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भूलकर भी नोएडा के इन 18 बड़े बिल्डरों से न खरीदे घर, इस रिपोर्ट से हुआ खुलासा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Sun, 03 Jun 2018 10:07 AM IST
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सांकेतिक चित्र
नोएडा में 18 बिल्डर प्रोजेक्टों में फ्लैट खरीदार फंस सकते हैं। ऐसे प्रोजेक्टों की आर्थिक हालत सहित कई बिंदुओं पर ऑडिट एजेंसी क्यूरी एंड ब्राउन की नकारात्मक रिपोर्ट आई है। इनमें से कितने प्रोजेक्टों में खरीदारों ने पैसा लगाया है और कितने में नहीं, इसका खुलासा प्राधिकरण नहीं कर रहा है।
प्राधिकरण ने बिल्डरों से ऐसे प्रोजेक्टों की कार्ययोजना मांगी है, ताकि इस पर विशेष तौर पर काम किया जा सके। 51 बिल्डर प्रोजेक्टों के ऑडिट के बाद 33 में निवेश को ऑडिट एजेंसी सुरक्षित मान रही है। हालांकि, इन पर भी विशेष निगरानी रखने पर बल दिया गया है।
ऑडिट एजेंसी की ओर से नोएडा प्राधिकरण को रिपोर्ट सौंपने के बाद शुक्रवार को इसे जारी कर दिया गया। प्राधिकरण के एसीईओ अशोक कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, ऑडिट एजेंसी ने पता लगाने की कोशिश की कि बिल्डर ने खरीदारों से कितना पैसा लिया और कितना पैसा प्रोजेक्ट पर खर्च किया। यही नहीं उक्त प्रोजेक्ट में कितना काम बचा हुआ है। इसकी भी जानकारी ली गई।
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प्राधिकरण ने बिल्डरों से ऐसे प्रोजेक्टों की कार्ययोजना मांगी है, ताकि इस पर विशेष तौर पर काम किया जा सके। 51 बिल्डर प्रोजेक्टों के ऑडिट के बाद 33 में निवेश को ऑडिट एजेंसी सुरक्षित मान रही है। हालांकि, इन पर भी विशेष निगरानी रखने पर बल दिया गया है।
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ऑडिट एजेंसी की ओर से नोएडा प्राधिकरण को रिपोर्ट सौंपने के बाद शुक्रवार को इसे जारी कर दिया गया। प्राधिकरण के एसीईओ अशोक कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, ऑडिट एजेंसी ने पता लगाने की कोशिश की कि बिल्डर ने खरीदारों से कितना पैसा लिया और कितना पैसा प्रोजेक्ट पर खर्च किया। यही नहीं उक्त प्रोजेक्ट में कितना काम बचा हुआ है। इसकी भी जानकारी ली गई।
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ऑडिट एजेंसी ने यह देखा
building
ऑडिट एजेंसी ने बिल्डर प्रोजेक्टों के ऑडिट के बाद सात श्रेणी में बांटा है। इसके माध्यम से प्रोजेक्टों को सुरक्षित और असुरक्षित बताया गया है। रिपोर्ट में बिल्डर प्रोजेक्टों को ए प्लस, ए, बी प्लस, बी, सी प्लस, सी, डी श्रेणी में रखा गया है। इसके माध्यम से प्रोजेक्टों को सुरक्षित और असुरक्षित माना गया है।
ऑडिट एजेंसी ने यह देखा
- घर खरीदारों से कितनी धन राशि प्राप्त हुई।
- परियोजना में कितना काम बचा हुआ है।
- प्राधिकरण को कितना पैसा बिल्डर से वसूलना है।
- परियोजना के लिए बैंक से कितना लोन लिया गया है।
33 प्रोजेक्ट हैं सुरक्षित, लेकिन निगरानी जरूरी
