दिल्ली: पेट की नली से डॉक्टरों ने निकाला खून से भरा 20 सेंटीमीटर का गुब्बारा
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दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने एक मरीज के पेट की नली से 20 सेंटीमीटर के गुब्बारे को बाहर निकाला। ये गुब्बारा खून से भरा हुआ था। आमतौर पर बड़े आकार में होने के कारण गुब्बारा पेट में ही फटने की आशंका ज्यादा होती है लेकिन डॉक्टरों ने करीब 4 घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान काफी जद्दोजहद के बाद गुब्बारे को बाहर निकालने में कामयाबी हासिल की।
डॉक्टरों के अनुसार 30 वर्षीय मरीज के पेट में मुख्य महाधमनी (नली) 20 सेंटीमीटर के विशाल आकार में बढ़ गई थी। जबकि सामान्यत: इसका आकार 17 से 18 मिलीमीटर होता है। यह रक्त से भरे एक विशाल गुब्बारे की तरह था जो किसी भी समय फट सकता था और घातक साबित हो सकता था। डॉ. वी. एस. बेदी की टीम द्वारा उच्च जोखिम से भरा ऑपरेशन किया गया तब मरीज की जान बची।
डॉक्टरों के अनुसार 14.1 फीसदी मरीजों में 6 सेंटीमीटर से अधिक फूली धमनी फट जाती है। जबकि चिकित्सीय क्षेत्र में अभी तक 11 सेंटीमीटर से अधिक फूली धमनी के केस एक या दो ही मिलते हैं। इसीलिए डॉ. बेदी का मानना है कि इस उम्र के मरीज की इतनी फूली हुई मुख्य धमनी मिलना पहला मामला है।
उन्होंने बताया कि इतनी बड़ी फूली हुई मुख्य धमनी 30 साल के मरीज सूरज सिंह में होना हमारे लिए अचंभे का विषय था। ज्यादातर ऐसे केस 60 से 70 साल के मरीजों में ही देखे गए हैं। इसका सफलतापूर्वक ऑपरेशन यह सिद्ध करता है कि इतनी बड़ी फूली हुई धमनी के बावजूद मरीज की जान बचाना संभव है।
पेट में दर्द की शिकायत लेकर आया था मरीज
डॉ. बेदी ने बताया कि दो सप्ताह पहले ही पेट में दर्द के कारण मरीज अस्पताल आया था। प्रारंभिक जांच में उसके शरीर के दाएं तरफ बहुत बड़ी गांठ प्रतीत हो रही थी। एनजीओग्राम जांच से पता चला कि ये गांठ हृदय से नीचे जाने वाली मुख्य धमनी थी जो रुकावट की वजह से 20 सेंटीमीटर फूली हुई थी और खून के थक्कों से भरी हुई थी। धमनी का इतना बड़ा आकार और इतनी कम उम्र में होना डॉक्टरों के लिए आश्चर्य का विषय था। दुनिया भर में इतने बड़े धमनी का ऑपरेशन कुछ ही मरीजों में किया गया है।
ऑपरेशन के बाद मरीज को तत्काल अति आधुनिक हाइब्रिड वैस्कुलर कैथ लैब में ले जाया गया और करीब 4 घंटे ऑपरेशन के बाद धमनी को रिपेयर करके खून के थक्के को बाहर निकाल दिया गया। करीब एक लीटर गाढ़े खून के थक्के मरीज के 20 सेंटीमीटर बैलूनरूपी फूली मुख्य धमनी से चिपक गयी फिर उसे रिपेयर करके सामान्य साइज का कर दिया गया।
ऑपरेशन के अगले दिन होश में आने के बाद मरीज के पेट का तीव्र दर्द जा चुका था। ऑपरेशन के सातवें दिन यानी 24 जून को सूरज सिंह का 30वां जन्म दिवस था जो उसने डॉक्टरों एवं नर्सों के साथ अस्पताल में केक काटकर मनाया।