क्या आप जानते है, कौन सी बीमारी से ग्रस्त थे महान वैज्ञानिक स्टीफेन हॉकिंग
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दुनिया के मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। हमेशा व्हीलचेयर पर रहने वाले हॉकिंग आम इंसानों से अलग दिखते थे तो इसके पीछे एक बड़ा कारण उनकी बीमारी भी थी।
हॉकिंग को जो बीमारी थी, उसे चिकित्सा के क्षेत्र में मोटर न्यूरॉन डिसीज (एमएनडी) के नाम से जाना जाता है। ऐसा नहीं है कि एमएनडी से केवल हॉकिंग पीड़ित थे। इस तरह की बीमारी से सैकड़ों लोग पीड़ित हैं।
गुरुग्राम के बड़े अस्पतालों में इस बीमारी से पीड़ित सप्ताह में औसतन दो मरीज आते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ये बीमारी दिमाग और तंत्रिका के सेल में परेशानी पैदा होने की वजह से होती है। ये सेल वक्त के साथ काम करना बंद कर देते हैं, लेकिन ये अब तक पता नहीं चला कि ये कैसे हुआ है।
ये बीमारी हमेशा जानलेवा होती है
पारस अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रजनीश अग्रवाल का कहना है कि यह एक असाधारण स्थिति है, जो दिमाग और तंत्रिका पर असर डालती है। इससे शरीर में कमजोरी पैदा होती है, जो वक्त के साथ बढ़ती जाती है।
ये बीमारी हमेशा जानलेवा होती है और जीवनकाल सीमित बना देती है। हालांकि कुछ लोग ज्यादा जीने में कामयाब हो जाते हैं, हॉकिंग के मामले में ऐसा ही हुआ था।
फोर्टिस अस्पताल के डॉ. परवीन गुप्ता कहते हैं कि इस बीमारी के औसतन महीने में 6-8 मरीज आते हैं। यह आमतौर पर 50-60 आयु वर्ग के बीच के अधिक होते हैं। इस बीमारी का कोई इलाज मौजूद नहीं है लेकिन ऐसे इलाज मौजूद हैं जो रोजमर्रा के जीवन पर पड़ने वाले इसके असर को सीमित बना सकते हैं।
मोटर न्यूरॉन बीमारी असाधारण स्थिति है, जो आम तौर पर 60 की उम्र में हमला करती है लेकिन ये सभी उम्र के लोगों को हो सकती है।
इसके शुरुआती लक्षण ये हैं:
- एड़ी या पैर में कमजोरी महसूस होना
- बोलने में दिक्कत होने लगती है और कुछ तरह का खाना खाने में भी परेशानी होती है
- पकड़ कमजोर हो सकती है
- हाथ से चीजें गिर सकती हैं
- वजन कम होने लगता है
- हाथ और पैरों की मांसपेशी वक्त के साथ पतली होने लगती हैं
- रोने और हंसने को काबू करने में दिक्कत होती है