ऑडिट रिपोर्ट में ए प्लस श्रेणी में सेक्टर-75 के मैक्सब्लीस कंस्ट्रक्शन, सेक्टर-75 के वैलूएंट इंफ्राडेवलपर्स, सेक्टर-78 के जीएस प्रमोटर्स, ए श्रेणी में सेक्टर-137 के एमपीजी रियल्टी, सेक्टर-78 के अंतरिक्ष डेवलपर्स, सेक्टर-137 के लॉजिक्स, सेक्टर-108 के डिवाइन्स इंडिया, सेक्टर-121 के आईवी काउंटी, सेक्टर-100 के क्लाउड9, सेक्टर-50 के एंबियंस, सेक्टर-75 के ई-होम्स, सेक्टर-168 के ओप्यूलेंट, सेक्टर-107 के हसींदा प्रोजेक्ट, सेक्टर-78 के नेक्सजेन इंफ्राकॉन, सेक्टर-119 के आईवीआरसीएल इंफ्रा, सेक्टर-108 के लॉरिएट बिल्डवेल, सेक्टर-107 के सनवर्ल्ड डेवलपर्स, बी प्लस में सेक्टर-77 के पफेक्ट प्रोपर्टी, सेक्टर-74 के सुपरटेक, सेक्टर-107 के प्रतीक इंफ्राप्रोजेक्ट्स, सेक्टर-143 के थ्रीसी, सेक्टर-74 के अजनारा, बी श्रेणी में सेक्टर-75 के इंडोसैम, सेक्टर-75 के गार्डेनिया इंडिया, सेक्टर-135 के टूडे होम्स, सेक्टर-168 के सनवर्ल्ड रेजिडेंसी, सेक्टर-137 के पैरामाउंट टावर्स, सी प्लस कैटेगरी में सेक्टर-143 के किंडल इंफ्राहाइट्स, सेक्टर-75 के एम्स मैक्स गार्डेनिया, सेक्टर-107 के थ्री प्लैटिनम सॉफ्टटेक, सेक्टर-77 के एवीपी बिल्डटेक, सेक्टर-75 के फ्यूटेक शेल्टर्स और सेक्टर-70 के पैन रियल्टर्स को रखा गया है। इनमें निवेश को सुरक्षित माना जा सकता है, लेकिन इन पर प्राधिकरण को निगरानी करने को कहा है।
ऑडिट एजेंसी ने यह देखा
- घर खरीदारों से कितनी धन राशि प्राप्त हुई।
- परियोजना में कितना काम बचा हुआ है।
- प्राधिकरण को कितना पैसा बिल्डर से वसूलना है।
- परियोजना के लिए बैंक से कितना लोन लिया गया है।
33 प्रोजेक्ट हैं सुरक्षित, लेकिन निगरानी जरूरी
ऑडिट रिपोर्ट में ए प्लस श्रेणी में सेक्टर-75 के मैक्सब्लीस कंस्ट्रक्शन, सेक्टर-75 के वैलूएंट इंफ्राडेवलपर्स, सेक्टर-78 के जीएस प्रमोटर्स, ए श्रेणी में सेक्टर-137 के एमपीजी रियल्टी, सेक्टर-78 के अंतरिक्ष डेवलपर्स, सेक्टर-137 के लॉजिक्स, सेक्टर-108 के डिवाइन्स इंडिया, सेक्टर-121 के आईवी काउंटी, सेक्टर-100 के क्लाउड9, सेक्टर-50 के एंबियंस, सेक्टर-75 के ई-होम्स, सेक्टर-168 के ओप्यूलेंट, सेक्टर-107 के हसींदा प्रोजेक्ट, सेक्टर-78 के नेक्सजेन इंफ्राकॉन, सेक्टर-119 के आईवीआरसीएल इंफ्रा, सेक्टर-108 के लॉरिएट बिल्डवेल, सेक्टर-107 के सनवर्ल्ड डेवलपर्स, बी प्लस में सेक्टर-77 के पफेक्ट प्रोपर्टी, सेक्टर-74 के सुपरटेक, सेक्टर-107 के प्रतीक इंफ्राप्रोजेक्ट्स, सेक्टर-143 के थ्रीसी, सेक्टर-74 के अजनारा, बी श्रेणी में सेक्टर-75 के इंडोसैम, सेक्टर-75 के गार्डेनिया इंडिया, सेक्टर-135 के टूडे होम्स, सेक्टर-168 के सनवर्ल्ड रेजिडेंसी, सेक्टर-137 के पैरामाउंट टावर्स, सी प्लस कैटेगरी में सेक्टर-143 के किंडल इंफ्राहाइट्स, सेक्टर-75 के एम्स मैक्स गार्डेनिया, सेक्टर-107 के थ्री प्लैटिनम सॉफ्टटेक, सेक्टर-77 के एवीपी बिल्डटेक, सेक्टर-75 के फ्यूटेक शेल्टर्स और सेक्टर-70 के पैन रियल्टर्स को रखा गया है। इनमें निवेश को सुरक्षित माना जा सकता है, लेकिन इन पर प्राधिकरण को निगरानी करने को कहा है।
किसने किए पैसे डायवर्ट, यह अब भी सवाल
builders- do not charge GST
18 बिल्डर प्रोजेक्टों के नाम नहीं किए सार्वजनिक
