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जांच में शामिल होने से पहले ही भागा डॉक्टर
ब्यूरो / अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Thu, 11 Feb 2016 02:02 PM IST
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स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों ने पुलिस पर कोख के हत्यारों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। अधिकारियों का कहना है कि 20 जनवरी को गिरफ्तार किए गए लिंग जांच के आरोपी दलाल की पूछताछ पर भी जांच अधिकारी ने उचित कार्रवाई नहीं की है।
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उधर बुलंदशहर का आरोपी डॉक्टर भी साइन करने के बाद भीड़ का फायदा उठाकर फरार हो गया जबकि पुलिस उसे जांच में शामिल करना चाहती थी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उसे भगाने में भी पुलिस का हाथ होने का संदेह जताया है।
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कहा गया है कि आरोपी डॉक्टर को स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ अल्ट्रासाउंड केंद्र को सील करने गए पुलिस अधिकारी ने हिरासत से जाने दिया।
इस बारे में जांच अधिकारी एएसआई परमानंद का कहना है कि अल्ट्रासाउंड केंद्र को सील करने के बाद आरोपी डॉक्टर के साइन कराए गए थे। हमें डॉक्टर को तफ्तीश में शामिल करना था, लेकिन भीड़ का फायदा उठाकर डाक्टर मौके से फरार हो गया।
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साथ ही उनका यह भी कहना है कि वह हमारी कस्टडी में नहीं था। वहीं इस पूरे मामले में सीएमओ डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता का कहना है कि मामले का आरोपी मयंक अग्रवाल बुलंदशहर कोतवाली में भी पुलिस कस्टडी में था। डॉक्टरों की टीम के आने के बाद आरोपी डॉक्टर भाग गया या उसे भगाया गया, इस बात की जांच होनी चाहिए।
क्या था मामला
सीएमओ डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता ने स्टिंग ऑपरेशन कर लिंग जांच के एक दलाल राजू व चालक सुरेंद्र को दबोच कर शहर थाना पुलिस को सौंपा था।
सीएमओ डॉक्टर गुप्ता के अनुसार उन्हें सूचना मिली थी कि एक नर्सिंग होम पर कार्यरत राजू गर्भवती महिलाओं को यूपी ले जाकर विभिन्न केंद्रों पर लिंग जांच कराता है। आला अधिकारियों की देखरेख में एक टीम का गठन किया गया।
एक आशा वर्कर व उसकी भाभी जो कि तीन माह कि गर्भवती थी को नकली ग्राहक बनाया गया। राजू से उनका सौदा दस हजार रुपये में तय हुआ।
20 जनवरी को राजू ने बुलंदशहर के सांई अल्ट्रासाउंड केंद्र में लिंग जांच कराई। आरोपी से पांच हजार रुपये बरामद कर गिरफ्तार कर लिया गया था। 22 फरवरी को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुलिस टीम के साथ जाकर केंद्र को सील कर दिया, लेकिन कथित रुप से डॉक्टर पुलिस की हिरासत से भाग गया।