ से चार इंच मोटी लोहे की छड़ निकालकर जान बचाई है। चोट गंभीर थी। अधिक खून बहने की वजह से बच्चा बेहोश हो गया था। डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय पर बच्चे की बांह से राड नहीं निकलती तो बच्चा दिव्यांग हो सकता था। द्वारका स्थित आकाश अस्पताल के मुताबिक, यह दुर्घटना तब हुई जब बच्चा ई-रिक्शा की यात्रा कर रहा था और इस दौरान वह लोहे की छड़ पर गिर गया। बच्चा लोहे की रॉड पर इतनी तेजी से गिरा कि उसके बाएं हाथ तक खून पहुंचाने वाली प्राइमरी आर्टरी अलग हो गई। इससे हाथ सुन्न हो गया।

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वहीं, कंधे का दूसरा हिस्सा भी जख्मी हो गया था। जांच करने पर पता चला कि पर्याप्त खून न होने के कारण बच्चे का हीमोग्लोबिन स्तर 14 की सामान्य सीमा से गिरकर चार हो गया था। चोट इतनी गंभीर थी कि बाएं हाथ में खून ही नहीं जा पा रहा था। इस वजह से डॉक्टर उसके बाएं हाथ में नाड़ी तक का पता नहीं लगा पा रहे थे।

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सर्जरी में शामिल डॉ. गोदारा ने कहा कि बच्चे की उम्र बहुत कम होने के कारण सर्जरी काफी मुश्किल और खतरे से भरी हुई थी। यदि जरा सी भी कोई गलती हो जाती तो बच्चे का हाथ काटने की नौबत आ सकती थी। खून की आपूर्ति को जारी रखने के लिए पीड़ित के पैर से एक नस निकाली और उसे कनेक्टिंग आर्टरी के रूप में इस्तेमाल किया। नस की वजह से बच्चे की बांह दिव्यांग होने से बच गई। डॉक्टरों का कहना है कि यदि बच्चा आधा घंटा देरी से पहुंचता तो उसका हाथ नहीं बच पाता।

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