नोएडा प्राधिकरण ने रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षित बताए 33 बिल्डर प्रोजेक्टों को वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया, लेकिन उन 18 बिल्डर प्रोजेक्टों के नाम को सार्वजनिक नहीं किया जिसमें माना जा रहा है कि 29021 फ्लैटों में निवेश असुरक्षित है। सुरक्षित बताए 33 प्रोजेक्टों के बारे में प्राधिकरण का कहना है कि इनकी वित्तीय स्थिति सकारात्मक दिखाई पड़ रही है। बावजूद इसके इनकी निगरानी होगी। डेवलपर्स से कंस्ट्रक्शन प्लान मांगा जाएगा। फ्लैट खरीदार भी ऐसे डेवलपर्स का बकाया समय से चुका सकते हैं, ताकि बिल्डरों को प्रोजेक्ट पूरा करने में मदद मिल सके।
किसने किए पैसे डायवर्ट, यह अब भी सवाल
सूत्रों की मानें तो क्यूरी एंड ब्राउन की रिपोर्ट में कई बिल्डरों की ओर से खरीदारों से पैसे लेकर दूसरे प्रोजेक्ट या जमीनों में डायवर्ट करने की बात सामने आ रही थी, लेकिन जब रिपोर्ट सार्वजनिक की गई तो उसमें यह नहीं बताया गया कि किन-किन बिल्डरों ने पैसों को डायवर्ट किया।
नोएडा प्राधिकरण, सीईओ, आलोक टंडन ने कहा, विस्तृत ऑडिट ने हमें जमीनी वास्तविकता को समझने व परियोजना के लिए उपयुक्त कार्य योजना तैयार करने में मदद की है। परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जाएगी। जहां चुनौती है वहां बिल्डर के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। इसके लिए कार्य योजना मांगी गई है। जो भी बिल्डर अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए आगे आएगा। उसे प्राधिकरण का पूरा सहयोग मिलेगा।
नोएडा प्राधिकरण ने रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षित बताए 33 बिल्डर प्रोजेक्टों को वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया, लेकिन उन 18 बिल्डर प्रोजेक्टों के नाम को सार्वजनिक नहीं किया जिसमें माना जा रहा है कि 29021 फ्लैटों में निवेश असुरक्षित है। सुरक्षित बताए 33 प्रोजेक्टों के बारे में प्राधिकरण का कहना है कि इनकी वित्तीय स्थिति सकारात्मक दिखाई पड़ रही है। बावजूद इसके इनकी निगरानी होगी। डेवलपर्स से कंस्ट्रक्शन प्लान मांगा जाएगा। फ्लैट खरीदार भी ऐसे डेवलपर्स का बकाया समय से चुका सकते हैं, ताकि बिल्डरों को प्रोजेक्ट पूरा करने में मदद मिल सके।
किसने किए पैसे डायवर्ट, यह अब भी सवाल
सूत्रों की मानें तो क्यूरी एंड ब्राउन की रिपोर्ट में कई बिल्डरों की ओर से खरीदारों से पैसे लेकर दूसरे प्रोजेक्ट या जमीनों में डायवर्ट करने की बात सामने आ रही थी, लेकिन जब रिपोर्ट सार्वजनिक की गई तो उसमें यह नहीं बताया गया कि किन-किन बिल्डरों ने पैसों को डायवर्ट किया।
नोएडा प्राधिकरण, सीईओ, आलोक टंडन ने कहा, विस्तृत ऑडिट ने हमें जमीनी वास्तविकता को समझने व परियोजना के लिए उपयुक्त कार्य योजना तैयार करने में मदद की है। परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जाएगी। जहां चुनौती है वहां बिल्डर के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। इसके लिए कार्य योजना मांगी गई है। जो भी बिल्डर अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए आगे आएगा। उसे प्राधिकरण का पूरा सहयोग मिलेगा।